Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chandni Tugnait , Transformation Coach and Psychotherapist

भावनाओं का खालीपन या थकान, क्यों हमेशा लो महसूस करते हैं आप? ऐसे पहचानें अंतर

अगर आप लंबे समय से लो या डल महसूस कर रहे हैं, तो ऐसा भावनाओं में खालीपन या थकान के कारण हो सकता है। आखिर इनमें अंतर क्या है? समझने के लिए लेख को पूरा पढ़ें।

कई बार ऐसा होता है कि दिन भर कुछ करने का मन नहीं करता है। ऐसा लगता है जैसे सारा दिन खाली बैठे रहें। इस तरह की स्थिति को हम अक्सर तनाव से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, यह भावनाओं का खालीपन या थकान भी हो सकता है। असल में, हमारे लिए इन दोनों के बीच अंतर करना बहुत मुश्किल हो जाता है, जबकि इस फर्क को समझना जरूरी है। इनके बीच अंतर को जानकर हम अपनी अच्छी देखभाल कर सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि लो फील करना भावनाओं का खालीपन है या थकान? इस बारे में जानने के लिए हमने गेटवे ऑफ हीलिंग में Psychotherapist, Life Alchemist, Founder & Director डॉ. चांदनी तुगनैत से बात की।

भावनाओं का खालीपन और थकान के बीच अंतर

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भावनात्मक थकान 

भावनात्मक थकान गहराई तक महसूस की जाने वाली फीलिंग है, जिसमें भारी थकान और भावनात्मक कमी महसूस होती है। इसमें कई तरह के लक्षण नजर आते हैं, जैसे-

  • चिड़चिड़ापन महसूस करनाः भावनात्मक थकान व्यक्ति को अंदर तक तनाव और थकान से भर देती है। जब व्यक्ति अपनी कंडीशन को संभाल या ठीक से समझ नहीं पाता है, तो ऐसे में वह चिड़चिड़ापन महसूस करता है। 
  • ऊर्जा की कमीः भावनात्मक थकान के कारण व्यक्ति खुद में ऊर्जा की कमी महसूस करता है। यहां तक कि व्यक्ति छोटी-छोटी बात पर रिएक्ट भी करने लगता है। उसे स्थिति समझ नहीं आती है, फिर भी छोटी सी बात का बतंगड़ बन जाता है।
  • शारीरिक समस्याः भावनात्मक थकान का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से भी है। जब कोई लंबे समय से इमोशनल थकान से गुजर रहा होता है, तो ऐसे में क्रॉनिक स्ट्रेस और बर्नआउट हो सकता है।

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भावनाओं का खालीपन

जैसा कि आपको शब्दों से ही पता चल रहा है कि भावनाओं का खालीपन यानी भावनाओं का पूरी तरह सपाट हो  जाना और खुद को दूसरों से पूरी तरह अलग कर देना है। इसके लक्षण भावनात्मक थकान से भिन्न हैं, जैसे-

  • मानसिक स्थितिः भावनाओं का खालीपन ऐसा लगता है जैसे कि भावनाएं पूरी तरह स्विच ऑफ हो चुकी हैं। इसमें बहुत अच्छी खबर मिले या बहुत दुखद खबर, व्यक्ति के मन में कोई हर्षोल्लास या उत्साह नहीं होता है। यहां तक कि कोई संवेदना भी नहीं होती है। वह पूरी तरह खालीपन महसूस करता है।
  • सबसे कट जानाः भावनात्मक रूप से खाली होना अक्सर डीप डिप्रेशन या अत्यधिक तनाव से जुड़ा होता है। ऐसे में व्यक्ति सब चीजों से अलग-थलग हो जाता है। असल में, यह उनके शरीर की प्रतिक्रिया होती है, जो कि ऑटोपायलट मोड में चला जाता है। इस तरह की सिचुएशन में व्यक्ति शारीरिक रूप से तो हर जगह मौजूद होता है, लेकिन मानसिक रूप से चीजों को प्रोसेस नहीं कर पाता है यानी अपनी ही जिंदगी से पूरी तरह कटा हुआ महसूस करता है।

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भावनात्मक खालीपन और भावनात्मक थकान में कनेक्शन

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वैसे तो दोनों स्थितियां एक-दूसरे से अलग हैं, फिर भी एक-दूसरे से मेल खाती हैं। भावनात्मक थकावट अक्सर भावनात्मक सुन्नता की शुरुआत का पहला कदम होती है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक भावनात्मक थकान से गुजरता है, तो धीरे-धीरे यह स्थिति उसे मानसिक रूप से शटडाउन कर देती है, जो कि भविष्य में भावनात्मक सुन्नता की ओर ले जाता है।

निष्कर्ष

भावनात्मक रूप से खाली महसूस करना या भावनात्मक रूप से थकान होना कई कारणों से हो सकता है। दोनों एक-दूसरे से अलग होते हुए भी एक जैसी हैं। इसलिए, अगर कोई तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा है, तो उन्हें तुरंत एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। इसके अलावा, डिप्रेशन और स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए दोस्तों तथा परिवार के सदस्यों की भी मदद लेनी चाहिए।

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FAQ

  • भावनात्मक खालीपन को दूर करने के लिए क्या करें? 

    अपनी स्थिति को स्वीकार करें और दोस्त, परिवार के सदस्य या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लें।
  • क्या रेस्ट करने से भावनात्मक थकान को ठीक किया जा सकता है?

    नहीं। आराम से शरीर की थकान दूर होती है, लेकिन भावनात्मक थकान को दूर करने के लिए तनाव को मैनेज करना होता है। कभी कभी इसके लिए एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ती है।

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Disclaimer

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    May 28, 2026 12:51 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 28, 2026 12:51 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Chandni Tugnait

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