Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

7-8 घंटे सोने के बाद भी नींद क्यों आती है? डॉक्‍टर जानें इसके कारण

क्‍या कभी सोचा है क‍ि 7-8 घंटे सोने के बाद भी कुछ लोगों को द‍िन में नींद, थकान और च‍िड़च‍िड़ापन क्‍यों महसूस होता है? इसके पीछे स्‍लीप ड‍िसऑर्डर या कोई अन्‍य मेड‍िकल कंडीशन हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें इसके कारण।

क्‍या आप भी 7 से 8 घंटे की नींद लेते हैं और इसके बाद भी थकान महसूस होती है? आप अकेले नहीं है, कई लोग इसी समस्‍या से जूझ रहे होते हैं। ऐसे व्‍यक्‍त‍ि की नींद भले ही पूरी हो जाए, लेक‍िन उसे पूरे द‍िन और सोने का मन करता है और थकान कम नहीं होती है। कई लोग खराब स्‍लीप क्वालिटी से परेशान होते हैं। इसके पीछे हेल्‍थ कंडीशन या लाइफस्‍टाइल से संबंध‍ित कारण हो सकता है। डॉक्‍टर से जानें 7-8 घंटे सोने के बाद नींद पूरी न होने के पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

National Health Service, UK के मुताब‍िक, अगर शरीर का वजन जरूरत से ज्‍यादा है, तो व्‍यक्‍त‍ि को अध‍िक थकान महसूस हो सकती है। इससे हार्ट पर अध‍िक दबाव पड़ सकता है ज‍िससे थकान महसूस हो सकती है। वज‍न कम करने से एनर्जेट‍िक महसूस हो सकता है। हेल्‍दी वेट मेनटेन करने के अलावा उसे मेनटेन करना, हेल्‍दी डाइट लेना, एक्‍सरसाइज करना और एक्‍ट‍िव रहना भी जरूरी है।

1. खराब स्‍लीप क्वालिटी

why-feel-sleepy-after-full-sleep

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि स‍िर्फ लंबे समय तक सोना काफी नहीं है। स्‍लीप क्वालिटी भी अच्‍छी होनी चाह‍िए। हल्‍की नींद आना, बार-बार नींद खुलना और डीप स्‍लीप के फेज तक न पहुंच पाना खराब स्‍लीप क्वालिटी के लक्षण हैं। इससे बचने के ल‍िए सोने और जागने का शेड्यूल फ‍िक्‍स करें। रात को देर तक स्‍क्रीन का इस्‍तेमाल न करें। साथ ही अपने आसपास सोने का आरामदायक माहौल रखें।

यह भी पढ़ें- नहाने के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद और थकान? डॉक्टर से जानें इसके पीछे की वजह

2. स्‍लीप ड‍िसऑर्डर

स्‍लीप ड‍िसऑर्डर जैसे स्लिप एपनिया एक गंभीर बीमारी है ज‍िसमें सोते समय मरीज की सांस बार-बार रुकती और चलती है। रेस्‍टलेस लेग स‍िंड्रोम के कारण भी व्‍यक्‍त‍ि डीप स्‍लीप की स्‍टेज तक नहीं पहुंच पाता है। इससे एनर्जी लेवल पर बुरा असर पड़ता है। अगर आप द‍िन में तेज-तेज खर्राटे लेते हैं, अचानक से उठ जाते हैं, हांफते हुए उठते हैं, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।

3. स्‍ट्रेस और एंग्‍जाइटी

जब हम तनाव या एंग्‍जाइटी का श‍िकार होते हैं, तो भी क्वालिटी स्‍लीप लेने में परेशानी होती है। ऐसी स्‍थ‍िति‍ में नींद पूरी करने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे नींद अधूरी है। इससे बचने के ल‍िए रि‍लैक्‍स तकनीक जैसे डीप ब्रीद‍िंग मेड‍िटेशन की मदद लें और एक्‍सपर्ट से संपर्क करें।

4. मेड‍िकल कंंडीशन

Internal Medicine Specialist Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि अगर नींद पूरी करने के बाद भी अक्‍सर नींद आती है, थकान महसूस होती है, तो इसके पीछे कुछ मेड‍िकल कंडीशन हो सकती हैं। एनीम‍िया या लो आयरन लेवल, थायराइड, डायब‍िटीज और व‍िटाम‍िन्‍स की कमी से भी बार-बार नींद और थकान महसूस हो सकती है। इससे बचने के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर जांच कराएं। डॉक्‍टर की सलाह पर कंप्‍लीट ब्‍लड काउंट टेस्‍ट, थायराइड प्रोफाइल और व‍िटाम‍िन डी टेस्‍ट भी करवा सकते हैं।

यह भी पढ़ें- क्या दिनभर नींद आना सामान्य है या किसी बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें कब कराएं जांच

5. लाइफस्‍टाइल से जुड़ी खराब आदतें

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि अगर लाइफस्‍टाइल अच्‍छी नहीं है, तो उसका असर नींद पर भी आ सकता है। कई लोग देर रात कैफीन का सेवन करते हैं, अल्‍कोहल का सेवन करते हैं या अन‍ियम‍ित समय पर भोजन करते हैं या शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि नहीं करते हैं। इन आदतों के कारण पर्याप्‍त नींद लेने के बाद भी व्‍यक्‍त‍ि को थकान महसूस हो सकती है और बार-बार सोने का मन करता है। बचाव के ल‍िए अल्‍कोहल और कैफीन कम करें, रोजाना कम से कम 30 म‍िनट एक्‍सरसाइज करें और पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर नींद पूरी करने के बाद भी पूरे द‍िन सुस्‍ती रहती है और बार-बार नींद आती है और लाइफस्‍टाइल में बदलाव करके अंतर नजर नहीं आ रहा है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • अगर हर सुबह उठकर थकान महसूस होती है, तो भी डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।
  • नींद पूरी होने के बाद भी थकान होना और नींद आना सामान्‍य नहीं है। अगर यह समस्‍या बार-बार हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

नि‍ष्‍कर्ष:

अगर आप 7 से 8 घंटे सोते हैं और इसके बाद भी द‍िनभर नींद आती है, थकान महसूस होती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे खराब स्‍लीप क्वालिटी, स्‍लीप ड‍िसऑर्डर, स्‍ट्रेस और एंग्‍जाइटी, एनीम‍िया, थायराइड, डायब‍िटीज, व‍िटाम‍िन्‍स की कमी वगैरह। लाइफस्‍टाइल से संबंध‍ित आदतें जैसे देर से सोना, रात को अल्‍कोहल या कैफीन का सेवन, अन‍ियम‍ित समय पर भोजन से भी नींद की क्वालिटी खराब हो सकती है। नींद पूरी करने के बाद भी पूरे द‍िन सुस्‍ती रहती है, सुबह थकान महसूस होती है, तेज खर्राटे लेते हैं, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या खाना खाने के बाद नींद आना नॉर्मल है?

    भोजन के बाद हल्की सुस्ती नॉर्मल हो सकती है, लेकिन हर दिन बहुत ज्यादा नींद आना किसी बीमारी या सेहत से जुड़ी क‍िसी खराब आदत का संकेत हो सकती है।
  • क्या पानी की कमी से नींद आ सकती है?

    शरीर में पानी की कमी से थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। इसे कई लोग नींद के रूप में महसूस कर सकते हैं।

Read Next

आंखों की रोशनी बचानी है तो आज ही छोड़ दें ये 7 आदतें, डॉक्टर से समझें नुकसान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 18, 2026 20:01 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content