शराब से होने वाले फैटी लिवर को हम एल्कोहलिक फैटी लिवर के नाम से जानते हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब कोई बहुत ज्यादा मात्रा में लंबे समय तक शराब पीता है। शराब पीने की वजह से लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है, जिससे लिवर को फंक्शन करने में परेशानी आने लगती है। हालांकि, शुरुआती दिनों में इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं इसलिए कई बार मरीज को एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का पता बहुत देर से चलता है, जिससे इलाज में परेशानियां आती हैं। बहरहाल, यह जान लेना जरूरी है कि आखिर शराब पीने से फैटी लिवर क्यों होता है, इसे किस स्टेज तक और कैसे मैनेज किया जा सकता है? इस आर्टिकल में बताए गए तथ्यों को और वैज्ञानिक साक्ष्यों की खुद सेक्टर 20, फरीदाबाद स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में Group Director - Gastroenterology डॉ. कपिल शर्मा ने पुष्टि की है।
शराब लिवर में फैट कैसे जमा करती है?
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Indian Journal Of Pharmacology के अनुसार लिवर का हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने का मुख्य काम होता है। ऐसे में जब कोई अधिक मात्रा में शराब पीता है, तो लिवर का मुख्य काम एल्कोहल को साफ करके शरीर से बाहर निकालने का हो जाता है। इस प्रक्रिया में लिवर इतना व्यस्त हो जाता है कि फैट को मेटाबोलाइज करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। जैसे-जैसे शराब टूटती है, शरीर में जहरीले पदार्थ बनने लगते हैं और लिवर के आसपास वसा जमा होने लगती है। जानकारी के लिए बता दें कि जब आप शराब पीते हैं, तो लिवर उसे एसिटाल्डिहाइड (Acetaldehyde) नाम के एक बहुत ही जहरीले तत्व में बदल देता है। शरीर के लिए यह एक इमरजेंसी की स्थिति होती है इसलिए लिवर सिर्फ एल्कोहल को साफ करने में लग जाता है। इस दौरान लिवर फैट को बर्न नहीं कर पाता, जिससे धीरे-धीरे लिवर के आसपास फैट काफी ज्यादा मात्रा में जमा होने लगता है। यह प्रक्रिया शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को भी बढ़ा देती है। ध्यान रखें बहुत ज्यादा शराब पीने से एक खास किस्म का प्रोटीन CYP2E1 (Cytochrome P450 2E1) सक्रिय हो जाता है। ये प्रोटीन लिवर को अधिक मात्रा में चर्बी बनाने के लिए प्रेरित करता है। नतीजतन, लिवर के आसपास बहुत सारी चर्बी जमा होने लगती है। यही नहीं, लिवर को फैट बर्न करने में दिक्कत आती है, क्योंकि यह शराब को पचाने में अपनी ऊर्जा खर्च करता है। इससे फैट स्टोरेज धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
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शराब पीने के कारण हुए फैटी लिवर के संकेत

- थकान महसूस करनाः World Journal Gastroenterol के अनुसार शराब पीने की वजह से फैटी लिवर हो तो इसके शुरुआती संकेत में व्यक्ति लगातार थकान और कमजोरी महसूस करता है।
- जॉन्डिसः Mayo Clinic की मानें, तो शराब पीने के कारण फैटी लिवर हो सकता है, जो कि भविष्य में जॉन्डिस का कारण बन सकता है।
- पेट में दर्दः National Health Service में बताया गया है कि फैटी लिवर होने पर लिवर में सूजन आ सकती है, जिससे पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। यह भी फैटी लिवर का एक लक्षण है।
- उल्टी और मतलीः फैटी लिवर में उल्टी और मतली महसूस करना भी एक कॉमन संकेत है। Cleveland Clinic में प्रकाशित लेख की मानें, ‘ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लिवर ब्लड में मौजूद टॉक्सिन्स को फिल्टर नहीं कर पता है, जिससे पेट पर अधिक दबाव बनने लगता है जो कि उलटी और मतली का कारण बनता है।’
- पेशाब का रंग बदलनाः Cleveland Clinic में प्रकाशित इसी लेख से पुष्टि होती है कि फैटी लिवर होने की वजह से रक्तप्रवाह में बिलीरुबिन बढ़ जाता है, जिसकी वजह से पेशाब का रंग बदल सकता है।
- पैरों में सूजनः पैरों और टखनों में सूजन, जिसे हम एडिमा के नाम से जानते हैं। यह स्थिति एडवांस्ड एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज में होती है। ऐसा मुख्य रूप से पोर्टल हाइपरटेंशन और एल्ब्यूमिन प्रोडक्शन में कमी के कारण होती है। असल में जैसे-जैसे लिवर में निशान पड़ने लगता है, लिवर से खून का बहाव कम हो जाता है।
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क्या लिवर के लिए शराब की थोड़ी मात्रा सुरक्षित है?
WHO की मानें तो किसी भी मात्रा में शराब का सेवन सुरक्षित नहीं होता है। शराब शरीर में कम से कम 7 प्रकार के कैंसर का कारण बन सकती है। इसमें लिवर, ब्रेस्ट (महिलाओं में), कोलन (आंत) और गले का कैंसर प्रमुख रूप से शामिल हैं। यहां तक तक कि कम मात्रा में शराब पीना भी कैंसर के खतरे का बढ़ा देता है। लिवर और पाचन तंत्र पर भी शराब का बुरा असर देखने को मिलता है। यही नहीं , शराब लिवर की कोशिकाओं को नष्ट करती है, जिससे सिरोसिस और लिवर फेलियर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। शराब पेंक्रियाज में सूजन पैदा करती है, जिससे पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है।
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एल्कोहलिक लिवर डिजीज के चरण
एल्कोहलिक फैटी लिवर
यह सबसे शुरुआती स्थिति है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है। आमतौर पर इस स्थिति में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। हालांकि, अच्छी बात ये हे कि एल्कोहलिक फैटी लिवर के शुरुआती चरण में शराब पीना पूरी तरह से बंद कर दिया जाए, तो स्थिति सामान्य हो सकती है। इसका मतलब है कि यह कंडीशन रिवर्सिवल है।
एल्कोहलिक हेपेटाइटिस
लगातार शराब पीने की वजह से जब लिवर की कोशिकाओं में सूजन आने लगे और वे नष्ट हो जाएं, तो उसी स्थिति को हम एल्कोहलिक हेपेटाइटिस कहा जाता है। इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया) पेट में दर्द, मतली और बुखार शामिल हैं। इसके जोखिमों की बात करें, तो इसका सही इलाज न किया जाए, इस स्थिति को लिवर के लिए खतरनाक माना जाता है और इसमें तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरूरत होती है।
एल्कोहलिक सिरोसिस
NHS के अनुसार एल्कोहलिक सिरोसिस सबसे एड्वांस और गंभीर फेज होता है। इसमें लिवर में पर्मानेंट घाव हो जाता है, जो ठीक नहीं होता है। इसलिए, इस स्थिति को इर्रिवर्सिबल कहा जाता है यानी एल्कोहलिक सिरोसिस होने के बाद लिवर पुराने और स्वस्था अवस्था में कभी नहीं लौटता है। इस स्थिति में पेट में पानी भर जाता है और शरीर के अंदर ब्लीडिंग भी होने लगती है। यह स्थितियां जानलेवा भी हो सकती हैं।
एल्कोहलिक फैटी लिवर का निदान
अगर किसी को एल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या हो, तो उन्हें इसके निदान में देरी नहीं करनी चाहिए। आमतौर पर फैटी लिवर के निदान के लिए फिजिकल टेस्ट, ब्लड टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं। साथ ही, डॉक्टर मरीज से यह पूछते हैं कि वे कितने लंबे समय से शराब का सेवन कर रहे हैं। इसके बाद लिवर फंक्शन टेस्ट जैसी ब्लड रिपोर्ट के जरिए लिवर एंजाइम्स के बढ़े हुए स्तर की जांच की जाती है। लिवर में जमा फैटी पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अगर स्थिति गंभीर है, तो फाइब्रोस्कैन या सीटी स्कैन/एमआरआई भी किया जा सकता है। कुछ मामलों में लिवर बायोप्सी की भी जरूरत पड़ सकती है। यह स्थिति की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है।
डॉक्टर के पास कब जाएं?

अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से शराब का सेवन करता है, तो उसे अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना चाहिए और समय-समय पर अपने लिवर की जांच करवाते रहना चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि एल्कोहलिक फैटी लिवर होने पर मरीजों को कुछ बातों पर गौर करना चाहिए, जैसे-
- अगर कोई लगातार थकान और कमजोरी महसूस करता है।
- अगर अक्सर पेट में दर्द रहता है।
- अगर अचानक बिना कोशिश के वजन कम हो गया है।
- त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ रहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि शराब लिवर के लिए बिल्कुल सही नहीं है। हां, अगर किसी को लिवर से संबंधित बीमारी का इतिहास है या परिवार में लिवर की बीमारी का इतिहास है, तो ऐसे लोगों को शराब का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि लिवर डिजीज साइलेंट कंडीशन है। इसके शुरुआती लक्षणों का पता नहीं चलता है। इसलिए यह बीमारी और भी घातक हो जाती है। शराब पीने की वजह से इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। जिन्हें पहले से ही फैटी लिवर की समस्या है, वे शराब न पिएं।
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FAQ
क्या शराब छोड़ने से लिवर ठीक हो जाता है?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपके लिवर में क्या प्रॉब्लम है। अगर लिवर से संबंधित कोई गंभीर बीमारी है, तो आपको इलाज करवाना चाहिए। हां, यह बात सच है कि शराब का सेवन पूरी तरह बंद करने से लिवर फंक्शन में सुधार होने लगता है।फैटी लिवर में शराब पीने से क्या होता है?
यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसार अगर किसी को फैटी लिवर की समस्या है, तो उन्हें शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे लिवर में सूजन और जलन हो सकती है और धीरे-धीरे कंडीशन बिगड़ सकती है। यह फाइब्रोसिस और सिरोसिस का कारण बन सकता हैै।एल्कोहॉल फैटी लिवर डिजीज के क्या लक्षण हैं?
एल्कोहॉल फैटी लिवर होने पर मरीज को शुरुआती दिनों में कोई विशेष लक्षण नजर नहीं आते हैं। धीरे-धीरे यह थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या दबाव, भूख न लगना, मतली, उल्टी और वजन घटना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज को कैसे ठीक करें?
एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज होने पर सबसे पहले आप शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दें। इसके बाद अपनी जीवनशैली में अच्छी आदतें अपनाएं, जैसे रोजाना अच्छी और गहरी नींद लें, एक्सरसाइज करें और डाइट में संतुलित आहार शामिल करें। डॉक्टर की दवा समय पर लेना न भूलें।शराब पीने के बाद लिवर को ठीक होने में कितना समय लगता है?
शराब पीने से लिवर को कितनी क्षति हुई है, इसी बात पर यह निर्भर करता है कि शराब पीने से लिवर को ठीक होने में कितना समय लग सकता है। जैसे फैटी लिवर है, तो शराब छोड़ने के 2-3 महीने में सूजन में कमी आने लगती है। वहीं, सूजन और सिरोसिस में शराब छोड़ने के बाद भी लिवर को ठीक होने में लंबा समय लग सकता है।
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Mar 31, 2026 14:07 IST
Modified By : Meera Tagore Mar 31, 2026 14:07 IST
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Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Kapil Sharma