Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

सब्जियां नहीं पसंद तो फाइबर के लिए खा सकते हैं ये 10 फूड्स

क्‍या आपको भी फाइबर के ल‍िए सब्‍ज‍ियां खाना पसंद नहीं है? च‍िंता मत करें, सब्‍ज‍ियों के अलावा भी कई फूड्स हैं ज‍िनसे शरीर को फाइबर म‍िल सकता है। शरीर में फाइबर की कमी से पाचन समस्‍याएं और थकान हो सकती है। जानते हैं, 10 फाइबर र‍िच फूड्स के बारे में साथ ही, जानेंगे इनमें क‍ितना प्रोटीन होता है?

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मुझे बचपन में सब्‍ज‍ियां खाना पसंद नहीं था। मम्‍मी जबरदस्‍ती मेरे खाने में कभी टमाटर, तो कभी पालक को शामि‍ल करने के अलग-अलग तरीके ढूंढती रहती थीं। उनका कहना था क‍ि फल और सब्‍जि‍यों से हमें फाइबर म‍िलता है और इससे मेरी सेहत अच्‍छी रहेगी। मां की बात वाकई सच थी। शरीर को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए कई पोषक तत्‍वों की जरूरत होती है ज‍िनमें से एक है फाइबर। फाइबर से पाचन बेहतर होता है, वजन कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है, बैड कोलेस्‍ट्रॉल कंट्रोल होता है ज‍िससे हार्ट हेल्‍थ अच्‍छी रहती है, शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मि‍लती है और आंतों में फाइबर की मदद से गुड बैक्‍टीर‍िया की संख्‍या बढ़ती है।

आईसीएमआर (National Institute of Nutrition) के मुताब‍िक, फाइबर का सेवन करने से अपच, कब्‍ज जैसी पाचन समस्‍याओं से बचने में मदद म‍िलती है। फाइबर शरीर को पोषण देता है और क्रॉन‍िक बीमार‍ियों का खतरा कम करता है। फाइबर का सेवन करने से ह्रदय रोग, मोटापा जैसी बीमार‍ियों को रोकने में मदद म‍िलती है। ताजे फल और सब्‍ज‍ियों में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, लेक‍िन कई लोगों को सब्‍जि‍यां खाना पसंद नहीं होता। अगर आप भी उनमें से एक हैं, तो च‍िंता न करें हम आपको बताएंगे 10 ऐसे फाइबर र‍िच फूड्स जो आपके शरीर में फाइबर की कमी को पूरा करेंगे। इस वि‍षय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. च‍िया सीड्स की 2 टेबलस्‍पून से म‍िलेगा 10 ग्राम फाइबर- Chia Seeds

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  • दो टेबलस्‍पून च‍िया सीड्स में 10 ग्राम फाइबर होता है।
  • इसे रातभर भ‍िगोकर रखें और सुबह च‍िया सीड्स का सेवन करें।
  • च‍िया सीड्स को ड्राई फार्म में लेने से बचना चाह‍िए।

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2. फ्लैक्‍स सीड्स की 2 टेबलस्‍पून से 5 से 6 ग्राम फाइबर म‍िलेगा- Flax Seeds

  • फ्लैक्‍स सीड्स को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं। दो टेबलस्‍पून में पांच से छह ग्राम फाइबर होता है।
  • फ्लैक्‍स सीड्स को म‍िक्‍सी में पीस लें और फ‍िर इसका सेवन करें, तो फायदे दोगुने हो सकते हैं।

3. आधा कप दाल से म‍िलेगा 8 ग्राम फाइबर- Cooked Lentil

  • आधा कप पकी हुई दाल में आठ ग्राम फाइबर होता है।
  • दाल प्रोटीन का भी अच्‍छा स्रोत है, वेट लॉस कर रहे हैं, तो इसका सेवन कर सकते हैं।

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4. आधा कप उबले चने से म‍िलेगा 6 ग्राम प्रोटीन- Boiled Chickpeas

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5. एक कप रसभरी से म‍िलेगा 8 ग्राम फाइबर- Raspberry Fruit

  • एक कप रसभरी खाएंगे, तो शरीर को आठ ग्राम फाइबर म‍िलता है।
  • फ्रोजन रसभरी से भी इतना ही फाइबर म‍िलता है।
  • रसभरी में व‍िटाम‍िन ए होता है जो आंखों की सेहत के ल‍िए फायदेमंद है।

6. एक कप ब्‍लैकबेरी से साढ़े 7 ग्राम फाइबर म‍िलेगा- Blackberry Fruit

  • एक कप ब्‍लैकबेरी में साढ़े 7 ग्राम फाइबर होता है।
  • ब्‍लैकबेरी खाने से इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है और पाचन सुधारने में मदद म‍िलती है।

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7. नाशपाती से 5 ग्राम फाइबर म‍िलेगा- Pear

  • एक मीड‍ियम साइज के नाशपाती को खाने से शरीर को पांंच से छह ग्राम फाइबर म‍िलता है।
  • नाशपाती को छ‍िलके समेत खाएंगे, तो फाइबर का ज्‍यादा फायदा म‍िलेगा।

8. आधा कप ओट्स से 5 ग्राम फाइबर म‍िलेगा- Oats

  • आधा कप ओट्स से पांच ग्राम फाइबर म‍िलता है।
  • ओट्स में बीटा ग्‍लूकन फाइबर होता है जो क‍ि हार्ट हेल्‍थ, डायब‍िटीज कंट्रोल और वेट कंट्रोल में फायदेमंद है।

9. एक कप पके क्विनोआ से 5 ग्राम फाइबर म‍िलता है- Quinoa

  • एक कप पके हुए क्विनोआ को खाने से शरीर को पांच ग्राम फाइबर म‍िलता है।
  • प्रोटीन और फाइबर र‍िच क्विनोआ खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वेट लॉस में मदद म‍िलती है।

10. आधा कप ब्‍लैक बींस से साढ़े 7 ग्राम फाइबर म‍िलेगा- Black Beans

  • आधा कप पके हुए ब्‍लैक बींस से साढ़े 7 ग्राम फाइबर म‍िलता है।
  • ब्‍लैक बींस में पोटशियम, फाइबर, विटामिन बी 6, फोलेट और फाइटोन्यूट्रिएंट जैसे पोषक तत्‍व होते हैं जो बैड कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल करके हार्ट हेल्‍थ को बेहतर बनाते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

फाइबर को डाइट में शाम‍िल करने के ल‍िए सब्‍ज‍ियों के अलावा कई हेल्‍दी व‍िकल्‍प हैं जैसे ब्‍लैक बींस, क्विनोआ, ओट्स, नाशपाती, ब्‍लैकबेरी, रसभरी, उबले चने, दाल, फ्लैक्‍स सीड्स, च‍िया सीड्स। इन्‍हें अपनी डाइट में शाम‍िल करें और फाइबर की कमी को दूर करें।

इस जानकारी को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के साथ शेयर करें ताक‍ि फाइबर स्राेतों के बारे में लोगों को जानकारी म‍िल सके।

Video Credit: Dr Saurabh Sethi

FAQ

  • फाइबर की कमी से कौन-कौन से रोग होते हैं?

    फाइबर की कमी से कब्‍ज, पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं। फाइबर की कमी से डायब‍िटीज, ह्रदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक फाइबर की कमी से आंतों की सेहत को भी नुकसान होता है।
  • फाइबर बढ़ाने के लिए क्या करें?

    फाइबर की मात्रा को बढ़ाने के ल‍िए साबुत अनाज, दालें, बीज और मेवे का सेवन करें। मल्‍टीग्रेन आटा चुनें और धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा को बढ़ाएं ताक‍ि इसे आसानी से पचाया जा सके।
  • कैसे पता चलेगा कि शरीर में फाइबर की कमी है?

    फाइबर की कमी होने पर पेट फूलना, भारीपन, बार-बार कब्‍ज, जल्‍दी भूख लगना जैसे लक्षण नजर आते हैं और पाचन कमजोर हो जाता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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