Fri Sep 11, 2026 | 09:17 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

इसबगोल vs चिया सीड्स: फाइबर के लिए क्या है बेहतर विकल्प? डॉक्‍टर से जानें

इसबगोल और चिया सीड्स में फाइबर के लिए कौन बेहतर है? जानें दोनों के फायदे साथ ही एक्सपर्ट सलाह कि आपकी सेहत के लिए सही विकल्प कौन-सा है?

स्‍वस्‍थ जीवनशैली में डाइटरी फाइबर वजन कंट्रोल, बेहतर पाचन और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है। इसबगोल (Psyllium Husk) और चिया सीड्स (Chia Seeds) दोनों ही सॉल्‍यूबल फाइबर से भरपूर सुपरफूड्स हैं, लेकिन सवाल यह है कि फाइबर के लिए कौन बेहतर है? इसबगोल या चिया सीड्स? इसका कोई एक जवाब नहीं हो सकता, क्योंकि यह व्यक्ति की जरूरत, डाइट पसंद और हेल्‍थ के लक्ष्‍य पर निर्भर करता है। आजकल लोग फाइबर के ल‍िए च‍िया सीड्स का सेवन करना पसंद करते हैं, जबक‍ि पुराने समय में इसबगोल का सेवन ज्‍यादा क‍िया जाता था। ऐसे में लोगों के मन में अक्‍सर यह सवाल उठता है क‍ि फाइबर के ल‍िए इसबगोल का सेवन बेहतर है या च‍िया सीड्स? इस सवाल का जवाब आगे इस लेख में जानेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Clinical Director At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

इसबगोल कब्‍ज और आईबीएस से राहत देता है 

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  • इसबगोल, जो प्लांटैगो ओवाटा (Plantago Ovata) पौधे से बनता है, इसमें लगभग 70 से 80% सॉल्‍यूबल फाइबर होता है।
  • इसमें म्यूसिलेज (Mucilage) नाम का तत्व होता है, जो पानी में मिलते ही फूल जाता है।
  • Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि सिर्फ 1 से 2 चम्मच (5-10 ग्राम) इसबगोल पानी के साथ लेने पर जेल जैसा बन जाता है, जिससे कब्ज दूर होती है, स्टूल सॉफ्ट होता है और बाउल मूवमेंट नियमित होती है।
  • यह आईबीएस, पुरानी कब्ज या सर्जरी के बाद पाचन सुधारने के लिए खासतौर पर फायदेमंद है।
  • यह आंतों को बिना जलन पहुंचाए लचीला बनाता है।
  • स्‍टडीज बताती हैं कि इसबगोल बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड शुगर स्थिर रखने में मदद करता है, इसलिए यह डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल वालों के लिए अच्छा है।
  • भारत में यह आसानी से मिल जाता है, इसका स्वाद भी न्यूट्रल होता है और यह किफायती भी है।

च‍िया सीड्स खाने से वजन और भूख कम होती है

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  • चिया सीड्स, जो साल्विया हिस्पैनिका (Salvia Hispanica) पौधे से आते हैं, 100 ग्राम में करीब 34 से 40 ग्राम फाइबर देते हैं।
  • इनमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर होते हैं।
  • साथ ही इनमें प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और ओमेगा-3 फैटी एसिड भी होते हैं।
  • Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि चिया सीड्स पेट को भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे भूख कम लगती है और वजन घटाने में मदद मिलती है। चिया सीड्स को दही, स्मूदी या सलाद में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
  • रिसर्च बताती है कि चिया हार्ट हेल्थ और शरीर की सूजन को कम करने में भी मददगार हैं।
  • हालांकि, इन्हें भिगोकर खाना जरूरी है, वरना गले में अटकने का खतरा हो सकता है।
  • ज्यादा मात्रा में च‍िया सीड्स लेने से ब्लोटिंग भी हो सकती है।

फाइबर के ल‍िए इसबगोल बेहतर है या च‍िया सीड्स?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि फाइबर के ल‍िए इसबगोल या च‍िया सीड्स में से क‍िसी एक को चुनना मुमक‍िन नहीं है। दोनों में ही फाइबर पाया जाता है। बेहतर सेहत के लिए रोज 25 से 30 ग्राम फाइबर अलग-अलग स्रोतों से लें और पर्याप्त पानी पिएं। अगर आपको कोई बीमारी है, एलर्जी है या आप दवाएं ले रहे हैं, तो शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इसबगोल पाचन की समस्याओं के लिए ज्यादा असरदार है, जबकि चिया सीड्स कुल मिलाकर ज्यादा पोषण देते हैं। समझदारी से फाइबर चुनें और लंबे समय तक स्वस्थ रहें।

निष्कर्ष:

फाइबर के ल‍िए इसबगोल या च‍िया सीड्स में से क‍िसी एक को चुनना मुमक‍िन नहीं है। दोनों ही फाइबर के स्रोत हैं। बेहतर सेहत के लिए रोज 25 से 30 ग्राम फाइबर, इसबगोल और च‍िया सीड्स के अलावा भी अन्‍य अलग-अलग स्रोतों से लें और पर्याप्त पानी पिएं।

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FAQ

  • च‍िया सीड्स के फायदे क्‍या हैं?

    च‍िया सीड्स में प्रोटीन, ओमेगा-3, फाइबर होता है। इसका सेवन करने से वजन कंट्रोल होता है, पाचन सुधरता है और हार्ट हेल्‍थ को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।
  • इसबगोल क्‍या है?

    इसबगोल प्राकृत‍िक फाइबर का स्रोत है। यह प्लांटैगो ओवाटा पौधे के बीजों की भूसी से बनता है। यह पानी में फूलकर जेल जैसा बन जाता है और पाचन को सपोर्ट करता है।
  • इसबगोल के फायदे क्‍या हैं?

    इसबगोल बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाता है, कब्‍ज से राहत देता है, पाचन सुधारता है और शुगर लेवल को कंट्रोल करता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 19, 2025 17:07 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Dec 19, 2025 17:07 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao

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