Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

घर पर BP चेक करते समय इन 5 गलतियों से रीडिंग हो सकती है गड़बड़, डॉक्टर से जानें सही तरीका

अगर आप हाई बीपी के मरीज हैं या यह समस्‍या नहीं भी है, तो भी शरीर को हेल्‍दी रखने के ल‍िए समय-समय पर बीपी को चेक करना जरूरी है। इसे घर बैठे भी क‍िया जा सकता है। जानें बीपी चेक करने का आसान तरीका।

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आजकल हाई बीपी एक कॉमन समस्‍या बनता जा रहा है। हाई बीपी कोई सामान्‍य स्‍थ‍िति‍ नहीं है। इस पर नजर रखना जरूरी है क्‍योंक‍ि अगर यह कंट्रोल से बाहर हो जाए, तो क‍िडनी ड‍िजीज, आंखें और हार्ट ड‍िजीज का कारण बन सकता है। हाई बीपी के लक्षण कभी-कभी अचानक सामने आते हैं और तब तक स्‍थ‍िति‍ हाथों से जा चुकी होती है। इससे बचने के ल‍िए समय-समय पर ब्‍लड प्रेशर को चेक करना जरूरी है। बाजार में अलग-अलग प्रकार की बीपी मशीन उपलब्‍ध हैं ज‍िनकी कीमत एक से दो हजार रूपयों के बीच हो सकती है। इंस्‍टेंट ड‍िलीवरी एप की मदद से घर बैठे अब पांच म‍िनट में बीपी की मशीन ड‍िलीवर भी हो जाती है। बीपी मशीन को इस्‍तेमाल करने का तरीका भी बेहद आसान है। इससे आप घर बैठे बीपी को मॉन‍िटर कर सकते हैं। चल‍िए जानते हैं क‍ि घर बैठे बीपी को चेक करने का सही तरीका क्‍या है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

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स‍िस्‍टोल‍िक और डायस्‍टोल‍िक रीडिंग में अंतर

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि बीपी रीड‍िंग के दो ह‍िस्‍से होते हैं एक स‍िस्‍टोल‍िक (Systolic) और दूसरा डायस्‍टोल‍िक (Diastolic)। रीड‍िंग में जो बड़ा नंबर होता है वह स‍िस्‍टोल‍िक कहलाता है और यह दिल के ब्‍लड पंप करने के समय का दबाव बताता है और रीड‍िंग में द‍िखने वाला छोटा नंबर डायस्टोलिक कहलाता है और यह द‍िल के रेस्‍ट करने के समय का दबाव बताता है।

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सामान्य बीपी क‍ितना होता है?

American Heart Association के मुताब‍िक, सामान्य बीपी 120/80 mm Hg होता है। अगर बीपी रीडि‍ंग इससे ज्‍यादा है, तो पहली बार में घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे में एक म‍िनट रुककर दूसरी बार बीपी चेक करें और दोनों रीड‍िंग को नोट कर लें। अगर रीड‍िंग दूसरी बार भी ज्‍यादा आए, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

घर पर बीपी चेक करते समय क‍िन गलत‍ियों से बचना चाह‍िए?

  1. अक्‍सर लोग हड़बड़ी में या स्‍ट्रेस में हॉस्‍प‍िटल पहुंचते हैं और बीपी चेक कराते हैं, कई हॉस्‍प‍िटल में, तो पर्चा बनने के साथ ही बीपी चेक क‍िया जाता है। इस दौरान व्‍यक्‍त‍ि र‍िलैक्‍स नहीं होता और बीपी रीड‍िंग ज्‍यादा हो सकती है। ऐसे में बीपी चेक करते समय ध्‍यान रखें क‍ि आप रि‍लैक्‍स हों और तनाव में न हों।
  2. बार-बार बीपी के बारे में सोचते हैं या हाई बीपी की टेंशन है, तो भी रीड‍िंग गलत आ सकती है। इसल‍िए बार-बार बीपी चेक करने से बचें।
  3. एक्‍सरसाइज करने के बाद या वॉक करने के बाद बीपी चेक करेंगे, तो भी रीड‍िंग ज्‍यादा आ सकती है। बीपी मशीन का इस्‍तेमाल करने से पहले 15 से 20 म‍िनट रेस्‍ट करना जरूरी है। एक्‍सरसाइज के तुरंत बाद बीपी रीड‍िंग लेने से बचें।
  4. रीड‍िंग लेते समय हाथों की मूवमेंट से भी बचना चाह‍िए। इससे बीपी रीड‍िंग असामान्‍य आ सकती है।
  5. अगर कफ साइज ठीक नहीं है या कफ साइज आपके हाथ से छोटा है, तो आर्टरीज पर ज्‍यादा दबाव पड़ेगा ज‍िससे बीपी रीड‍िंग गलत आ सकती है इसल‍िए बीपी मशीन से रीड‍िंग लेते समय कफ साइज चेक करें।

बीपी मापते वक्‍त बैठने की पोजीशन कैसी होनी चाह‍िए?

  • बैक को सपोर्ट करने वाली चेयर पर बैठें।
  • सामने एक टेबल रख लें।
  • कोहनी के ऊपर बीपी मशीन का कफ बांधें।
  • कफ को बांधने से पहले स्‍लीव को ऊपर करें और सीधे त्‍वचा पर बैंड बांधें।
  • फ्लैट सर्फेस पर हाथ को रखें।
  • दोनों पैरों को जमीन पर फ्लैट रखें।

बीपी मापने का सही तरीका क्‍या है?

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  • शांति‍ से एक जगह पर बैठ जाएं।
  • अपने हाथों और शरीर को र‍िलैक्‍स रखें।
  • बीपी चेक करते समय बोले नहीं, केवल शांत‍ि से बैठे रहें।
  • सुबह और शाम दोनों समय बीपी चेक करें।
  • अगले हफ्ते उसी द‍िन दोबारा बीपी चेक करें।
  • सभी रीड‍िंग्‍स को एक जगह ल‍िख लें।

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि बेहतर नतीजों के लिए 3 बार रीडिंग लेना सबसे अच्छा है, जिसमें हर बार लगभग 2 मिनट का अंतर हो। अगर चार से पांच टेस्ट में असामान्य रीडिंग मिलती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

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बीपी मॉनि‍टर का इस्‍तेमाल कैसे करें?

  • आजकल डिजिटल मॉनिटर का प्रचलन ज्‍यादा है।
  • इसे इस्‍तेमाल करने के ल‍िए एक बांध में कोहनी के ऊपर कफ को बांध लें।
  • इसके बाद मॉन‍िटर को चालू करें।
  • जो भी हाथ खाली हो, उससे बटन दबाकर कफ में हवा भरने दें।
  • कफ की हवा धीरे-धीरे हाथों को टाइट करके खुद ही निकलने लगेगी।
  • लंबी बीप की आवाज सुनें। पहली बीप सिस्टोलिक प्रेशर बताएगी और दूसरी डायस्टोलिक प्रेशर।
  • जब मॉनिटर दोनों रीडिंग को नोट कर लेगा, तो उन्हें स्क्रीन पर दिखाएगा।
  • कफ की हवा पूरी तरह निकल जाने दें और बांह से कफ को हटा लें।

बीपी मापने से पहले क‍िन बातों का ध्‍यान रखें?

  • बीपी की दवा लेने से पहले बीपी चेक करें।
  • अगर जरूरत हो, तो बीपी चेक करने से पहले ही वॉशरूम होकर आएं और ब्‍लैडर को खाली रखें।
  • बीपी चेक करने से 30 म‍िनट पहले कुछ खाने, एक्‍सरसाइज करने, धूम्रपान या कैफीन के सेवन से बचें।

बीपी रीड‍िंग गलत क्‍यों आ रही है?

कई बार मरीज डॉक्‍टर के पास जाकर स्‍ट्रेस में आ जाते हैं ज‍िसके कारण उनकी बीपी रीड‍िंग गलत आती है। जब व्‍यक्‍त‍ि बाहर या घर पर बीपी र‍ीड‍िंग लेता है, तो वह सामान्‍य आती है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक, सही ब्लड प्रेशर रीडिंग लेना जरूरी है ताकि हार्ट ड‍िजीज और स्‍ट्रोक के खतरे का पता लगाया जा सके। अगर रीड‍िंग लेने से पहले कुछ खाया है, एक्‍सरसाइज की है, तो भी रीड‍िंग में हाई बीपी नजर आ सकता है। अगर बैठने का तरीका है, तो भी बीपी की रीड‍िंग गलत आ सकती है।

हाई बीपी से बचने के ल‍िए क्‍या करें?

Mayo Clinic में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, हाई बीपी से बचने के ल‍िए रोजाना कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद लें। साथ ही अल्‍कोहल और धूम्रपान का सेवन न करें खासकर अगर आप बीपी की दवाएं ले रहे हैं, तो यह बीपी पर बुरा असर डाल सकता है।

  • हाई बीपी से बचाव के ल‍िए डाइट में सोड‍ियम यानी नमक की मात्रा कम करें। द‍िनभर में 1500 एमजी या उससे कम मात्रा में नमक का सेवन करें।
  • कोश‍िश करें क‍ि हफ्ते में 150 म‍िनट सामान्‍य और 75 म‍िनट हाई इंटेंस‍िटी वर्कआउट करें।
  • डाइट में होल ग्रेन्‍स, फल, सब्‍ज‍ियां, लो फैट ड‍ेयरी प्रोडक्‍ट्स को शाम‍िल करें। सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की मात्रा कम करें। पोटैश‍ियम, कैल्‍श‍ियम, फाइबर और मैग्नीशियम र‍िच डाइट लें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर बीपी मॉन‍िटर में बार-बार रीड‍िंग 120/80 से ज्‍यादा आए।
  • सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो।
  • पीठ दर्द, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो।
  • धुंधला नजर आए या बोलने में परेशानी हो।

न‍िष्‍कर्ष:

हार्ट ड‍िजीज, स्‍ट्रोक के खतरे से बचने के ल‍िए घर बैठे बीपी मॉन‍िटर कर सकते हैं। आजकल लोग ड‍िजि‍टल बीपी मशीन से बीपी मॉन‍िटर करते हैं। एक शांत जगह पर बैठकर बीपी मशीन का कफ त्‍वचा पर बांधकर रीड‍िंग लेना चाह‍िए। ध्‍यान रहे क‍ि बीपी लेने से पहले बीपी की दवा न लें और चलने या कि‍सी भी तरह के काम को करने से बचें। इससे गलत रीड‍िंग आ सकती है। सामान्य बीपी 120/80 mm Hg होता है, अगर बीपी इससे ज्‍यादा है, तो डॉक्‍टर से सलाह लें। हालांक‍ि, पहली बार अगर हाई बीपी आया है, तो डरने की जरूरत नहीं है। एक म‍िनट बाद दोबारा रीड‍िंग लें और दोनों रीड‍िंग को नोट कर लें। सीने में दर्द, सांस की तकलीफ, बोलने में परेशानी या धुंधलापन होने पर डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करें।

image credit: magnific 

FAQ

  • लो बीपी क‍ितना होता है?

    अगर बीपी 90/60 mmHg से कम है, तो यह लो बीपी की स्‍थ‍ित‍ि मानी जाती है। ऐसे में कमजोरी, थकान, चक्‍कर, बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
  • बीपी चेक करने का सही समय क्‍या है?

    सुबह उठकर आराम से एक पोजीशन में बैठकर बीपी चेक करना सही माना जाता है। बीपी चेक करते समय र‍िलैक्‍स रहना जरूरी है वरना रीड‍िंग गलत आ सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Aug 18, 2026 13:46 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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