हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में कर्नाटक की प्रसिद्ध कलबुर्गी रोटी का जिक्र किया। इसके बाद यह पारंपरिक रोटी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कर्नाटक के कलबुर्गी क्षेत्र में बनने वाली यह रोटी मुख्य रूप से ज्वार के आटे से तैयार की जाती है। स्वाद, परंपरा और पोषण का बेहतरीन मेल मानी जाने वाली यह रोटी न केवल स्थानीय लोगों की पसंद है, बल्कि फिटनेस फ्रीक लोगों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कलबुर्गी रोटी के फायदे जानने के लिए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।
क्या है कलबुर्गी रोटी?

कलबुर्गी रोटी ज्वार से बनती है और आकार में बड़ी, मुलायम और हल्की होती है। आमतौर पर इसे दाल, सब्जी, चटनी या मसालेदार करी के साथ खाया जाता है। ज्वार की वजह से यह रोटी स्वाद के साथ-साथ पोषण भी देती है।
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ज्वार से भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं
ज्वार को भारत के प्रमुख मोटे अनाजों (मिलेट्स) में गिना जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। यही कारण है कि ज्वार से बनी कलबुर्गी रोटी को साधारण गेहूं की रोटी की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है।
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पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है
कलबुर्गी रोटी में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। पर्याप्त फाइबर कब्ज की समस्या को कम कर सकता है और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। फाइबर युक्त भोजन करने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है। साल 2023 में Molecules नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, ज्वार में मौजूद पॉलीफेनॉल्स पाचन प्रक्रिया के दौरान भी एक्टिव रहते हैं और इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण काफी हद तक बने रहते हैं। यही वजह है कि ज्वार को पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है।
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वजन कंंट्रोल होता है
जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या वजन को कंट्रोल करना चाहते हैं, उनके लिए ज्वार की रोटी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। इसमें मौजूद फाइबर और कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है।
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ग्लूटेन-फ्री विकल्प है
ज्वार प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है। इसलिए जिन लोगों को ग्लूटेन से सेंसिटिविटी है या जो ग्लूटेन-फ्री डाइट फॉलो करते हैं, उनके लिए कलबुर्गी रोटी एक अच्छा विकल्प बन सकती है।
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डायबिटिक मरीज भी खा सकते हैं
ज्वार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 62 होता है जो कि लो जीआई कहलाता है। इसका मतलब है कि यह ब्लड में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाने की बजाय धीरे-धीरे प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष:
PM मोदी ने हाल ही में अपने कार्यक्रम मन की बात में कलबुर्गी रोटी का जिक्र किया था। यह रोटी ज्वार के आटे से बनती है और सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है। यह ग्लूटेन फ्री होती है, पाचन के लिए अच्छी होती है और वजन कंट्रोल करने में भी मदद करती है।
FAQ
क्या रोज ज्वार की रोटी खाई जा सकती है?
संतुलित आहार में ज्वार की रोटी रोज खाई जा सकती है। हालांकि, डाइट में अन्य अनाजों को भी शामिल करना चाहिए।ज्वार की तासीर कैसी होती है?
आयुर्वेद के अनुसार ज्वार की तासीर ठंडी मानी जाती है इसलिए गर्मी के मौसम में इसका सेवन किया जाता है।
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Current Version
Jun 09, 2026 17:13 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jun 09, 2026 17:13 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Neha Mohan Sinha