डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों के मन में अक्सर अपने खान-पान को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। डायबिटीज में लोग अक्सर अपने खाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स चेक करते हैं और अगर यह ज्यादा होता है तो खाने से परहेज करते हैं। हालांकि, किसी भी खाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होने का मतलब यह नहीं होता है कि वह आपके लिए हानिकारक होगा ही। खाने के द्वारा मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर को एनर्जी देने का काम करते हैं, लेकिन सभी कार्ब्स एक जैसे नहीं होते हैं। यह समझने के लिए कि कोई भी फूड आपके ब्लड शुगर को कैसे प्रभावित करता है, ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड को समझना बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से समझते हैं कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड में क्या अंतर होता है?
ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड में अंतर
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड के बीच के अंतर को आसानी से समझा जा सकता है-
| विशेषता | ग्लाइसेमिक इंडेक्स | ग्लाइसेमिक लोड |
| माप | सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की स्पीड | शुगर बढ़ने की रफ्तार के साथ खाने की मात्रा |
| पैमाना | 0 से 100 | आमतौर पर 0 से 20+ |
| लो लेवल | 55 या उससे कम | 10 या उससे कम |
| मीडियम लेवल | 56 से 69 | 11 से 19 |
| हाई लेवल | 70 या उससे ज्यादा | 20 या उससे ज्यादा |
इस्तेमाल |
भोजन की गुणवत्ता जांचना | डायबिटीज और वजन पर काबू |
ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) क्या है?
Dr. Akshay Chugh ने बताया कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स 0 से 100 के पैमाने पर सिर्फ यह बताता है कि कोई भी खाना खाने के बाद कितनी जल्दी खून में शुगर की मात्रा बढ़ाएगा। ग्लाइसेमिक इंडेक्स से हमें यह पता चलता है कि खाना कितनी तेजी से शरीर में पचेगा, लेकिन ये यह नहीं बताता है कि हम उस खाने को कितनी मात्रा में खा रहे हैं।
साल 2009 में Journal of the American College of Nutrition में प्रकाशित रिव्यू के मुताबिक, ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह मापता है कि खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट खाने के बाद हमारे खून में शुगर के लेवल को कैसे प्रभावित करता है। यह पैमाना उन पुरानी बीमारियों से निपटने में मदद कर सकता है, जो ज्यादा खाने, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापे और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी होती हैं।
इस रिव्यू में यह भी बताया गया है कि डायबिटीज जैसी बीमारियों में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स का इस्तेमाल एक उपाय के रूप में किया जाता है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले डाइट सीरम लिपिड प्रोफाइल को सुधारने, सूजन को कम करने और वजन कंट्रोल रखने में भी मदद मिलती हैं।
इसे भी पढ़ें: लो-ग्लाइसेमिक डाइट हो रही है पॉपुलर, डायटिशियन से जानें क्या यह सभी के लिए सुरक्षित है?
हाई और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स का लेवल
- हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स, स्केल पर 70 से ज्यादा होता है। यह अक्सर सफेद ब्रेड या आलू जैसे फूड्स खाने से खून में शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं।
- लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स, स्केल पर 55 से कम होता है। सेब, दालें और ओट्स खाने से यह शुगर को ब्लड में बहुत धीरे-धीरे बढ़ाते हैं।
ग्लाइसेमिक लोड क्या है?
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, ग्लाइसेमिक लोड एक ज्यादा काम का और प्रैक्टिकल तरीका होता है, क्योंकि यह दो चीजों को जोड़कर बनता है। खाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स और आप उसकी कितनी मात्रा खा रहे हैं।
ScienceDirect के Medicine and Dentistry के अनुसार, "ग्लाइसेमिक लोड, शरीर में कार्बोहाइड्रेट खाने के असर को मापने का एक बेहतर तरीका होता है। यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स को ध्यान में तो रखता है, लेकिन सिर्फ इंडेक्स के मुकाबले ज्यादा जानकारी देता है। ग्लाइसेमिक लोड यह बताता है कि कोई खास कार्बोहाइड्रेट वाला फूड कितनी तेजी से ब्लड शुगर लेवल बढ़ाता है और इसमें खाए जा रहे खास कार्बोहाइड्रेट की असल मात्रा को भी ध्यान में रखा जाता है।"
ग्लाइसेमिक लोड के लेवल को कैसे समझ सकते हैं?
Dr. Akshay Chugh के अनुसार ग्लाइसेमिक लोड सिर्फ खाने की क्वालिटी नहीं, बल्कि उसकी मात्रा को भी ध्यान में रखता है, जिससे यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स की तुलना में ज्यादा सही होता है।
- लो ग्लाइसेमिक लोड 10 या उससे कम होता है। यह ब्लड शुगर पर बहुत कम प्रभाव डालता है। वजन कम करने और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक बेहतरीन तरीका होता है। इसके लिए वे अपनी डाइट में सेब, गाजर, दालें और हरी सब्जियां शामिल कर सकते हैं।
- मीडियम ग्लाइसेमिक लोड 11 से 19 के बीच का होता है। यह ब्लड शुगर लेवल को थोड़ा सा प्रभावित करता है। इन्हें सीमित और संतुलित मात्रा में खाया जा सकता है, जो ब्राउन राइस, केला और होल व्हीट के कारण बढ़ता है।
- हाई ग्लाइसेमिक लोड का लेवल 20 या उससे ज्यादा होता है। यह ब्लड शुगर को बहुत तेजी से और हाई लेवल तक बढ़ाता है। इनका सेवन कम से कम करना चाहिए, खासकर डायबिटीज के मरीजों में। हाई ग्लाइसेमिक लोड का लेवल सफेद चावल, मैदे से बनी चीजें और उबले हुए आलू खाने से बढ़ता है।
इसे भी पढ़ें: क्या रोज सुबह दलिया खाने से कंट्रोल रहता है ब्लड शुगर? डायबिटीज मरीजों के लिए जरूरी जानकारी
तरबूज की मदद से समझें ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लोड में अंतर
Dr. Akshay Chugh ने बताया कि तरबूज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 72 यानी बहुत ज्यादा होता है, जिसे देखकर लोग सोचते हैं कि यह शरीर में शुगर लेवल बढ़ाएगा। हालांकि, तरबूज में 92 प्रतिशत पानी होता है। अगर आप इसकी एक नॉर्मल स्लाइस खाते हैं तो उसमें सिर्फ 6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। इसका ग्लाइसेमिक लोड निकालकर देखें तो यह सिर्फ 4.32 आता है, जो बिल्कुल सेफ होता है। इसलिए, अगर आपको डायबिटीज है तब भी आप तय मात्रा में तरबूज खा सकते हैं, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक लोड बहुत कम होता है।
फूड्स के हिसाब से ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लोड में अंतर कैसे समझें?
Dr. Akshay Chugh का कहना है कि किसी भी फल या भोजन को करने से व्यक्ति को डरना या घबराना नहीं चाहिए। किसी भी व्यक्ति के लिए क्या खा रहे हैं से ज्यादा जरूरी होता है कितना खा रहे हैं। इसलिए, ग्लाइसेमिक लोड पर ध्यान देना जरूरी है। इस बात को आप इन फलों के ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड की मदद से समझ सकते हैं।
| फूड | मात्रा | ग्लाइसेमिक इंडेक्स | ग्लाइसेमिक लोड | डॉक्टर की सलाह |
| सफेद चावल | 1 कप | 73 (हाई) | 29 (हाई) | शुगर तेजी से बढ़ता है, इसलिए मात्रा आधी रखें |
| तरबूज | 120 ग्राम | 72 (हाई) | 4 (लो) | पूरी तरह सुरक्षित है, 1 कटोरी खा सकते हैं |
| उबली गाजर | 100 ग्राम | 71 (हाई) | 5 (लो) | सेहत के लिए हेल्दी |
सेब - |
1 मध्यम | 36 (लो) | 6 (लो) | डायबिटीज मरीजों के लिए बेस्ट है |
निष्कर्ष
Dr. Akshay Chugh का कहना है कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह बताता है कि कार्बोहाइड्रेट कितनी तेजी से पचता है, जबकि ग्लाइसेमिक लोड उसकी मात्रा और प्रभाव दोनों के बारे में जानकारी देता है। एक हेल्दी लाइफस्टाइल और डायबिटीज को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए सिर्फ ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर नहीं बल्कि ग्लाइसेमिक लोड पर भी ध्यान देना चाहिए।
Image Credit: Freepik
FAQ
डायबिटीज के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स कितना अच्छा है?
डायबिटीज के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक जरूरी पैमाना माना जाता है। यह लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स, मीडियम जीआई और हाई जीआई में बंटा होता है। यह आपको यह चुनने में मदद करता है कि कौन-सा खाना ब्लड शुगर को धीरे या तेजी से बढ़ाएगा।ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्यों जरूरी है?
ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह मापने का एक बेहतर तरीका है कि कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाने के बाद आपका ब्लड शुगर कितनी तेजी से बढ़ता है। यह डायबिटीज कंट्रोल करने, वजन कम करने और एनर्जी बनाए रखने के लिए जरूरी है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 25, 2026 15:39 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh