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आज के समय में डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। असंतुलित लाइफस्टाइल, तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण शरीर इंसुलिन के प्रति कम सेंसिटिव हो जाता है। ऐसे में योग एक नेचुरल, सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है, ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में। कई लोगों का मानना है कि नियमित रूप से योग करने से डायबिटीज के लक्षणों को संतुलित करने में मदद मिल सकती है। बता दें कि, इंसुलिन एक हार्मोन है, जो शरीर में शुगर को एनर्जी में बदलने में मदद करता है। जब शरीर इंसुलिन के प्रति कम सेंसिटिव हो जाता है तो उसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं, जो टाइप–2 डायबिटीज होने का एक बड़ा कारण बनता है। ऐसे में आइए उत्तम नगर में स्थित योग जंक्शन के योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम से जानते हैं कि क्या रोजाना योग करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है या नहीं?
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क्या रोजाना योग करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है?
योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम के अनुसार, नियमित रूप से योग करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार किया जा सकता है और डायबिटीज के जोखिम को भी कम किया जा सकता है, क्योंकि-
1. तनाव कम करके
नियमित रूप से तनाव कम करने के दौरान शरीर में कोर्टिसोल बढ़ता है, जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को कम करने में मदद करता है। योग, प्राणायाम और ध्यान का नियमित अभ्यास तनाव को काफी हद तक कम करने में मदद करता है।
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2. वजन कंट्रोल होता है
मोटापा, खासकर पेट के आसपास की चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ती है। योग करने से धीरे-धीरे लेकिन प्रभावी तरीके से वजन कम करने में मदद मिलती है और फैट बर्न किया जा सकता है, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है।
3. मांसपेशियों को एक्टिव करता है
कई योगासनों का नियमित अभ्यास मांसपेशियों को एक्टिव करने में मदद करते हैं। जब आपकी मांसपेशियां एक्टिव होती है, तो ज्यादा ग्लूकोज का इस्तेमाल करती है, जिससे ब्लड शुगर कम होता है और इंसुलिन के काम में सुधार करता है।
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4. ब्लड फ्लो में सुधार
योग करने से ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, जिससे शरीर के सभी अंग और सेल्स इंसुलिन के प्रति ज्यादा सेंसिटिव बनाते हैं।
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क्या कहती है स्टडी?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की स्टडी के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए रोजाना योग करना फायदेमंद होता है। इस स्टडी में बताया गया है कि रोजाना योग करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। इस स्टडी में पाया गया है कि जिन मरीजों ने 4 महीने तक नियमित योग करने का अभ्यास करने वालों में इंसुलिन रेसिस्टेंस को मापने वाला HOMA-IR इंडेक्स काफी कम हो गया, जिसका सीधा मतलब है कि उनके शरीर ने इंसुलिन का इस्तेमाल पहले से ज्यादा बेहतर तरीके से होना शुरू हो गया है। इसके अलावा, योग चिकित्सा ने उनके ब्लड शुगर के स्तर जैसे फास्टिंग ब्लड शुगर, खाने के बाद शुगर और औसत शुगर को अच्छी तरह से कंट्रोल करने में मदद करता है।
निष्कर्ष
रोजाना योग करने से इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि यह शरीर में हार्मोन संतुलन में मदद करता है, तनाव कम करता है, मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है और मोटापा कम करता है, जो डायबिटीज के जोखिम को कम करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है।
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FAQ
इंसुलिन सेंसिटिविटी कैसे पता करें?
इंसुलिन सेंसिटिविटी का पता लगाने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट करते हैं या एक ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट करवा सकते हैं। इसके अलावा, आप इसके लक्षणों जैसे स्किन के काले धब्बे, थकान, पेट के आसपास फैट का जमा होना और बार-बार प्यास या पेशाब आना जैसे लक्षणों पर भी ध्यान दे सकते हैं।इंसुलिन रेजिस्टेंस का मतलब क्या होता है?
इंसुलिन रेजिस्टेंस का अर्थ है कि आपके शरीर के सेल्स इंसुलिन के प्रति ठीक तरह से रिएक्ट नहीं करती है। इंसुलिन का काम ब्लड शुगर को एनर्जी के लिए सेल्स तक पहुंचाना है, लेकिन रेजिस्टेंस के कारण शरीर का ब्लड शुगर को सामान्य रखने में मुश्किल होती है।इंसुलिन संवेदनशीलता कैसे बढ़ाएं?
इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने के लिए आपको नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए, हेल्दी और संतुलित आहार लें, पर्याप्त मात्रा में नींद पूरी करें और तनाव कम करें।
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Nov 30, 2025 12:07 IST
Published By : Katyayani Tiwari