डायबिटीज एक गंभीर बीमारी बन चुकी है, जिससे बड़े-बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। डायबिटीज के डायग्नोसिस के बाद हर व्यक्ति अपनी डाइट और लाइफस्टाइल को लेकर सोच में पड़ जाता है। खासकर खाने में रोटी या चावल शामिल करने को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। डायबिटीज के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या चावल पूरी तरह बंद करना पड़ेगा? या सिर्फ रोटी खाना ही सुरक्षित होता है? भारतीय खान-पान में रोटी और चावल दोनों जरूरी हैं, जिनके बिना हमारी थाली अधूरी लगती है। लोगों में ऐसी धारणा बनी हुई है कि चावल खाने से अचानक शुगर लेवल बढ़ जाता है और रोटी खाने से शुगर कंट्रोल में रहती है। आइए इस लेख में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से जानते हैं कि डायबिटीज में रोटी या चावल क्या खाना बेहतर होता है?
रोटी या चावल: ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए क्या सही है?
Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए चावल से थोड़ा बेहतर गेहूं की रोटी को माना जाता है। हालांकि, अगर दोनों को सही तरीके और मात्रा में खाएं तो ब्लड शुगर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है।
रोटी और चावल के पोषण में अंतर
Dr. Akshay Chugh का कहना है कि हमें यह समझना जरूरी है कि गेहूं की रोटी और सफेद चावल दोनों ही कार्बोहाइड्रेट के सोर्स होते हैं। जब शरीर इन कार्बोहाइड्रेट्स को पचाता है तो वह ग्लूकोज में ही बदलते हैं। गेहूं की रोटी में फाइबर, प्रोटीन और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की मात्रा चावल की तुलना में थोड़ी ज्यादा होती है। फाइबर ज्यादा होने के कारण यह धीरे-धीरे पचती है। जबकि सफेद चावल में से फाइबर और चोकर हट जाता है। इसमें मुख्य रूप से स्टार्च बचता है, जो बहुत तेजी से पचता है और शरीर में जाकर तुरंत ब्लड शुगर स्पाइक कर सकता है।
चावल और रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, डायबिटीज में किसी भी खाने को डाइट में शामिल करने से पहले उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स जानना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। किसी भी खाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह बताता है कि कोई भोजन कितनी तेजी से आपके खून में शुगर का लेवल बढ़ाता है। चावल और गेहूं की रोटी के ग्लाइसेमिक इंडेक्स के बारे में जानकारी होने से आप इन दोनों में से सही का चुनाव आसानी से कर सकते हैं।
- सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स आमतौर पर 70 से 80 के बीच होता है, जो कि हाई GI में आता है।
- गेहूं की रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 60 से 65 के बीच होता है, जो मीडियम GI की कैटेगरी में आता है।
Dr. Akshay Chugh कहते हैं कि सिर्फ ग्लाइसेमिक इंडेक्स देखें तो गेहूं की रोटी सफेद चावल की तुलना में थोड़ी बेहतर होती है, क्योंकि यह ब्लड में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करती है।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2020 में Indian Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, जब गेहूं की चपाती और चावल को उनके कार्बोहाइड्रेट की समान मात्रा के आधार पर दाल और सब्जी के साथ एक मिश्रित भोजन के रूप में लिया जाता है, तो दोनों के ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कोई बड़ा अंतर नहीं होता है।
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क्या चावल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
Dr. Akshay Chugh बताते हैं कि चावल को पूरी तरह डाइट से हटाना जरूरी नहीं होता है। अगर आप चावल खाने के शौकीन हैं तो अचानक उसे खाना बंद करने से मरीज मानसिक रूप से तनाव में आ जाता है और लंबे समय तक सही डाइट फॉलो नहीं कर पाता है। डायबिटीज में चावल खाना समस्या नहीं है, बल्कि आप इसे किस तरह खा रहे हैं और कितनी मात्रा में यह मायने रखता है।
- नॉर्मल सफेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस या सिंगल-पॉलिश्ड राइस चुनें, क्योंकि इनमें फाइबर की मात्रा बनी रहती है, जिसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।
- उबले या स्टीम किए हुए बासमती राइस नॉर्मल चावल के मुकाबले कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है।
रोटी को ज्यादा हेल्दी कैसे बनाएं?
Dr. Akshay Chugh कहते हैं कि गेहूं की रोटी खाना डायबिटीज में चावल के मुकाबले ज्यादा बेहतर हो सकता है, लेकिन अगर आप गलत तरीके से इसे खाएंगे तो सेहत पर बुरा असर भी पड़ सकता है। इसलिए, इन बातों का ध्यान रखें-
- बाजार में मिलने वाला ज्यादा बारीक पिसा हुआ गेहूं का आटा या पैक्ड आटे में नेचुरल फाइबर कम होता है। इस तरह का आटा शरीर में लगभग सफेद चावल की तरह ही शरीर में तेजी से शुगर बढ़ाता है।
- अगर आप रोटी खा रहे हैं तो सिर्फ गेहूं के आटे की जगह उसमें चने का आटा, जौ, रागी, बाजरा या सोयाबीन मिलाकर मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं। जौ और चने का आटा मिलाने से रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम हो जाता है और यह डायबिटीज के लिए सुरक्षित होता है।
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किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी है कि चावल या रोटी खाने के दौरान वे कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसे:
- रात में चावल खाने से बचें: रात के समय हमारी शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो जाती है। इसलिए रात के भोजन में रोटी या दलिया बेहतर विकल्प हो सकता है, जबकि दोपहर के समय सीमित मात्रा में चावल खाया जा सकता है।
- चावल का मांड निकालकर पकाएं: चावल को कुकर में पकाने के बजाय खुले बर्तन में पकाएं और उसका पानी बाहर निकाल दें।
- रोटी में घी लगाएं: सूखा गेहूं का आटा तेजी से पचता है। अगर आप अपनी रोटी पर आधा छोटा चम्मच शुद्ध देसी घी लगा लेते हैं तो फैट के कारण उसका डाइजेशन धीमा हो जाता है और शुगर स्पाइक नहीं होता है।
निष्कर्ष
डायबिटीज में नॉर्मल गेहूं की रोटी सफेद चावल से थोड़ा बेहतर विकल्प होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप बिल्कुल भी चावल नहीं खा सकते हैं। जरूरी है कि आप प्रोसेस्ड और रिफाइंड अनाज को छोड़ दें। गेहूं की जगह मल्टीग्रेन आटे की रोटी चुनें और सफेद चावल की जगह ब्राउन या कम पॉलिश्ड चावल को सब्जियों के साथ खाएं।
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FAQ
शुगर में कौन सी रोटी खानी चाहिए?
डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल को नॉर्मल रखने के लिए गेहूं के आटे की बजाय मल्टीग्रेन, जौ, चना या मिलेट्स के आटे की रोटी खानी चाहिए।शुगर में कितनी बार खाना खाना चाहिए?
डायबिटीज के मरीजों को एक साथ ज्यादा खाने के बजाय दिनभर में 3 मुख्य भोजन और बीच में 2 छोटे हल्के स्नैक्स खाना चाहिए।
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Sep 05, 2026 16:59 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
