Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्‍या ब्रश करने से कम हो सकती है मीठे की क्रेविंग? एक्‍सपर्ट से जानें

शुगर क्रेव‍िंग कंट्रोल करने के ल‍िए दांतों को ब्रश करना असरदार तरीका माना जाता है। टूथपेस्‍ट में मौजूद मेंथॉल और अन्‍य केम‍िकल म‍िलकर शुगर क्रे‍व‍िंग को दूर करने में मदद कर सकते हैं। जानते हैं इस बात में क‍ितनी सच्‍चाई है?

कई लोगों को खाना खाने के बाद या देर रात अचानक मीठा खाने का मन होता है। इसे शुगर क्रेविंग कहा जाता है। लेकिन क्या सिर्फ दांत ब्रश करने से इस क्रेविंग को कम किया जा सकता है? कुछ लोग मानते हैं कि ब्रश करना कुछ हद तक मीठा खाने की इच्छा को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। एक्‍सपर्ट से जानते हैं इसका सही जवाब। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

टूथपेस्‍ट का स्‍वाद मीठे की क्रेव‍िंग को कंट्रोल कर सकता है

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Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि टूथपेस्ट में मौजूद मिंट फ्लेवर और मुंह में आने वाली फ्रेशनेस मीठी चीजों का स्वाद कुछ समय के लिए कम आकर्षक बना सकती है। इससे व्यक्ति तुरंत मीठा खाने से बच सकता है। ब्रश करने के बाद मुंह में मेंथॉल और मिंट का असर रहता है। ऐसे में मीठी चीजों का स्वाद अलग लग सकता है। साथ ही स्नैकिंग की इच्छा भी कम हो सकती है। इससे द‍िमाग को पेट भर जाने का संकेत म‍िलता है। यही कारण है कि कई लोग रात में ब्रश करने के बाद दोबारा कुछ खाने से बचते हैं।

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क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है?

कुछ रिसर्च बताती हैं कि स्वाद और दिमाग के बीच गहरा संबंध होता है। जब मुंह में तेज मिंटी स्वाद रहता है, तब मीठी चीजें उतनी स्वादिष्ट महसूस नहीं होतीं। इससे शुगर क्रेविंग अस्थायी रूप से कम हो सकती है। हालांकि एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि ब्रश करना कोई स्थायी इलाज नहीं है।

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अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव हो सकता है

ब्रश करने से अनहेल्‍दी स्नैकिंग से बचाव हो सकता है। खासकर देर रात की अनहेल्दी स्नैकिंग रोकने में, लेकिन अगर आपको लगातार बहुत ज्यादा शुगर क्रेविंग हो रही है, तो यह ब्लड शुगर असंतुलन या खानपान से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है।

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बार-बार मीठा खाने का मन क्‍यों करता है?

अगर बार-बार मीठा खाने की इच्छा होती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे-

  • तनाव और एंग्जायटी
  • नींद की कमी
  • ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव
  • बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाना
  • शरीर में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर की कमी

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मीठे की क्रेव‍िंग दूर करने के ल‍िए क्‍या करें?

  • डाइट में दाल, अंडे, नट्स, फल और सलाद शामिल करने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है।
  • कई बार डिहाइड्रेशन से भी भूख और क्रेविंग को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • कम नींद लेने से शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं।
  • स्‍ट्रेस बढ़ने पर लोग अक्सर ज्यादा मीठा खाने लगते हैं। शुगर क्रेव‍िंग से बचने के ल‍िए मेडिटेशन और एक्सरसाइज की मदद ले सकते हैं।
  • मीठा खाने का मन हो तो फल, डार्क चॉकलेट और दही जैसे विकल्प चुन सकते हैं।

निष्कर्ष:

ब्रश करना मीठा खाने की इच्छा को कुछ समय के लिए कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि मिंट फ्लेवर मीठे स्वाद को कम आकर्षक बना देता है। हालांकि, यह कोई मैजिक उपाय नहीं है। लंबे समय तक शुगर क्रेविंग कंट्रोल करने के लिए संतुलित डाइट, अच्छी नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल ज्यादा जरूरी मानी जाती है।

FAQ

  • शुगर क्रेव‍िंग से कैसे बचें?

    प्रोटीन और फाइबर से भरपूर डाइट लें, पर्याप्त पानी पि‍एं और अच्छी नींद लेकर शुगर क्रेव‍िंग को कंट्रोल कर सकते हैं। इसके अलावा स्‍ट्रेस कम करें और प्रोसेस्ड एवं शुगरी फूड्स का सेवन सीमित करें।
  • शुगर क्रेव‍िंग के नुकसान क्‍या हैं?

    बार-बार ज्यादा मीठा खाने से वजन बढ़ना, ब्लड शुगर असंतुलन और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा यह दांतों की समस्या, थकान और लंबे समय में दिल की बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 15, 2026 19:28 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 15, 2026 19:28 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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