Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

दही-चावल है पेट के लिए बेस्ट कंफर्ट फूड, न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट से जानें इससे होने वाले फायदे

दही-चावल आसानी से डाइजेस्‍ट हो जाता है और यह गट हेल्‍थ के ल‍िए एक हेल्‍दी फूड है। दही-चावल की तासीर ठंडी होती है इसल‍िए हार्टबर्न या एस‍िड‍िटी से राहत के ल‍िए यह फायदेमंद है। 

जब भी कंफर्ट फूड की बात आती है, तो हम कभी अपना पसंदीदा बटर च‍िकन या क‍िसी अन्‍य भारी ड‍िश का नाम नहीं लेते। एक ऐसी ड‍ि‍श ज‍िसे खाकर पेट भरे, जो कभी भी खाई जा सकती हो और उसे बार-बार खाने का मन करे, वो हमारी कंंफर्ट ड‍िश कहलाती है। बहुत से लोगों को कंफर्ट ड‍िश के नाम पर दही-चावल का ख्‍याल आता है। वैसे यह एक साउथ इंड‍ियन रेस‍िपी है, लेक‍िन घर-घर में इसे खाने के शौकीन हैं। चल‍िए जानते हैं क‍ि दही-चावल खाने के क्‍या फायदे सेहत को म‍िलते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

पाचन, मेटाबॉल‍िज्‍म, एनर्जी, इम्‍यून‍िटी को मजबूत बनाता है दही-चावल

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कुछ लोगोंं को लगता है क‍ि दही-चावल का सेवन केवल तब क‍िया जाता है, जब पेट खराब होता है, लेक‍िन यह आधा सच है।र‍िकवरी के दौरान भी इसे खाया जाता है और बाक‍ि समय भी इसे खाने से शरीर को कई लाभ म‍िलते हैं, जैसे-

  • ज‍िन लोगों को बार-बार कब्‍ज और एस‍िड‍िटी जैसी समस्‍याएं होती हैं, उन्‍हें दही-चावल का सेवन करना चाह‍िए। दही-चावल की तासीर ठंडी होती है। इसे खाकर पेट को आराम म‍िलता है।
  • दही में मौजूद प्रोबायोट‍िक्‍स गट हेल्‍थ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं और चावल में फाइबर होता है ज‍िसे खाकर पेट भरता है और पाचन समस्‍याओं से बचाव होता है।
  • दही में कैल्‍श‍ियम, प्रोटीन, गुड फैट्स मौजूद होते हैं, इसे खाकर मेटाबॉल‍िज्‍म को सपोर्ट म‍िलता है, इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है और एनर्जी लेवल इंप्रूव होती है।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2025 में Journal Of Neonatal Surgery नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्‍थ के ल‍िए दही का सेवन फायदेमंंद होता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्‍थ का असर इम्‍यून‍िटी, मेंटल हेल्‍थ और एनर्जी लेवल पर भी पड़ता है।

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दही-चावल में क‍ितनी कैलोरी होती है?

100 ग्राम दही-चावल में करीब 150 से 180 कैलोरी हो सकती है। कई लोगों को लगता है क‍ि दही-चावल में कार्ब्स होता है इसल‍िए इसे खाने से वजन बढ़ता है जबक‍ि ऐसा नहीं है। 100 ग्राम दही-चावल में करीब 16 से 18 प्रत‍िशत कार्ब्स होता है। अगर आप सही मात्रा में दही-चावल खाएंगे, तो मेटाबॉल‍िज्‍म को सपोर्ट म‍िलेगा।

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क्‍या रात में दही-चावल खा सकते हैं?

दही-चावल को रात में खाने के बजाय द‍िन में खाना ज्‍यादा फायदेमंंद होता है। दही के कारण कुछ लोगों को इसे रात में खाने से गले में खराश हो सकती है। साथ ही कुछ लोग दही-चावल को रातभर रखकर सुबह खाते हैं, लेक‍िन आपको बता दें क‍ि गर्म मौसम में ऐसा करने से बचना चाहि‍ए क्‍योंक‍ि रातभर में चावल ज्‍यादा फर्मेंट हो जाते हैं और गुड बैक्‍टीर‍िया कम हो सकते हैं। इससे ब्‍लोट‍िंग और एस‍िड‍िटी हो सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

दही-चावल केवल एक कंफर्ट फूड ही नहीं है, बल्‍क‍ि यह सेहत और डाइजेशन के ल‍िए एक बेहतरीन व‍िकल्‍प भी है। इसे खाने से एनर्जी और इम्‍यून‍िटी बेहतर होती है, गट हेल्‍थ को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है, हार्टबर्न और एस‍िड‍िटी जैसी समस्‍याएंं दूर होती हैं। दही-चावल की तासीर ठंडी होती है इसल‍िए गर्म द‍िनोंं में यह पेट को आराम देने के ल‍िए एक बेहतरीन रेस‍िपी है।

FAQ

  • दही-चावल सुबह खाएंं या रात में?

    दही-चावल का सेवन द‍िन के समय करें क्‍योंक‍ि इसकी तासीर ठंडी होती है। हालांक‍ि रात को चावल खाकर अच्‍छी नींद आती है, ले‍क‍िन दही से गले में खराश हो सकती है इसल‍िए इसे द‍िन में खाना बेहतर है। 
  • क्‍या रोज दही-चावल खा सकते हैं?

    दही-चावल का सेवन रोजाना नहीं करना चाह‍िए। इसे हफ्ते में दो से तीन बार खा सकते हैं। खासकर जि‍न लोगों को दही या डेयरी उत्‍पाद आसानी से नहीं पचता उन्‍हें इसे रोज नहीं खाना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 01, 2026 11:08 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 01, 2026 11:08 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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