Fri Sep 11, 2026 | 09:17 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

क्या रोज सुबह दलिया खाने से कंट्रोल रहता है ब्लड शुगर? डायबिटीज मरीजों के लिए जरूरी जानकारी

आज के समय में गलत खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और तनाव के कारण डायबिटीज यानी शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यहां जानिए, रोज सुबह दलिया खाने से शुगर लेवल पर क्या असर पड़ता है?

आज के समय में डायबिटीज युवाओं और यहां तक कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही है। बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी ने शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना एक बड़ी चुनौती बना दिया है। ऐसे में हर शुगर मरीज के मन में यह सवाल जरूर आता है कि सुबह नाश्ते में क्या खाएं, जिससे शुगर लेवल न बढ़े और दिनभर एनर्जी भी बनी रहे। इसी तलाश में ज्यादातर लोग दलिया को एक हेल्दी ऑप्शन मानते हैं, कोई इसे डायबिटीज फ्रेंडली फूड कहता है, तो कोई वजन घटाने के लिए इसकी सलाह देता है लेकिन क्या वाकई रोज सुबह दलिया खाने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है, या यह सिर्फ एक आम धारणा है? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से बात की-

रोज सुबह दलिया खाने से शुगर लेवल पर क्या असर पड़ता है?

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि दलिया का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिसकी वजह से यह ब्लड शुगर को अचानक नहीं बढ़ाता। यही कारण है कि डायबिटीज मरीजों को सुबह के नाश्ते में दलिया शामिल करने की सलाह दी जाती है।

  • सुबह के वक्त खाया गया भोजन पूरे दिन के ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करता है।
  • डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि रोज सुबह दलिया खाने से शुगर धीरे-धीरे रिलीज होती है, जिससे ब्लड शुगर स्पाइक का खतरा कम रहता है।
  • दलिया लंबे समय तक पेट भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है।
  • दलिया में मौजूद सॉल्यूबल फाइबर इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • इससे शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग कर पाता है। डाइटिशियन अर्चना जैन के मुताबिक, ''नियमित रूप से दलिया खाने वाले मरीजों में फास्टिंग और पोस्ट मील शुगर लेवल ज्यादा स्टेबल रहता है।''

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क्या हम दलिया रोज खा सकते हैं?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या रोज दलिया खाना सही है या नहीं। डाइटिशियन अर्चना जैन का कहना है कि सीमित मात्रा में दलिया रोज खाया जा सकता है। हालांकि, इसमें ज्यादा नमक, चीनी या घी डालने से इसके फायदे कम हो सकते हैं। सादा सब्जियों वाला दलिया डायबिटीज मरीजों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। दलिया के साथ हरी सब्जियां, दही या स्प्राउट्स शामिल करना फायदेमंद होता है, इससे फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जो शुगर कंट्रोल में मदद करती है। डाइटिशियन अर्चना जैन सलाह देती हैं कि दलिया में आलू, ज्यादा तेल या प्रोसेस्ड मसालों से बचना चाहिए, क्योंकि ये ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं।

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is dalia good for diabetes

दलिया खाने का सही तरीका क्या है?

दलिया हमेशा अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिए, ताकि पाचन में दिक्कत न हो। सुबह के नाश्ते में एक कटोरी दलिया पर्याप्त माना जाता है। डाइटिशियन अर्चना जैन के मुताबिक, नियमित समय पर संतुलित मात्रा में दलिया खाने से शुगर लेवल को लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है।

निष्कर्ष

रोज सुबह दलिया खाने से शुगर लेवल पर पॉजिटिव असर पड़ता है, बशर्ते इसे सही तरीके और सही मात्रा में खाया जाए। डाइटिशियन अर्चना जैन की मानें तो दलिया डायबिटीज मरीजों के लिए एक सुरक्षित, सस्ता और असरदार नाश्ता विकल्प है। सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और मेडिकल सलाह के साथ दलिया शुगर कंट्रोल में अहम भूमिका निभा सकता है।

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FAQ

  • डायबिटीज मरीजों के लिए कौन-सा दलिया सबसे बेहतर है?

    डायबिटीज मरीजों के लिए गेहूं का दलिया या ओट्स दलिया बेहतर माना जाता है, क्योंकि इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।
  • डायबिटीज होने के मुख्य कारण क्या हैं?

    गलत खानपान, मोटापा, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, फैमली इतिहास, तनाव और हार्मोनल असंतुलन डायबिटीज के प्रमुख कारण माने जाते हैं।
  • डायबिटीज के लक्षण क्या होते हैं?

    बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, अचानक वजन कम होना या बढ़ना, थकान, घाव देर से भरना डायबिटीज के सामान्य लक्षण हैं।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 11, 2026 09:02 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Feb 11, 2026 09:02 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
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