Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

खाना खाने के बाद हर बार मीठा खाने का मन करता है? न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से जानें इसकी वजह

खाना खाने के बाद मीठा खाने की इच्छा आदत, हार्मोन, खानपान या ब्लड शुगर में बदलाव से जुड़ी हो सकती है। जानें यह कब सामान्य है और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

क्या आपका हर दिन खाना खत्म करते ही कुछ मीठा खाने का मन करने लगता है? कई लोगों के लिए लंच या डिनर तब तक पूरा नहीं माना जाता, जब तक आखिर में मिठाई, चॉकलेट, आइसक्रीम या कोई मीठी चीज न खा लें। जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, कभी-कभार मीठा खाने की इच्छा होना असामान्य नहीं माना जाता लेकिन यदि हर भोजन के बाद तेज क्रेविंग होने लगे, मीठा न मिलने पर बेचैनी महसूस हो या बार-बार मीठा खाने की इच्छा कंट्रोल करना मुश्किल हो जाए, तो इसके पीछे खानपान, हार्मोन, नींद, तनाव या कुछ हेल्थ कंडीशन भी हो सकती हैं।

खाना खाने के बाद मीठा खाने का मन क्यों होता है?

न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, ''यदि आप लंबे समय से हर भोजन के बाद मिठाई खाने के आदी हैं, तो आपका दिमाग इसे डेली रूटीन का हिस्सा मान लेता है। ऐसे में भोजन पूरा होते ही मीठा खाने की इच्छा होना एक आदत बन सकती है, भले ही शरीर को उसकी जरूरत न हो।''

कारण प्रभाव सलाह
प्रोटीन और फाइबर की कमी यानी भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट का न होना। पेट जल्दी खाली लगने लगता है और खाने के तुरंत बाद मीठे की तेज इच्छा होती है। थाली में पनीर, दालें, हरी सब्जियां और सलाद जैसे पोषक तत्व शामिल करें ताकि पेट लंबे समय तक भरा रहे।
रिफाइंड कार्ब्स या ज्यादा मीठे फूड्स का सेवन। ब्लड में शुगर का लेवल तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक गिर जाता है, जिससे दोबारा मीठे की क्रेविंग होती है। रिफाइंड कार्ब्स कम करें। यदि ज्यादा प्यास या थकान जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर की सलाह पर ब्लड शुगर जांच कराएं।
मानसिक थकान, तनाव या एंग्जायटी के दौरान दिमाग में केमिकल का असंतुलन। मीठा खाने से दिमाग में अस्थायी रूप से 'फील-गुड' हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे मन को तुरंत राहत महसूस होती है। तनाव मैनेजमेंट के लिए योग, ध्यान, या गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस करें। मीठे को मानसिक सुकून का जरिया न बनाएं।
नींद की कमी यानी पर्याप्त और अच्छी नींद न लेना। भूख कंट्रोल करने वाले घ्रेलिन और लेप्टिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। रात के समय खासतौर से मीठा खाने की इच्छा बढ़ती है। रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, जिससे कि मीठा खाने की इच्छा कंट्रोल हो सके।
खाने के बाद मीठे का स्वाद लेने की बनी पुरानी आदत, जो शरीर में डोपामाइन हाई का एहसास देती है। पेट भरा होने पर भी दिमाग भोजन के आखिर में केवल मीठे स्वाद का ही इंतजार करता है। खाने के तुरंत बाद सौंफ, इलायची या थोड़ा सा गुड़ लें ताकि बिना ज्यादा कैलोरी के मुंह का स्वाद बदल सके।

साल 2013 में Nature Communication में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार-

  • नींद की कमी और अनहेल्दी खान-पान का संबंध केवल एक आदत नहीं, बल्कि दिमाग की एक्टिविटी में आने वाला बदलाव है।
  • जब नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर की एनर्जी की जरूरत बढ़ जाती है और दिमाग का कंट्रोल सिस्टम कमजोर पड़ जाता है।
  • इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति को ज्यादा कैलोरी वाले भोजन जैसे मीठे, नमकीन और स्टार्च युक्त फूड्स की तेज इच्छा होने लगती है।

साल 2015 में Journal of Health Psychology में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार-

  • तनाव हमारे दिमाग के न्यूरोबायोलॉजिकल सिस्टम को गहराई से प्रभावित करता है, जिससे स्वादिष्ट, मीठे और फैट से भरपूर भोजन का मन बढ़ जाता है।
  • जब इंसान तनाव में होता है, तो डोपामाइन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को एक्टिव कर देते हैं।
  • इसके कारण ऐसा खाना खाने पर दिमाग को तुरंत आनंद और राहत महसूस होती है।

न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, कभी-कभी भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में मीठा खाने का मन होना सामान्य हो सकता है लेकिन यदि हर भोजन के बाद बहुत तेज क्रेविंग हो, मीठा न मिलने पर बेचैनी महसूस हो, वजन तेजी से बढ़ रहा हो या बार-बार प्यास और थकान भी हो, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

crave sugar after eating

इसे भी पढ़ें: सुबह उठते ही तेज भूख लगने पर खा लेते हैं मीठा? जानें ऐसा करने का शरीर पर असर

ज्यादा मीठा खाने का मन करे तो क्या करें?

  • भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं।
  • शुगर ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड के साथ शुगर का सेवन सीमित करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं।
  • रोज 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन या नियमित वॉक करें।
  • मिठाई की जगह कभी-कभी ताजे फल या बिना एक्स्ट्रा चीनी वाला दही चुन सकते हैं।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन बताती हैं कि अगर मीठा खाने की इच्छा के साथ बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन घटना, लगातार थकान या धुंधला दिखना जैसे लक्षण भी हों, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। ये बढ़े हुए ब्लड शुगर या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े संकेत हो सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: वजन घटाना चाहते हैं तो मिठाई छोड़ें, इन हेल्दी चीजों से करें मीठा खाने की क्रेविंग कंट्रोल

निष्कर्ष

खाना खाने के बाद मीठा खाने की इच्छा होना कई लोगों में सामान्य हो सकता है और इसके पीछे स्वाद की आदत, खानपान, नींद, तनाव या ब्लड शुगर जैसे कई कारण हो सकते हैं। अगर यह इच्छा कभी-कभार होती है, तो चिंता की बात नहीं है लेकिन यदि यह रोज की आदत बन जाए या इसके साथ अन्य असामान्य लक्षण भी दिखाई दें, तो कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सही कदम है।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या फल खाने से मीठा खाने की क्रेविंग कम हो सकती है?

    कुछ लोगों में भोजन के बाद फल खाने से मीठे की इच्छा कम हो सकती है। फल खाने से फाइबर और नेचुरल शुगर दोनों मिलती हैं।
  • क्या मीठा खाने से दांत खराब होते हैं?

    ज्यादा मात्रा में मीठा खाने और सही ओरल हाइजीन न रखने से दांतों में कैविटी और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
  • क्या मीठा पूरी तरह छोड़ देना सही है?

    यदि आपको कोई सेहत से जुड़ी समस्या नहीं है, तो संतुलित मात्रा में मीठा लिया जा सकता है लेकिन ज्यादा चीनी वाले फूड्स का नियमित सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

Read Next

खाना खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीते हैं? एक्सपर्ट से जानें यह आदत किनके लिए सही नहीं

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 05, 2026 14:07 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Aug 05, 2026 14:07 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Archana Jain

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content