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क्या फैटी लिवर में गेहूं की रोटी नुकसान करती है? आयुर्वेदाचार्य से जानें

आजकल फैटी लिवर एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। गलत खानपान, ज्यादा ऑयली और जंक फूड, शराब का सेवन और स्ट्रेस फैटी लिवर की मुख्य वजहें हैं। ऐसे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं, जैसे कि क्या फैटी लिवर में गेहूं की रोटी नुकसान करती है?

आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में फैटी लिवर यानी जिगर में फैट जमा होना एक आम समस्या बनती जा रही है। लोग जल्दी-जल्दी खाने को पसंद करते हैं, प्रोसेस्ड फूड और ऑयली फूड का सेवन बढ़ गया है और स्ट्रेस के कारण शरीर के जरूरी अंगों पर दबाव पड़ता है। यही वजह है कि फैटी लिवर के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसी स्थिति में सबसे पहला सवाल उठता है कि हमारा रोजमर्रा का आहार खासकर गेहूं की रोटी लिवर के लिए सुरक्षित है या नहीं। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से बात की-

क्या फैटी लिवर में गेहूं की रोटी नुकसान करती है? - Is wheat roti harmful with fatty liver

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि फैटी लिवर की समस्या में गेहूं की रोटी नुकसान नहीं करती। गेहूं का आटा पचने में आसान है और इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो लिवर को हेल्दी बनाए रखने में मदद करती है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक पित्त या वसा जमा होने की समस्या से पीड़ित है, तो कुछ मामलों में गेहूं के साथ जौ की रोटी खाने की सलाह दी जाती है। जौ का आटा हल्का, शीत वीर्य और पाचन के लिए आसान होता है। यह लिवर पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता और फैट को कंट्रोल करने में मदद करता है।

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फैटी लिवर क्यों होता है? - What are the main causes of fatty liver

डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि फैटी लिवर तब होता है जब लिवर की कोशिकाओं में फैट यानी वसा जमा होने लगती है। यह समस्या शराब से संबंधित हो सकती है (एल्कोहलिक फैटी लिवर) या बिना शराब के भी हो सकती है (नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर)। आयुर्वेद के अनुसार, यह स्थिति अधिक पित्त और कफ की असंतुलितता से जुड़ी होती है।

इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं-

  • अत्यधिक ऑयली और अम्लीय भोजन
  • जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन
  • शुगर और मीठे पदार्थों का ज्यादा सेवन
  • स्ट्रेस और नींद की कमी

कौन से भोजन लिवर के लिए नुकसानदेह हैं?

आयुर्वेद के अनुसार, कुछ फूड्स फैटी लिवर की समस्या को बढ़ा सकते हैं। इनमें शामिल हैं अम्लीय फूड जैसे नींबू, सिरका, अचार आद, कटु और तिक्त फूड जैसे कड़वे पत्ते, हल्दी का अधिक प्रयोग, तैलीय और फ्राइड फूड्स:तेल और घी में तली चीजें, स्नैक्स, पकोड़े आदि। इन फूड्स का अधिक सेवन लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है और फैटी लिवर की समस्या बढ़ा सकता है।

Is wheat roti harmful with fatty liver

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डॉक्टर की सलाह

डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार फैटी लिवर के मरीजों के लिए आहार संतुलित होना चाहिए। गेहूं और जौ का मिश्रण डाइट में शामिल कर सकते हैं। तैलीय, कटु और अम्लीय फूड्स से परहेज करें, अधिक पानी पिएं और डिटॉक्स फूड्स का सेवन बढ़ाएं, इसके अलावा हरी सब्जियां, फल और हल्का, फाइबर युक्त भोजन लें।

निष्कर्ष

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गेहूं की रोटी फैटी लिवर में सामान्य मात्रा में नुकसान नहीं करती। हालांकि, यदि व्यक्ति में वसा जमा होने की समस्या अधिक है या पित्त और कफ असंतुलित हैं, तो जौ के आटे का मिश्रण बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, अम्लीय, कटु, तिक्त और तैलीय फूड्स से परहेज करना जरूरी है। सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाने से फैटी लिवर को कंट्रोल किया जा सकता है और लिवर की सेहत को बनाए रखा जा सकता है।

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FAQ

  • फैटी लिवर से क्या परेशानी होती है?

    फैटी लिवर (Fatty Liver) से लिवर में सूजन, लिवर फेलियर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती है, जिससे थकान, पेट में दर्द, पीलिया जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
  • फैटी लिवर में क्या परहेज है?

    फैटी लिवर में आपको शराब, मिठाई, सोडा, तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड अनाज और अत्यधिक नमक से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये लिवर में फैट बढ़ाते और सूजन पैदा करते हैं।
  • लिवर के लिए सुबह क्या पीना चाहिए?

    लिवर को हेल्दी रखने के लिए सुबह गुनगुना पानी, नींबू पानी, ग्रीन टी पीना बहुत फायदेमंद है, क्योंकि ये लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Dec 30, 2025 16:17 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Dec 30, 2025 16:17 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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