Fri Sep 11, 2026 | 09:08 PM IST

Medically Reviewed by Dt Meena Kumari , Dietician

Broccoli खाते समय कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलतियां? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया सही तरीका

Broccoli in Hindi: ब्रोकली में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जिसकी वजह से इसे सर्दियों का सुपरफूड भी कहा जाता है। लेकिन गलत तरीके से स्टोर करने और पकाने से ब्रोकली कीे सभी पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं। इस लेख में न्यूट्रिशनिस्ट ने विस्तार से इन गलतियों के बारे में बताया है।

Broccoli in Hindi: सर्दियों के मौसम में लोग ब्रोकली खाना काफी पसंद करते हैं क्योंकि इसमें विटामिन C, फाइबर, आयरन, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। इसलिए जिम जाने वाले लोगों से लेकर बच्चों की डाइट में ब्रोकली शामिल की जाती है, लेकिन ब्रोकली खाने से पहले और कुकिंग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना होता है। अगर इसे सही तरीके से काटा या पकाया न जाए, तो इसके सारे पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं। इसलिए हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी (Ms Meena Kumari, Chief Dietician, Sarvodaya Hospital, Faridabad) से बात की। उन्होंने ब्रोकली खाते समय होने वाली गलतियों के बारे में बात की, जिससे हर किसी को बचना चाहिए।

ब्रोकली खाने का सही तरीका

चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी कहती हैं कि सर्दियों के मौसम में हर घर में ब्रोकली जरूर आती है, लेकिन लापरवाही के कारण लोग इसके पोषक तत्वों को पूरी तरह से ले नहीं पाते। लोगों को इन गलतियों से खासतौर पर बचना चाहिए।

ब्रोकली को बहुत पहले न काटें

अक्सर लोग समय बचाने के लिए हफ्ते भर की सब्जियां पहले से ही काटकर फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन ब्रोकली को पहले से काटकर नहीं रखना चाहिए। ब्रोकली को पहले से काटकर रखने पर इसमें मौजूद विटामिन C हवा के कॉन्टेक्ट में आकर तेजी से खत्म होने लगता है, एंटीऑक्सीडेंट्स ऑक्सिडाइज होकर अपना असर खो देते हैं और कटी हुई ब्रोकली जल्दी मुरझा जाती है। इसलिए ब्रोकली को पकाने से ठीक पहले ही काटें। अगर बहुत जरूरी हो तो बस 6 से 8 घंटे से ज्यादा पहले न काटें और कटे हुए टुकड़ों को खुला न छोड़ें।

right way to eat brocolli in hindi doctor quote

यह भी पढ़ें- फैटी लिवर के मरीजों के लिए कितना फायदेमंद है ब्रोकली? जानें एक्सपर्ट से

लंबे समय तक स्टोर करके न रखें

कई लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने से सब्जियां हफ्तों ताजा रहती हैं लेकिन ब्रोकली के मामले में ऐसा नहीं है। अगर ब्रोकली को लंबे समय तक स्टोर करके रखा जाता है, तो इसका स्वाद फीका पड़ने लगता है, ब्रोकली खाते समय जो क्रंच महसूस होता है, वह खत्म हो जाता है, धीरे-धीरे फाइबर और विटामिन कम होने लगते हैं। ब्रोकली को तीन से चार दिन से ज्यादा स्टोर न करें और प्लास्टिक बंद करने की बजाय छिद्र वाले बैग या पेपर में लपेटकर रखें। ध्यान रखें कि पूरे सिर वाली ब्रोकली को ही फ्रिज में रखें और जितनी जरूरत हो, उतनी ही उसी दिन तोड़ें। ब्रोकली को धोकर बिल्कुल न स्टोर करें क्योंकि इससे वे जल्दी गीली, काली या चिपचिपी हो जाएगी।। वैसे तो ब्रोकली जितनी ताजी होगी, उतना ज्यादा फायदा देगी।

ब्रोकली पकाते समय बहुत ज्यादा तेल, मक्खन या मसाले न डालें

हमेशा ब्रोकली को अच्छे से धोएं। इसके फूलों जैसे हिस्सों (florets) में मिट्टी या छोटे कीड़े हो सकते हैं, इसलिए उन्हें साफ करना जरूरी है। कई लोग स्वाद बढ़ाने के लिए ब्रोकली में तेल, मसाले या मक्खन डाल देते हैं। इससे ब्रोकली का फायदा कम हो जाता है, मक्खन और तेल डालने से कैलोरी और फैट बढ़ जाता है। ब्रोकली बनाते समय हल्का ऑलिव ऑयल, मूंगफली का तेल या सरसों का तेल डालना फायदेमंद होता है, क्योंकि ये फैट‑सॉल्युबल विटामिन (A और K) को शरीर में ऑब्जर्ब करने में मदद करता है। कम नमक, हल्दी, काली मिर्च, नींबू या लहसुन जैसे हल्के मसाले ही काफी होते हैं।

ब्रोकली को ज्यादा न पकाएं

लोग अक्सर ब्रोकली को तब तक उबालते या पकाते रहते हैं, जब तक वह पूरी तरह गल न जाए। ज्यादा पकाने से इसमें मौजूद विटामिन C और B कॉम्प्लेक्स पानी में निकल जाते हैं और ब्रोकली का हरा रंग मटमैला हो जाता है। ब्रोकली को सिर्फ 5-7 मिनट से ज्यादा न उबालें और न ही बहुत देर तक भूनें। ब्रोकली के ज्यादा गलने पर इसमें मौजूद सल्फोराफेन जैसे तत्व काफी हद तक खत्म हो जाते हैं। वैसे तो बेस्ट तरीका है कि ब्रोकली को हल्का स्टीम कर ले और जल्दी से स्टिर‑फ्राइ करें या फिर सिर्फ एक-दो मिनट के लिए उबलते पानी में डालकर तुरंत ठंडे पानी में डाल दें। इससे इसका टेक्सचर और न्यूट्रिशन दोनों बने रहेगा।

यह भी पढ़ें- ब्रोकली खाने से स्किन को मिलते हैं कई फायदे, एक्सपर्ट से जानें इनके बारे में

ब्रोकली के डंठल बिल्कुल न फेकें

काफी लोग ब्रोकली का मोटा डंठल काटकर फेंक देते हैं, जबकि उसी हिस्से में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। इससे डाइजेशन में मदद मिलती है और फूड वेस्टेज भी कम होता है। डंठल का छिलका उतारकर पतले स्लाइस में काटकर सब्जी या सूप में डाल सकते हैं। इससे सूप या सब्जी में पोषक तत्व बढ़ जाते हैं।

ब्रोकली रोज कितनी खानी चाहिए?

चीफ डाइटिशियन कहती हैं, “ब्रोकली कई तरह से फायदेमंद होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे रोजाना बहुत ज्यादा खाना है। ज्यादा ब्रोकली खाने से पेट में गैस और ब्लोटिंग हो सकती है। थायरॉइड के मरीजों में परेशानी हो सकती है और लोगों को पेट में भारीपन की शिकायत हो सकती है। लोगों को हफ्ते में तीन से चार बार ब्रोकली खानी चाहिए और एक बार में एक कप पकी हुई ब्रोकली खाना काफी है।”

निष्कर्ष

सर्दियों में ब्रोकली खाना बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसे पकाने से पहले कुछ बातों का खास ध्यान रखें। अगर ब्रोकली को सही तरीके से काटा या पकाया न जाए, तो इसके सभी पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं। इसलिए ब्रोकली को लंबे समय तक स्टोर न करें और पकाते समय हल्की स्टीम या हल्का भूनें।

FAQ

  • ब्रोकली खाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

    ब्रोकली खाने का सबसे अच्छा तरीका है उसे स्टीम करके खाना, ताकि उसके पोषक तत्व बरकरार रहें। इसे हल्का भूनकर सलाद, पास्ता या सूप में डालकर भी खाया जा सकता है।
  • ब्रोकली से गैस बनती है क्या?

    ब्रोकोली में बहुत ज्यादा पोषण होता है, लेकिन यह गैस का कारण बन सकती है। इसलिए बहुत ज्यादा मात्रा में ब्रोकली न खाएं।
  • ब्रोकली किसे नहीं खाना चाहिए?

    थायराइड, किडनी स्टोन और डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को ब्रोकली नहीं खानी चाहिए या फिर डॉक्टर से सलाह लेकर ही खाएं।

Read Next

अंडा खाने के बाद भूलकर भी न खाएं ये चीजें, हो सकता है नुकसान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Dec 19, 2025 13:25 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Dec 19, 2025 13:25 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dt Meena Kumari

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content