भारत के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपनी पसंद और परंपरा के अनुसार रोटी या चावल का सेवन करते हैं लेकिन आजकल सोशल मीडिया, फिटनेस ट्रेंड्स और वेट लॉस डाइट्स के कारण एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है कि क्या चावल से वजन बढ़ता है? क्या रोटी ज्यादा हेल्दी होती है? जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, चावल और रोटी दोनों ही शरीर को एनर्जी देने वाले कार्बोहाइड्रेट के सोर्स हैं। इनमें से कौन-सा विकल्प बेहतर है, इसका जवाब सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं हो सकता।
रोटी या चावल, सेहत के लिए कौन सा बेहतर है?
डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन के अनुसार, चावल और रोटी दोनों के अपने-अपने न्यूट्रिशन संबंधी फायदे हैं। कौन-सा विकल्प आपके लिए बेहतर रहेगा, यह आपकी उम्र, स्वास्थ्य, फिजिकल एक्टिविटी और मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है। यदि आप वजन घटाना, डायबिटीज कंट्रोल करना या कब्ज जैसी समस्या से बचना चाहते हैं तो रोटी बेहतर है। वहीं यदि आपका डाइजेशन कमजोर है, बीमारी से रिकवरी हो रही है या आपको आसानी से पचने वाला भोजन चाहिए तो चावल बेहतर है। डाइटीशियन अर्चना जैन की सलाह है कि अपनी थाली का आधा हिस्सा हमेशा सब्जियों और सलाद से भरें और अपनी जरूरत के अनुसार रोटी या चावल में बैलेंस बनाएं।
| हेल्थ कंडीशन | रोटी | चावल |
| न्यूट्रिशन और फाइबर | गेहूं और मल्टीग्रेन से बनी रोटी में फाइबर, प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स चावल के मुकाबले बहुत ज्यादा होते हैं। | सफेद चावल में फाइबर कम होता है, ब्राउन राइस में फाइबर ज्यादा होता है। ऐसे में डायबिटीज मरीजों के लिए ब्राउन राइस बेहतर है। |
| वजन घटाना | गेहूं और मल्टीग्रेन से बनी रोटी पेट लंबे समय तक भरा रखती है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। | पोर्शन कंट्रोल बहुत जरूरी है, क्योंकि बहुत ज्यादा सेवन से वजन बढ़ सकता है। |
| डायबिटीज | चोकर युक्त या मल्टीग्रेन रोटी ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती है, ऐसे में डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए ये बेहतर है। | सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, सीमित मात्रा में ब्राउन राइस लें। |
| डाइजेशन | रोटी में फाइबर ज्यादा होने से कब्ज में राहत देती है लेकिन ये पचने में समय लेती है। | सफेद चावल पचने में आसान और पेट के लिए हल्का होता है। |
| संतुष्टि और एनर्जी | मल्टीग्रेन से बनी रोटी शुगर धीरे-धीरे बढ़ाते हैं जिससे एनर्जी लंबे समय तक बनी रहती है। | चावल भले ही तुरंत एनर्जी देता है, लेकिन जल्दी दोबारा भूख लग सकती है। |
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साल 2017 में Inernational Journal of Complementary & Alternative Medicine में प्रकाशित ओपिनियन में बताया गया है कि गेहूं, चावल की तुलना में एक बेहतर विकल्प है। यह धारणा पूरी तरह से गलत है कि गेहूं खाने वाले हर व्यक्ति को 'ग्लूटेन एलर्जी' (gluten allergy) हो जाती है। इस बात को कई क्लीनिकल ट्राइल्स द्वारा साइंटिफिक रूप से गलत साबित किया जा चुका है। डायबिटीज के मरीजों के लिए चावल की जगह गेहूं का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद और सही है। यदि आपको कोई खास समस्या नहीं है, तो बिना किसी अनजाने डर के आप बेझिझक और मजे से गेहूं से बने खान-पान का मजा ले सकते हैं। सेहतमंद रहने के लिए सही जानकारी होना और बिना वजह के भ्रम या डर से दूर रहना ही सबसे जरूरी है।
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डाइटीशियन की सलाह
डाइटीशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन का कहना है कि चाहे आप चावल खाएं या रोटी, मात्रा का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, तली हुई चीजों का ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी और बैलेंस डाइट के साथ दोनों ही विकल्प हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन सकते हैं।
साल 2020 में Preventive Nutrition and Food Science में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मल्टीग्रेन और मिलेट्स जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, जौ और जई से बनी रोटियां स्वास्थ्य का अच्छा विकल्प हैं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) मध्यम होता है और इनमें डाइट्री फाइबर अच्छा मात्रा में पाया जाता है। फाइबर पाचन क्रिया को धीमा करके ग्लूकोज के अवशोषण को कंट्रोल करता है, जिससे खाने के बाद ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ती। साथ ही, इन साबुत अनाजों में मौजूद प्रोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट वजन को बैलेंस रखने, भूख पर कंट्रोल पाने और लिपिड प्रोफाइल में सुधार करने में मदद करते हैं। खासतौर से डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए मल्टीग्रेन रोटियां औषधि की तरह काम करती हैं। संक्षेप में कहें तो, रिफाइंड भोजन को छोड़कर 40-45% मिलेट्स युक्त मल्टीग्रेन रोटियों को अपने डेली रूटीन में शामिल करना केवल एक डाइट में बदलाव नहीं, बल्कि डायबिटीज और मेटाबॉलिक बीमारियों से बचने का एक सरल और असरदार तरीका है।
निष्कर्ष
चावल और रोटी में से कोई भी एक पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं है, दोनों ही बैलेंस डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। डाइटीशियन अर्चना जैन के अनुसार, सही चुनाव आपकी स्वास्थ्य स्थिति, लाइफस्टाइल, पोर्शन साइज और पूरे भोजन की क्वालिटी पर निर्भर करता है। इसलिए किसी एक को पूरी तरह छोड़ने की बजाय बैलेंस मात्रा में और सही संयोजन के साथ इनका सेवन करना ज्यादा फायदेमंद है।
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FAQ
क्या चावल खाने से वजन बढ़ता है?
सिर्फ चावल खाने से वजन नहीं बढ़ता। वजन बढ़ने का मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी है।क्या रात में चावल खाना नुकसानदायक है?
अगर मात्रा कंट्रोल हो और भोजन बैलेंस हो, तो रात में चावल खाना सभी के लिए नुकसानदायक नहीं माना जाता।ब्राउन राइस और सफेद चावल में कौन ज्यादा हेल्दी है?
ब्राउन राइस में फाइबर ज्यादा होता है, इसलिए यह लंबे समय तक पेट भरा रखने और ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
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Jul 22, 2026 18:52 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Archana Jain