आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होती है और इसका कारण अक्सर रोजमर्रा की आदतें होती है। हालांकि, हर व्यक्ति में नजर कमजोर होने की वजह अलग-अलग हो सकती है। इसमें उम्र, जेनेटकिल कारण या आंखों की कोई बीमारी होना भी इसका कारण हो सकता है। कई बार समस्या धीरे-धीरे शुरू होती है। रोज कई घंटे मोबाइल चलाना, आंखों को बार-बार रगड़ना, कम नींद लेना या धूप में बिना किसी सुरक्षा के निकलना जैसी आदतें लंबे समय में आंखों पर असर डाल सकती हैं। आंखों की कौन-सी परेशानियां हो सकती हैं? यह जानने के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Opthamologist, Founder & Director और Dr. Priyamvada Bhasin, Medical Director, Specialist Comprehensive Ophthalmology,Squint & Vitreo-Retinal Specialist, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की।
आंखों की सेहत खराब कर सकती हैं 7 आदतें
Dr. Priyamvada Bhasin कहती हैं कि आमतौर पर लोग इन आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि उन्हें महसूस ही नहीं होता कि ये धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को कम कर रही है।
1. घंटों मोबाइल या लैपटॉप देखते रहना
Dr. Priyamvada Bhasin कहती हैं, “आजकल ज्यादातर लोग सारा दिन मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर ही अपना समय बिताते हैं। बच्चे पढ़ाई और मनोरंजन के लिए मोबाइल और लैपटॉप पर लगे रहते हैं। जब बच्चे या वयस्क लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं, तो पलकें कम झपकाते हैं। इससे आंखों की सतह पर नमी कम होने लगती है और ड्राई आई, जलन, भारीपन और कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देना जैसी दिक्कत हो सकती है।”
2. बहुत कम रोशनी में पढ़ना
Dr. Priyamvada Bhasin ने कहा, “कई लोगों की बिस्तर पर लेटकर अंधेरे कमरे में मोबाइल चलाना या बहुत कम रोशनी में किताब पढ़ना रोज की आदत में शुमार होता है। इससे आंखों को फोकस करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है और आंखों में थकान या सिरदर्द महसूस हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कम रोशनी में पढ़ने से आंखें हमेशा के लिए खराब हो जाएंगी, लेकिन अगर ऐसा करने से आंखों में बार-बार स्ट्रेस होता है, तो पढ़ने और काम करने की जगह पर पर्याप्त रोशनी रखना बेहतर है।”
3. खुजली होने पर आंखों को रगड़ना
Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, जब भी आंखों में खुजली होती है, तो तुरंत लोग आंखें रगड़ना शुरू कर देते हैं। बार-बार आंखें रगड़ने से आंखों की सतह में जलन बढ़ सकती है। गंदे हाथों से आंखों को छूने पर संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। कुछ लोगों में लगातार आंखें रगड़ने की आदत कॉर्निया से जुड़ी समस्याओं से भी संबंधित हो सकती है। अगर आंखों में बार-बार खुजली होती है, तो सिर्फ आंखें रगड़ने के बजाय इसकी वजह पता करना जरूरी है। एलर्जी, ड्राई आई या दूसरी समस्या इसका कारण हो सकती है।
4. तेज धूप में बिना सनग्लासेज के निकलना
Dr. Priyamvada Bhasin ने बताया कि अक्सर लोग धूप में निकलते समय आंखों पर चश्मा नहीं लगाते और न ही उन्हें इसकी जानकारी होती है कि लंबे समय तक सूरज की UV रेडिएशन स्किन के साथ आंखों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। तेज धूप में आंखों में चुभन, पानी आना या असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए जो लोग लंबे समय तक धूप में रहते हैं, उन्हें UV रेडिएशन से बचाव वाले सनग्लासेज पहनने चाहिए।
5. कॉन्टैक्ट लेंस की सफाई में लापरवाही
Dr. Priyamvada Bhasin कहती हैं, “जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करते हैं, उन्हें साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। गंदे हाथों से लेंस लगाना, लेंस को जरूरत से ज्यादा समय तक पहने रखना या उन्हें सही तरीके से साफ और स्टोर न करना आंखों की इंफेक्शन बढ़ा सकता है। कई लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सो जाते हैं, जिससे संक्रमण का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आंखों में लालिमा, दर्द या असामान्य डिस्चार्ज हो, तो लेंस पहनने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।”

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6. नींद पूरी न लेना
Dr. Priyamvada Bhasin ने कहा कि जो लोग कम सोते हैं या नींद पूरी नहीं होती, उन्हें अगले दिन आंखों में भारीपन, लालिमा, सूखापन और थकान महसूस हो सकता है। अगर लगातार नींद पूरी नहीं हो रही है, तो आंखों को भी पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, तो आंखों को नुकसान हो सकता है। इसलिए लोगों को रोजाना नींद पूरी करनी चाहिए।
7. आंखों की जांच समय पर न कराना
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “आमतौर पर लोग आंखों में खुजली या लालिमा होने पर खुद ही आई ड्रॉप डाल देते हैं। इससे आंखों का संक्रमण बढ़ सकता है। बहुत से लोग मानते हैं कि जब तक नजर ठीक है, तब तक आंखों की जांच की जरूरत नहीं है, लेकिन आंखों की कुछ बीमारियां शुरुआत में बिना स्पष्ट लक्षण के हो सकती है। ग्लूकोमा में अक्सर ऐसा ही होता है, जिसके लक्षण शुरुआत में पता ही नहीं चलते। इसलिए अगर धुंधला दिखाई दे रहा है या आंखों में किसी भी तरह की दिक्कत हो, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”
स्टडी क्या कहती है?
American Academy of Ophthalmology भी यही कहता है कि जो लोग धूप में चश्मे नहीं पहनते, आंखों से जुड़ी समस्याओं को चेक करने से टालते हैं, कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हुए सावधानी नहीं बरतते, मेकअप या कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर सो जाते हैं और आंखों का चेकअप समय पर नहीं कराते, उनकी आंखों की रोशनी जाने का रिस्क हो सकता है। इसलिए लोगों को आंखों से जुड़ी गलत आदतों पर ध्यान देना चाहिए।
आंखों से जुड़े किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं कि अगर लोगों को आंखों की से जुड़ी ये समस्याएं महसूस होती हैं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
- अचानक नजर धुंधली होना
- अचानक कम दिखाई देना
- आंखों में तेज दर्द होना
- रोशनी के चारों ओर चमक दिखाई देना
- अचानक नए फ्लोटर्स दिखाई देना
- आंखों में चोट लगना
- आंखों में लालिमा दिखाई देना
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निष्कर्ष
Dr. Priyamvada Bhasin लोगों को सलाह देती हैं कि उन्हें रोज की आदतों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि आंखों से जुड़ी समस्याएं न हो। अगर किसी भी तरह का बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें।
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FAQ
धूम्रपान करने से आंखों की रोशनी कैसे जा सकती है?
स्मोकिंग से आंखों की नसों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिससे कम उम्र में मोतियाबिंद और ऑप्टिक नर्व डैमेज होने का खतरा दोगुना हो सकता है।मेकअप लगाकर सो जाने से आंखों को क्या खतरा है?
आंखों का मेकअप लगाकर सोने से पलकों के किनारे मौजूद मेबोमियन ग्रंथियां बंद हो जाती हैं। इससे आंखों में गुहेरी, इंफेक्शन और कॉर्निया में खराश हो सकती है।
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Aug 18, 2026 16:23 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin