आपने कई बार देखा होगा कि अधिक उम्र की महिलाएं जरा सा काम करते ही थकान और कमजोरी महसूस करने लगती हैं। आमतौर पर हम इसे बढ़ती उम्र के साथ कनेक्ट करके देखते हैं। असल बात यह है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में थकान और कमजोरी बढ़ जाती है। यहां सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है और इनका आपस में क्या कनेक्शन है? इसका कारण हार्मोन में असंतुलन है। आइए, इसे विस्तार से जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्टडॉ. शोभा गुप्ता से।
मेनोपॉज के बाद थकान महसूस करने के कारण
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मेनोपॉज के बाद महिलाओं में थकान बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
1. नींद की कमी
मेनोपॉज के बाद अक्सर महिलाओं को रात के समय अच्छी नींद नहीं आती है और रात को बार-बार आंख खुलती रहती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेनोपॉज के बाद उनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है और अन्य हार्मोन के स्तर में भी बदलाव आने लगता है। ऐसे में अधूरी नींद और हार्मोनल बदलाव की वजह से उनमें सेलुलर एनर्जी का प्रोडक्शन कम हो जाता है, जिससे उनमें थकान बनी रहती है।
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2. स्लीप एप्निया होना
मेनोपॉज के बाद कई महिलाओं को स्लीप एप्निया की दिक्कत हो जाती है। इस समस्या में रात को सोते समय महिला को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। बार-बार सांस अटकने के कारण न चाहते हुए भी महिला की नींद खुलती रहती है। इस स्थिति में दिमाग कुछ सेकेंड्स के लिए ही सही, नींद में भी एक्टिव हो जाता है। ऐसा होने पर दिमाग पूरी तरह से रेस्ट नहीं कर पाता है, जिससे महिलाएं अगले दिन नींद लेने के बावजूद थकान महसूस करती हैं।
National Institutes of Health (NIH) में प्रकाशित वैज्ञानिक समीक्षा के अनुसार, मेनोपॉज में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरता है, तो इसकी वजह से महिलाओं में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (OSA) का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
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3. पोषक तत्वों की कमी
मेनोपॉज के बाद महिलाओं के खान-पान के तौर तरीकों में स्वतः बदलाव आने लगते हैं। उनकी डाइट कम हो जाती है। ऐसे में शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। विटामिन डी, विटामिन बी12, और आयरन ऐसे पोषक तत्व हैं, जिनकी कमी से शरीर में थकान और कमजोरी बढ़ जाती है। विशेषकर, आयरन की बात करें, तो इसकी कमी की वजह से हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होती है।
Revive Research Institute के अनुसार मेनोपॉज के बाद होने वाली थकान को दूर करने के लिए विटामिन, मिनरल्स बहुत जरूरी होते हैं।
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4. थायराइड संबंधी समस्या
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, महिलाओं में थायराइड होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। विशेषकर, हाइपोथायराइडिज्म। विशेषज्ञ बताते हैं कि मेनोपॉज के बाद हाइपोथायराइडिज्म, शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट भी धीमा हो जाता है। यह स्थिति भी महिला को थकान से भर देती है।
इस संबंध में साल 2024 में ब्राजीलियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रसिद्ध पीयर-रिव्यूड मेडिकल जर्नल Revista da Associação Médica Brasileira (RAMB) में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, मेनोपॉज के लक्षण जैसे मूड स्विंग्स, घबराहट, अनिद्रा, अत्यधिक पसीना आना और जोड़ों का दर्द, थायराइड के लक्षणों से काफी हद तक मेल खाते हैं। यही कारण है कि अक्सर डॉक्टर के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि लक्षण मेनोपॉज के कारण उभर रहे हैं या थायराइड के कारण।
5. मसल्स लॉस
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण मसल्स पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। मसल मास घटने लगता है, जिससे काम करते हुए मांसपेशियों की अधिक ताकत लगती है। निश्चित रूप से अधिक ताकत लगाने के लिए शरीर में ऊर्जा का स्तर भी संतुलित होना चाहिए, जबकि मेनोपॉज के बाद एनर्जी में भी कमी आती है।
डॉ. शोभा गुप्ता समझाती हैं, "मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का गिरता स्तर कोशिकाओं में ऊर्जा के उत्पादन को कम कर देता है और मांसपेशियों के रिपेयर होने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है।"
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राहत पाने के टिप्स
| वर्ग | उपाय | यह कैसे काम करता है? |
| मेडिकल ट्रीटमेंट | हार्मोन थेरेपी | एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को संतुलित कर हॉट फ्लैशेस की समस्या कम करती है, जिससे नींद में सुधार होता है। |
| गैर-हार्मोनल दवाएं | डॉक्टर की सलाह पर दवा ले सकते हैं, जिससे शरीर का टेम्प्रेचर नियंत्रित होता है और रात में बार-बार नींद टूटने की समस्या कम होती है। | |
| जीवनशैली में बदलाव | रोजाना एक्सरसाइज | हफ्ते में 150 मिनट वर्कआउट करें। इसमें वॉक और स्विमिंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इससे एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है। |
| सोने की आदत में सुधार | रोज एक ही समय पर सोने जाएं, कमरे को टेम्प्रेचर कम रखें और सोने से पहले फोन बंद कर दें। | |
| खान-पान में सुधार | एक साथ हैवी मील न लें, दिन भर में थोड़ा-थोड़ा और संतुलित भोजन करें। दोपहर और शाम के बाद चाय, कॉफी और शराब से दूर रहें। |
मेनोपॉज के बाद थकान को कैसे कम करें?
- हार्मोन थेरेपीः मेनोपॉज के बाद हार्मोन में बदलाव के कारण थकान और कमजोरी महिलाओं में बढ़ जाती है। इसे कम करने के लिए हार्मोन थेरेपी की मदद ली जा सकती है। इससे शरीर में कम हुए एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में सुधार आता है, जिससे रात को नींद खराब नहीं होती है और थकान में कमी आती है।
- गैर-हार्मोनल दवाएंः डॉक्टर की सलाह पर आप थकान को कम करने के लिए दवा ले सकते हैं। कई बार डिप्रेशन आदि के कारण रात को नींद नहीं आती है। डॉक्टर द्वारा दी गई दवा आपके अवसाद को कम करती है और गहरी नींद लेने में मदद करती है।
- टॉक थेरेपीः डॉक्टर इसकी खास सलाह देते हैं। अक्सर महिलाएं मेनोपॉज के बाद लोगों से बातचीत बंद कर देती हैं। आप ऐसा न करें। कोशिश करें कि टॉक थेरेपी लें।
- रोज एक्सरसाइज करेंः मेनोपॉज के बाद हर महिला के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना आवश्यक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर हफ्ते 150 मिनट हल्की-फुल्की एरोबिक वर्कआउट करें। इसमें पैदल चलना या स्विमिंग करना शामिल हैं।
- खान-पान में सुधार करेंः मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए संतुलित डाइट बहुत जरूरी होती है। उन्हें सुबह, दोपहर और शाम हर समय अच्छी डाइट लेनी चाहिए और चाय या कॉफी जैसी चीजों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
मेनोपॉज के बाद कई महिलाएं थकान और कमजोरी से भर जाती हैं। हार्मोन बदलाव, एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण ऐसा होता है। कई महिलाएं इसे इग्नोर कर देती हैं। आप ऐसा न करें। अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव करें और इसके कारणों को जानने की कोशिश करें। जरूरी हो, तो डॉक्टर से सलाह भी लें।
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FAQ
मेनोपॉज के बढ़ते थकान को दूर करने के लिए कौन से विटामिन फायदेमंद हैं?
विटामिन B-कॉम्प्लेक्स (B6, B12) और विटामिन D3 की मदद से थकान को दूर किया जा सकता है।क्या चाय या कॉफी मेनोपॉज की थकान कम करने में मदद करती है?
नहीं, मेनोपॉज के बाद चाय और कॉफी का सेवन काम कर देना चाहिए। अत्यधिक चाय या कॉफी से डिहाइड्रेशन बढ़ता है और नींद की समस्या भी ट्रिगर हो सकती है, जिससे थकान बढ़ती है।
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Jul 30, 2026 14:09 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta