क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी से बातचीत कर रहे हों और अचानक एक बेहद आसान शब्द याद ही न आए? वह शब्द आपकी जुबान पर तो होता है, लेकिन लाख कोशिश करने के बाद भी कुछ सेकंड या मिनट तक याद नहीं आता। बाद में अचानक वही शब्द अपने आप याद आ जाता है। कैलाश अस्पताल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, जब कोई शब्द दिमाग में मौजूद होता है लेकिन उसे बोलने के लिए तुरंत याद नहीं किया जा सकता, तो इसे "टिप ऑफ द टंग" कहा जाता है। यह एक बेहद सामान्य स्थिति है और लगभग हर व्यक्ति ने अपने जीवन में इसका अनुभव किया होता है। इस दौरान व्यक्ति को महसूस होता है कि शब्द उसे पता है, लेकिन वह उसे व्यक्त नहीं कर पा रहा। कुछ सेकंड या मिनट बाद वही शब्द अचानक याद भी आ जाता है।
बोलते समय शब्द क्यों भूल जाते हैं?
डॉ. गोपाल जी शर्मा बताते हैं, ''कई बार दिमाग में जानकारी मौजूद होने के बावजूद उसे बाहर लाने की प्रोसेस थोड़ी धीमी हो जाती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। ज्यादा तनाव, चिंता, मानसिक दबाव, पर्याप्त नींद न लेना या लगातार कई काम एक साथ करना दिमाग की शब्दों को याद करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। जब मस्तिष्क पर ज्यादा दबाव होता है, तो जानकारी को खोजने और सही समय पर उपयोग करने में थोड़ी देर लग सकती है। यही वजह है कि बिजी या तनावपूर्ण दिनों में लोग ज्यादा बार शब्द भूलते हुए नजर आते हैं।''
- डॉ. गोपाल जी शर्मा बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ दिमाग के फंक्शन में कुछ नेचुरल बदलाव आते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि याददाश्त कमजोर हो रही है, बल्कि दिमाग को कुछ शब्दों तक पहुंचने में पहले की तुलना में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।
- इसी कारण उम्रदराज लोगों में "टिप ऑफ द टंग" की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। अगर यह कभी-कभार हो रहा है और व्यक्ति सामान्य रूप से बातचीत कर पा रहा है, तो आमतौर पर चिंता की जरूरत नहीं होती।
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National Institute on Aging में प्रकाशित आर्टिकल से यह साफ है कि भूलने की बीमारी का कारण हमेशा बुढ़ापा या डिमेंशिया ही नहीं होता। तनाव, खराब लाइफस्टाइल, नींद की कमी, पोषण की कमी और डिप्रेशन जैसी मानसिक या मेडिकल परेशानियां भी हमारी याददाश्त पर गहरा असर डालती हैं। अच्छी बात यह है कि सही इलाज, बैलेंस खान-पान और तनावमुक्त जीवन जीने से इन समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। इसलिए, यदि आप या आपका कोई करीबी लगातार याददाश्त में कमजोरी महसूस कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है ताकि समय पर सही कदम उठाया जा सके।
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क्या यह गंभीर समस्या का संकेत है?
कभी-कभी शब्द भूलना सामान्य है, लेकिन यदि यह समस्या बार-बार होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लगातार सही शब्द खोजने में कठिनाई हो रही है, बातचीत प्रभावित होने लगी है या दूसरों की बात समझने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा पढ़ने, लिखने या भाषा को समझने में अचानक कठिनाई महसूस होना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में समस्या सिर्फ सामान्य भूलने की नहीं, बल्कि किसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति से जुड़ी हो सकती है।
अफेजिया क्या है और इसका शब्द भूलने से कनेक्शन
डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, कुछ मामलों में शब्द याद न आना अफेजिया (Aphasia) नामक स्थिति का संकेत हो सकता है। यह तब होता है जब दिमाग के वे हिस्से प्रभावित हो जाते हैं जो भाषा को कंट्रोल करते हैं। स्ट्रोक इसके सबसे सामान्य कारणों में से एक है।
- अफेजिया का एक प्रकार एनॉमिक अफेजिया (Anomic Aphasia) भी होता है।
- इसमें व्यक्ति को पूरी तरह पता होता है कि वह क्या कहना चाहता है, लेकिन सही शब्द याद नहीं आता।
- यह समस्या सामान्य भूलने की तुलना में ज्यादा गंभीर मानी जाती है और हेल्थ चेकअप की जरूरत होती है।
अफेजिया का पता कैसे लगाया जाता है?
National Institute on Deafness and Other Communication Disorders की रिपोर्ट के अनुसार, अफेजिया की पहचान केवल लक्षण देखकर नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए डॉक्टर और स्पीच-लैंग्वेज एक्सपर्ट द्वारा जांच की जाती है। सबसे पहले डॉक्टर मरीज की बोलने, समझने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का आंकलन करते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्रेन स्कैन जैसे CT या MRI के जरिए यह देखा जाता है कि मस्तिष्क का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है। यदि डॉक्टर को अफेजिया का संदेह होता है, तो मरीज को स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट के पास भेजा जाता है, जो भाषा और संवाद से जुड़ी क्षमताओं की विस्तार से जांच करते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को अचानक बोलने में परेशानी, सही शब्द याद न आना, दूसरों की बात समझने में कठिनाई या स्ट्रोक जैसे अन्य लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है और मरीज की संवाद करने की क्षमता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. गोपाल जी शर्मा का कहना है कि यदि शब्द भूलने के साथ अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, चेहरे का टेढ़ा होना, बैलेंस बिगड़ना या समझने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। ये स्ट्रोक जैसी गंभीर डिजीज के संकेत हो सकते हैं और समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।
निष्कर्ष
बातचीत के दौरान कभी-कभार कोई आसान शब्द भूल जाना आमतौर पर "टिप ऑफ द टंग" फिनोमेनन का हिस्सा होता है और यह तनाव, थकान, नींद की कमी या बढ़ती उम्र के कारण हो सकता है लेकिन यदि यह समस्या बार-बार होने लगे, भाषा समझने या बोलने में कठिनाई आने लगे या इसके साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते जांच कराने से किसी गंभीर समस्या का पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
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FAQ
ज्यादा टेंशन लेने से दिमाग में क्या होता है?
लगातार तनाव और चिंता दिमाग की जानकारी को तुरंत याद करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, साथ ही कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।दिमाग की नसों को ताकत देने के लिए क्या खाना चाहिए?
दिमाग की नसों को ताकत देने के लिए हमेशा बैलेंस डाइट लें, तनाव कर करें और हेल्दी लाइफस्टाइल को मेंटेन करें।भूलने की बीमारी होने पर क्या करें?
भूलने की बीमारी होने पर डॉक्टर से सलाह लें और उचित इलाज को फॉलो करें।
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Jul 26, 2026 14:00 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Gopal Jee Sharma