Fri Sep 11, 2026 | 08:22 PM IST

Medically Reviewed by Dt Rakshita Mehra , Consultant Dietetics

क्या सच में नए आलू में होता है कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स? एक्सपर्ट से जानें डायबिटीज मरीज के लिए कितना सुरक्षित

मार्केट में नए आलू आते ही लोग आलू के पराठा और अन्य चीजों का सेवन शुरू कर देते हैं, लेकिन क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए भी नए आलू का सेवन सुरक्षित होता है, आइए जानते हैं?

आलू का इस्तेमाल भारत की रसोई का एक अहम हिस्सा है। सब्जी हो, पराठा या फिर स्नैक्स आलू का इस्तेमाल लगभग हर चीज में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, जब बात डायबिटीज की आती है तो आलू को लेकर सबसे पहले सवाल उठते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए आलू का सेवन ज्यादा सुरक्षित नहीं माना जाता है, क्योंकि इसे खाने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीज अक्सर इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि क्या पुराने आलू की तरह नए आलू का सेवन उनके लिए सही होता है या नहीं? इतना ही नहीं लोगों के मन में अक्सर ये सवाल भी आते हैं कि क्या सच में नए आलू में पुराने की तुलना में ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम (kya aalu mein sugar hoti hai) होता है? या नए आलू का gi लेवल कितना होता है? बता दें कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक ऐसा पैमाना है जो यह तय करता है कि कोई फूड आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल को कितनी तेजी से बढ़ाता है। इसलिए, आइए दिल्ली की क्लिनिकल डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा से जानते हैं कि क्या नए आलू में पुराने से कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है और क्या ये डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित है?

क्या सच में नए आलू का GI कम होता है?

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार जब हम नए आलू की बात करते हैं तो इसका GI अक्सर कम से मध्यम में पाया जाता है, यानी लगभग 55-65 (naye aloo me gi kitna hota hai) के बीच। आमतौर पर यह बड़े और पुराने आलू की तुलना में थोड़ा कम होता है। दरअसल नए आलू में स्टार्च कम होता है और रेजिस्टेंट स्टार्च, जो पचने में धीमा होता है ज्यादा पाया जाता है। नए आलू का सेवन शरीर में शुगर को धीरे-धीरे बढ़ने में मदद कर सकता है। इसलिए, नए आलू का GI पुराने आलू की तुलना में कम होता (aalu me sugar kitna hota hai) है, पर यह इतना भी कम नहीं होता है कि इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित माना जाए।

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क्या नए आलू डायबिटीज में सुरक्षित हैं?

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा का कहना है कि कुछ तरह के आलू जैसे नए आलू या लाल आलू में GI लेवल सामान्य आलू की तुलना में थोड़ा कम होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप बिना किसी सीमा के इसे खा सकते हैं। बल्कि, आपको इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

  1. संतुलित मात्रा में खाएं: डायबिटीज में आलू को पूरी तरह नजरअंदाज करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा और खाने के तरीके दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
  2. सही तरीके से पकाएं: उबला या भाप में पके आलू का GI को कम रखता है। जब आलू को ठंडा किया जाता है तो उसमें रेजिस्टेंट स्टार्च की मात्रा बढ़ जाती है और GI लेवल कम हो सकता है।
  3. दूसरी चीजों के साथ मिलाकर खाना: अगर आप आलू को सलाद, सब्जियां या प्रोटीन-फाइबर वाले प्रोटीन-फाइबर वाले खाने के साथ खाते हैं तो GI का प्रभाव और ज्यादा कंट्रोल रहता है।

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निष्कर्ष

नए आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स नॉर्मल आलू से थोड़ा कम होता है, लेकिन फिर भी यह एक कार्बोहाइड्रेट से भरपूर फूड है जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। डायबिटीज के मरीज नए आलू को सही और सीमित मात्रा में अपनी शामिल कर सकते हैं।
Image Credit: Freepik 

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jan 07, 2026 09:10 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Jan 07, 2026 09:10 IST

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