Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ सकता है डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा? जानें किन महिलाओं को रहना चाहिए सतर्क

प्रेग्नेंसी में जिन महिलाओं को डायबिटीज की समस्या होने लगती है, उन्हें अपनी आंखों पर भी खास ध्यान देना चाहिए, क्योंकि प्रेग्नेंट महिलाओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का रिस्क बढ़ सकता है। प्रेग्नेंसी में आंखों की रोशनी में फर्क पड़ने पर भ्रूण को भी नुकसान होने का रिस्क बढ़ सकता है।

प्रेग्नेंसी में डायबिटीज होना या फिर जिन महिलाओं को पहले से डायबिटीज की समस्या होती है, उन्हें प्रेग्नेंसी में खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस दौरान महिलाओं के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं और इसका असर शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ सकता है। इसमें महिलाओं को अपनी आंखों की सेहत को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जो महिलाएं प्रेग्नेंसी में डायबिटीज होने के बावूजद ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं कर पाती, उन्हें डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का रिस्क बढ़ सकता है। प्रेग्नेंसी में आंखों पर असर क्यों होता है? यह जानने के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Founder & Director और Dr. Priyamvada Bhasin, Medical Director, Specialist Comprehensive Ophthalmology, Squint & Vitreo-Retinal Specialist, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की।

प्रेग्नेंसी में डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा क्यों होता है?

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “डायबिटिक रेटिनोपैथी आंख के पर्दे यानी रेटिना से जुड़ी गंभीर बीमारी है। अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ता रहता है, तो रेटिना से जुड़ी नसे कमजोर होने लगती हैं। ऐसी कंडीशन में अगर इलाज न मिले, तो धीरे-धीरे नजर कमजोर होने लगती है और गंभीर मामलों में आंखों की रोशनी तक जा सकती है। प्रेग्नेंसी में शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन तेजी से बदलते हैं। इसके साथ, खून की मात्रा बढ़ने लगती है, ब्लड फ्लो में बदलाव आता है, जिससे ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त प्रेशर बनने लगता है। अगर रेटिना की वेसल्स डायबिटीज के कारण पहले से कमजोर हो, तो प्रेग्नेंसी में सूजन और ब्लीडिंग की संभावना बढ़ सकती है।”

Indian Journal of Opthalmology के अनुसार, प्रेग्नेंसी में होने वाली डायबिटीज (जेस्टेशनल डायबिटीज) से डायबिटिक रेटिनोपेथी की शुरुआत हो सकती है। इससे मां और होने वाले बच्चे को भविष्य में डायबिटीज होने का खतरा बढ़ सकता है। अगर भारत की बात की जाए, तो भारत में विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि गांवों के मुकाबले शहरों में जेस्टेशनल डायबिटीज के मामले ज्यााद देखने को मिले हैं। गांव में 1.5% से 9.9% थे, तो शहरों में 7.8% से 17.8% या इससे ज्यादा पाए गए थे। इसका कारण रहन-सहन, देरी से प्रेग्नेंट होना, फिजिकल एक्टिविटी न करना और मोटापा हो सकता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा किन महिलाओं को ज्यादा होता है?

Dr. Priyamvada Bhasin कहती हैं, “यह जरूरी नहीं है कि हर प्रेग्नेंट महिला को डायबिटिक रेटिनोपैथी होगी। इसका रिस्क उन महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है, जिन्हें प्रेग्नेंसी से पहले टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज है। इसके अलावा, जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी से पहले डायबिटिक रेटिनोपैथी है, ब्लड शुगर को लंबे समय से कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा है, हाई बीपी की समस्या है या किडनी से जुड़ी समस्याएं है। अगर प्रेग्नेंसी से पहले ही रेटिना पर असर पड़ा है, तो प्रेग्नेंसी में इसकी गंभीरता बढ़ सकती है। ऐसी महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान आंखों का खास ध्यान रखना चाहिए।”

diabetic retinopathy in pregnancy

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प्रेग्नेंसी में तेजी से ब्लड शुगर कम करना सही?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “यह बात कई लोगों को हैरान कर सकती है कि अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर ज्यादा रहने पर उसे तेजी से कम कर लिया जाए, तो कुछ महिलाओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी अस्थायी रूप से बढ़ सकती है। इसका कतई यह मतलब नहीं है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं करना चाहिए, बल्कि इसे सुरक्षित और धीरे-धीरे नियंत्रित करना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें और उनकी बताई दवाओं और डाइट या लाइफस्टाइल में बदलाव करें। इससे डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का रिस्क कम किया जा सकता है।”

डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण

Dr. Priyamvada Bhasin ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण शुरुआत में पता नहीं चलते और इस वजह से रेटिना को काफी ज्यादा नुकसान हो सकता है। अगर किसी महिला को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

  1. धुंधला दिखाई देना
  2. आंखों के सामने काले धब्बे महसूस होना
  3. आंखों में एकदम चमक दिखाई देना
  4. बीच की नजर कमजोर होना
  5. रंगों को पहचानने में मुश्किल होना
  6. अचानक रोशनी कम महसूस होना

आंखों का चेकअप कब कराएं?

Dr. Purendra Bhasin के मुताबिक, “अगर महिला को पहले से डायबिटीज है और वह प्रेग्नेंसी प्लान कर रही है, तो प्रेग्नेंसी से पहले डायलेटेड रेटिना एग्जामिनेशन कराना चाहिए। इस प्रोसेस में आंखों की पुतली फैलाकर रेटिना को चेक किया जाता है। अगर महिला प्रेग्नेंट है, तो पहली तिमाही में जल्द से जल्द रेटिना की जांच करानी चाहिए। महिला की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए हर तिमाही में भी आंखों के चेकअप की सलाह दी जा सकती है। डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को रेगुलर फॉलो-अप जरूर करना चाहिए।”

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निष्कर्ष
Dr. Purendra Bhasin महिलाओं को सलाह देते हैं कि प्रेग्रेंसी से पहले आंखों का चेकअप जरूर कराएं और HbA1c और ब्लड शुगर को डॉक्टर की सलाह के अनुसार कंट्रोल में रखें। इसके अलवा, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, बैलेंस्ड डाइट और आंखों से जुड़े लक्षणों पर नजर रखें। किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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FAQ

  • क्या हाई ब्लड प्रेशर भी बढ़ा सकता है परेशानी डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या?

    प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेम्पसिया की समस्या हो सकती है। यह स्थिति आंखों की ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव डालती है। अगर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों साथ हों, तो रेटिना में सूजन, ब्लीडिंग और नजर कमजोर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में सिर्फ ब्लड शुगर ही नहीं, बल्कि ब्लड प्रेशर की नियमित जांच भी जरूरी है।
  • क्या Gestational Diabetes में भी डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा होता है?

    अगर प्रेग्नेंसी के दौरान पहली बार होने वाली डायबिटीज और पहले से मौजूद डायबिटीज एक जैसी स्थिति नहीं हैं।डायबिटिक रेटिनोपैथी तेजी से बढ़ने का खतरा उन महिलाओं में ज्यादा होता है, जिन्हें प्रेग्नेंसी से पहले ही डायबिटीज थी। हालांकि, अगर किसी महिला को पहले से रेटिना की समस्या है, तो डॉक्टर उसकी स्थिति के अनुसार अलग सलाह दे सकते हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 16, 2026 20:10 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin

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