Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dt Rakshita Mehra , Consultant Dietetics

डायबिटीज के मरीजों को कौन सी रोटी खानी चाहिए? जानें कौन सा आटा है फायदेमंद

डायबिटीज के मरीजों के लिए चना, रागी, जौ और मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियां बेहतर विकल्प मानी जाती हैं। जानें ब्लड शुगर कंट्रोल में रखने के लिए कौन सी रोटी चुनें और इसके क्या फायदे हैं।

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें खानपान का खास ध्यान रखना जरूरी होता है। खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट में ऐसी रोटी शामिल करनी चाहिए, जो ब्लड शुगर को स्पाइक होने से रोक सके। नॉर्मल गेहूं की रोटी की तुलना में कुछ अनाज से तैयार रोटी ब्लड शुगर को शरीर में धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। अगर सही आटे से बनी रोटी को संतुलित और सही मात्रा में खाया जाए तो यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट को भरा रखने में मदद करती है। इसलिए, आइए दिल्ली की क्लिनिकल डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा का कहना है कि गेहूं की रोटी के स्थान पर रागी, जौ और चना से तैयार रोटी का सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। इसलिए, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे अच्छी रोटियां कौन-सी हैं?

डायबिटीज के मरीजों के लिए रोटी के 5 बेस्ट ऑप्शन

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार, डायबिटीज के मरीज गेहूं के स्थान पर रागी, जौ, मल्टीग्रेन आटे की रोटी शामिल कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन्हें खाने के फायदों के बारे में-

1. रागी की रोटी

रागी फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम माना जाता है, जिससे इसे खाने के बाद ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता है। रागी में मौजूद फाइबर आपके पाचन क्रिया को धीमा करता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता है। यह वजन कंट्रोल करने में भी मदद कर सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद है।

साल 2025 में Rehman Journal of Health Sciences में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, रागी का आटा डायबिटीज में ग्लाइसेमिक कंट्रोल में सुधार करने का एक सुरक्षित तरीका है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो डायबिटीज को मैनेज करते हैं।

कैसे खाएं?

रागी के आटे में थोड़ी मात्रा में गेहूं या चना आटा मिलकर इसकी रोटी बनाएं। इस रोटी को दाल, हरी सब्जी या लो-फैट दही के साथ खाएं।

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2. जौ की रोटी

साल 2025 में Scientific Reports के जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, जौ फाइबर का एक अच्छा स्रोत है। जौ में मौजूद बीटा-ग्लूकन घुलनशील फाइबर पाचन तंत्र में शुगर के अवशोषण को कम कर सकता है। जौ का इस्तेमाल करने से ब्लड शुगर कम करने वाले संभावित एजेंट होते हैं, जो खाना खाने के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर को कम करने में मदद कर सकता है।

कैसे खाएं?

जौ के आटे में थोड़ा गेहूं का आटा मिलाकर रोटी बनाएं। इसके बाद इसे दाल, पनीर या हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ खाएं।

3. चना की रोटी

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा बताती हैं कि चना प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है। यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल ज्यादा बढ़ने की संभावना कम होने लगती है। साथ ही, प्रोटीन की अच्छी मात्रा होने के कारण मांसपेशियों के स्वास्थ्य और लंबे समय तक पेट को भरा महसूस कराने में मदद करता है।

कैसे खाएं?

बेसन में थोड़ी मात्रा में गेहूं या जौ का आटा मिलाकर रोटी तैयार कर लें। इस रोटी को दही, सलाद और हरी सब्जियों के साथ खाएं। तली हुई सब्जियों के स्थान पर कम तेल वाली सब्जियां चुनें।

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4. मल्टीग्रेन रोटी

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार, मल्टीग्रेन रोटी कई तरह के अनाज जैसे गेहूं, जौ, रागी, चना, ज्वार और बाजरा को मिलाकर तैयार किया जाता है। इससे शरीर को फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बाजार में मिलने वाले सभी मल्टीग्रेन आटे एक जैसे नहीं होते हैं। इसलिए, ऐसा मल्टीग्रेन आटे चुनें, जिसमें साबुत अनाज ज्यादा हों और रिफाइंड आटा कम हों।

कैसे खाएं?

मल्टीग्रेन आटे की 1 या 2 रोटी को सब्जी या दाल के साथ मिलकर खाएं। खाने में सलाद जरूर शामिल करें। ज्यादा तेल, घी या बटर का इस्तेमाल करने से बचें।

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5. ओट्स की रोटी

न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के मुताबिक, ओट्स में बीटा-ग्लूकन नाम का घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जो ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है। ओट्स की रोटी पाचन को बेहतर बनाने और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में मदद कर सकती है।

कैसे खाएं?

ओट्स के आटे में गेहूं या चना आटा मिलाकर रोटी तैयार करें। इसे दाल, अंकुरित सलाद या कम फैट वाले पनीर के साथ खाएं। नाश्ते या दोपहर के भोजन में आप इस रोटी को शामिल कर सकते हैं।

किस आटे में होता है कितना ग्लाइसेमिक इंडेक्स?

रागी, जौ, मल्टीग्रेन, ओट्स और चना के आटे से बनी रोटी डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। हालांकि, इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अलग-अलग होता है-

किस आटे की रोटी 100 ग्राम आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स  डायबिटीज में फायदा
रागी की रोटी  54 - 68 (मध्यम) फाइबर से भरपूर होता है, जिससे पेट को देर तक भरा रखने में मदद करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है।
जौ की रोटी  35 - 55 (कम) बीटा-ग्लूकन फाइबर से भरपूर होता है, जो ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करता है और कोलेस्ट्रॉल कम करता है।
चना की रोटी  28 - 35 (बहुत कम) ब्लड शुगर में होने वाले अचानक स्पाइक को रोकता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है।
मल्टीग्रेन रोटी  30 - 45 (कम) अलग-अलग अनाजों का मिश्रण ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है।
ओट्स की रोटी   44 (कम) इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के साथ शरीर में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करता है।

निष्कर्ष
डायबिटीज मरीजों के लिए रागी, जौ, चना, मल्टीग्रेन और ओट्स से तैयार रोटियां खाना नॉर्मल गेहूं की तुलना में ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इन चीजों में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने, पाचन में सुधार करने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। हालांकि, सिर्फ सही आटा चुनना ही काफी नहीं होता है, बल्कि संतुलित मात्रा में खाना और नियमित शारीरिक गतिविधियां करने से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • शुगर में कितनी रोटी खानी चाहिए?

    डायबिटीज के मरीजों को एक बार में 1 से 2 रोटी खानी चाहिए। दिनभर में कुल 4 से 6 रोटी से ज्यादा नहीं खानी चाहिए। यह मात्रा व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि, उम्र और वजन पर निर्भर करती है।
  • शुगर में सबसे ज्यादा क्या खाना चाहिए?

    डायबिटीज के मरीजों को सबसे ज्यादा हरी पत्तेदार सब्जियां, फाइबर से भरपूर साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। ये चीजें ब्लड में शुगर को तेजी से बढ़ने नहीं देती हैं।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 05, 2026 14:40 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dt Rakshita Mehra

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