Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Archana Singhal , Counsellor & Family Therapist

युवाओं में 'ब्रेन फॉग' के मामले अचानक क्यों बढ़ रहे हैं? एक्सपर्ट से जानें

आजकल युवाओं में ब्रेन फॉग की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वे अपना अधिकतर समय स्क्रीन पर बिताते हैं। हालांकि, इसके कई अन्य कारण भी हैं। आइए, जानते हैं इनके बारे में।

यह सुनने में बहुत हैरानी होती है कि युवाओं में ब्रेन फॉग की समस्या हो रही है, लेकिन सच बात यह है कि हाल के सालों में युवाओं में यह समस्या काफी ज्यादा बढ़ी है। इसलिए, यह सवाल जरूर उठता है कि युवाओं में यह समस्या क्यों बढ़ रही है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? यह भी जानना जरूरी है कि युवाओं में बढ़ता ब्रेन फॉग वाकई चिंता का विषय है? आइए, माइंडवेल काउंसिल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से जानते हैं इस बारे में सभी जरूरी बातें।

ब्रेन फॉग क्या है?

ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति को मानसिक स्पष्टता (Mental Clarity) में कमी महसूस होती है। इसके सामान्य लक्षण हैं-

  1. कंसंट्रेट करने में दिक्कत 
  2. चीजें याद रखने में परेशानी
  3. निर्णय लेने में परेशानी
  4. हर समय मानसिक थकान महसूस होना
  5. सोचने की क्षमता प्रभावित होना

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युवाओं में क्यों बढ़ रहा है ब्रेन फॉग?

ब्रेन फॉग का मतलब होता है कि मानसिक थकान, कमजोर कंसंट्रेशन और याददाश्त का कमजोर होना। आमतौर पर ऐसा तनाव, नींद की कमी, स्क्रीन पर अधिक समय बिताना और खानपान की बुरी आदतों के कारण होता है। यहां तक कि कई बार डिप्रेशन और एंग्जायटी भी युवाओं में ब्रेन फॉग का कारण बनती है। सवाल है, यह स्थिति युवाओं में बढ़ क्यों रही है? इस बारे में एक्सपर्ट बताते हैं-

डिजिटल ओवरलोडः हाल के सालों में युवा डिजिटल ओवरलोड से घिरे हुए हैं। इसका मतलब है कि वे हर समय सोशल मीडिया पर होते हैं, अलग-अलग नोटिफिकेशन से घिरे होते हैं और एंटरटेनमेंट के लिए भी स्क्रीन पर समय बिताते हैं। इस तरह देखा जाए, तो वे अक्सर डिजिटली ओवरलोडेड रहते हैं। लगातार मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और नोटिफिकेशन के बीच रहने से मस्तिष्क को आराम का समय नहीं मिल पाता। हमारा दिमाग लगातार जानकारी प्रोसेस करता रहता है, जिससे मानसिक थकान बढ़ सकती है। अगर ब्रेन को डिजिटल वर्ल्ड से राहत न मिले, तो ब्रेन फॉग होने का जोखिम बना रहता है।

नींद की कमीः चूंकि, युवा अपना अधिकतर समय मोबाइल पर बिताते हैं। स्क्रीन की ब्लू लाइट का हमारी नींद पर बुरा असर पड़ता है। दरअसल, स्क्रीन की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को रोकती है, जिससे नींद खराब होती है। पर्याप्त और गहरी नींद न मिलने पर मस्तिष्क याददाश्त, सीखने और एकाग्रता से जुड़ी प्रक्रियाओं को सही तरह से प्रोसेस नहीं कर पाता है। इससे ब्रेन फॉग होने की समस्या बढ़ जाती है। 

पोषक तत्वों की कमीः कहने की जरूरत नहीं है कि अब युवा घर का बना पौष्टिक खाना कम खाते हैं और बाहर का प्रोसेस्ड और जंक फूड अधिक खाते हैं। इस तरह की चीजों में पोषक तत्वों की काफी कमी होती है। जब लंबे समय तक शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है, तो इसकी वजह से शरीर में थकान और कमजोरी छाने लगती है। विटामिन और मिनरल्स की कमी की वजह से ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं।

बढ़ता तनावः मौजूदा समय में युवाओं में तनाव का स्तर भी काफी ज्यादा बढ़ा है। ऐसा इसलिए क्योंकि चैतरफा कंपीटीशन बढ़ा है, आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और युवाओं में करियर को बेहतर बनाने की भी अलग होड़ है। इसके साथ-साथ नए रिश्ते निभाना भी उनके लिए किसी चुनौती की तरह बन गया है। यही कारण है कि उनमें तनाव का स्तर बढ़ता जा रहा है, तो कि उनमें ब्रेन फॉग का एक बड़ा कारण बनकर उभर रहा है।

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युवा ब्रेन फॉग से कैसे निपटें?

ब्रेन फॉग से निपटने के लिए युवाओं को कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे-

  1. स्क्रीन टाइम को लिमिट करें। रोजाना 2 घंटे से अधिक समय न बिताएं। इसका मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है।
  2. एक बार में मल्टी टास्किंग करने से बचें। इससे ब्रेन ओवरलोड हो जाता है, जिससे ब्रेन फॉग की समस्या हो सकती है।
  3. हमेशा हेल्दी डाइट लें और शरीर में विटामिन B12, D या आयरन की कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच करवाएं।
  4. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है। 
  5. खुद को दिन भर हाइड्रेटेड रखें। शरीर में पानी की कमी होने पर याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है और मेंटल शार्पनेस में भी कमी आती है।

ब्रेन फॉग के लिए कब जाएं डॉक्टर के पास?

अगर युवाओं में ब्रेन फॉग की समस्या 2 से 3 सप्ताह तक लगातार बनी रहे, हर समय थकान और मानसिक उलझन महसूस हो, तो जरा भी देरी न करें। यह संकेत है कि आपको जल्द से जल्दी डॉक्टर के पास जाना है। इसके अलावा, आप यह भी नोटिस करें कि कहीं ब्रेन फॉग की कंडीशन दिन-प्रतिदिन बिगड़ तो नहीं रही है? इसका पता लगाने के लिए आपको देखना है कि क्या आपकी परफॉर्मेंस का स्तर घट रहा है, क्या रिश्तों में पहले की तुलना में अब ज्यादा परेशानियां आ गई हैं और क्या आपको दूसरों के साथ बातचीत करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है? इनमें से कोई भी समस्या होने पर आपको डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।

निष्कर्ष

युवाओं में तेजी से ब्रेन फॉग की समस्या बढ़ रही है। इस तरह की स्थिति की अनदेखी करना सही नहीं है। ब्रेन फॉग होने पर युवाओं को तुरंत खुद को डिजिटली डिटॉक्स करना चाहिए और इसके साथ-साथ पूरी नींद लेने पर जोर देना चाहिए। अगर उन्हें किसी तरह का तनाव है, तो इस संबंध में भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जल्द से जल्दी प्रोफेशनल से संपर्क करना चाहिए।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या लगातार मल्टीटास्किंग करने से ब्रेन फॉग हो सकता है?

    हां, एक साथ कई काम करने से मानसिक थकान हो सकती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।
  • क्या केवल स्क्रीन टाइम कम करने से ब्रेन फॉग ठीक हो जाएगा?

    जरूरी नहीं है, ब्रेन फॉग क्यों हो रहा है, इसका कारण जानना जरूरी है। अगर ब्रेन फॉग के पीछे नींद की कमी, तनाव, पोषण की कमी या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कारण हैं, तो उनका ट्रीटमेंट किया जाना जरूरी है।

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Disclaimer

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 02, 2026 10:14 IST

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