अगर आपको अक्सर ऐसा महसूस होता है कि दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा, छोटी-छोटी बातें याद नहीं रहतीं, किसी काम पर फोकस करने में मुश्किल होती है या मानसिक रूप से हमेशा थकान महसूस होती है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहा जाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग इन लक्षणों का कारण तनाव, नींद की कमी या ज्यादा काम का दबाव मान लेते हैं। हालांकि, हर बार इसकी वजह केवल मानसिक तनाव नहीं होती। कैलाश हॉस्पिटल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन डॉ. अम्बरीश दीक्षित बताते हैं कि कई बार शरीर में विटामिन B12 की कमी भी ब्रेन फॉग का कारण बन सकती है और अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह नसों को नुकसान पहुंचाने का जोखिम भी बढ़ा सकती है।
डॉ. अम्बरीश दीक्षित के अनुसार, विटामिन B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) के निर्माण, डीएनए बनाने और नसों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर दिमाग और तंत्रिका तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति को ब्रेन फॉग, भूलने की समस्या और हाथ-पैरों में झुनझुनी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
ब्रेन फॉग को कैसे पहचानें?
डॉ. अम्बरीश दीक्षित बताते हैं कि ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं, बल्कि कई हेल्थ कंडीशंस का एक लक्षण है। इसमें व्यक्ति को सोचने में सुस्ती, फोकस की कमी, याददाश्त कमजोर लगना, सही शब्द याद न आना, मानसिक थकान और निर्णय यानी डिसीजन लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है। यदि ये समस्याएं लगातार बनी रहें और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगें, तो केवल तनाव मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
इसे भी पढ़ें: कुछ महिलाओं को पीरियड्स से पहले ब्रेन फॉग क्यों होता है? डॉक्टर से जानें कारण
विटामिन B12 की कमी से नसों को नुकसान
डॉ. अम्बरीश दीक्षित बताते हैं कि विटामिन B12 नसों के चारों ओर मौजूद मायलिन शीथ (Myelin Sheath) को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है। यही परत नसों के माध्यम से संदेशों के सही संचार के लिए जरूरी होती है। जब शरीर में लंबे समय तक B12 की कमी बनी रहती है, तो यह प्रोटेक्टिव लेयर प्रभावित होने लगती है। इससे हाथ-पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन, बैलेंस बिगड़ना, कमजोरी और मेंटल फंक्शन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह नुकसान स्थायी भी हो सकता है यदि समय पर इलाज न मिले।
किन लोगों में विटामिन B12 की कमी का खतरा होता है?
डॉ. अम्बरीश दीक्षित के अनुसार, पूरी तरह वेजिटेरियन लोग, बुजुर्ग, पेट या आंतों की बीमारी से पीड़ित मरीज, लंबे समय तक एसिडिटी की दवाएं लेने वाले लोग और कुछ खास दवाओं का सेवन करने वाले व्यक्तियों में विटामिन B12 की कमी होने की संभावना ज्यादा रहती है। इसके अलावा जिन लोगों का भोजन बैलेंस नहीं होता या पोषक तत्वों की कमी रहती है, उनमें भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।
इसे भी पढ़ें: कुछ लोगों को खाना खाने के बाद ब्रेन फॉग क्यों होता है? समझें एक्सपर्ट से

साल 2020 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, विटामिन B12 की कमी और तेजी से बढ़ती मानसिक कमजोरी के बीच एक सीधा संबंध पाया गया है। हालांकि, बड़े पैमाने पर इसकी पुष्टि करने के लिए और ज्यादा रिसर्च की जरूरत है, ताकि यह साफ हो सके कि B12 का लेवल सुधारने से क्या सच में दिमागी कमजोरी को रोका जा सकता है।
ब्रेन फॉग से राहत के लिए क्या करें?
यदि लगातार ब्रेन फॉग, भूलने की समस्या या नसों से जुड़े लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेकर विटामिन B12 की जांच करानी चाहिए। जांच के बाद जरूरत पड़ने पर डॉक्टर सप्लीमेंट या इंजेक्शन की सलाह दे सकते हैं। साथ ही बैलेंस डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित एक्सरसाइज, तनाव कम करना और पर्याप्त पानी पीना भी मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है। बिना जांच के खुद से सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।
निष्कर्ष
ब्रेन फॉग को केवल तनाव या थकान का रिजल्ट मानना हमेशा सही नहीं होता। यदि इसके साथ भूलने की समस्या, हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो यह विटामिन B12 की कमी का संकेत हो सकता है। समय रहते सही जांच और इलाज से नसों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय एक्सपर्ट से सलाह लेना सबसे सुरक्षित है।
All Image Credit- magnific
FAQ
विटामिन B12 की कमी के लक्षण क्या हैं?
विटामिन B12 की कमी होने पर ज्यादा थकान, कमजोरी, ब्रेन फॉग, भूलने की आदत, हाथ-पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन और बैलेंस बिगड़ने जैसे लक्षण हो सकते हैं।कैसे पता चलेगा कि शरीर में विटामिन B12 की कमी है?
डॉक्टर लक्षणों को चेक करने के बाद ब्लड टेस्ट के जरिए विटामिन B12 का लेवल जांचने की सलाह दे सकते हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 21, 2026 18:42 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Ambrish Dixit