Sun Sep 13, 2026 | 02:38 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

कम नींद के बाद दिमाग सुस्त क्यों लगता है? जानें इसका याददाश्त और एकाग्रता पर असर

भागदौड़ भरी जिंदगी, देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल, काम का दबाव और तनाव के कारण आजकल बहुत से लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं। यहां जानिए, नींद की कमी का याददाश्त, फोकस और निर्णय लेने की क्षमता पर क्या असर पड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

क्या आपने कभी महसूस किया है कि रात में ठीक से नींद न आने के बाद अगली सुबह दिमाग भारी-भारी लगता है, फोकस करने में मुश्किल होती है और छोटी-छोटी बातें भी याद नहीं रहतीं? कई लोग इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, कम या खराब क्वालिटी वाली नींद का असर सीधे हमारे दिमाग के फंक्शन पर पड़ता है। यही कारण है कि पर्याप्त नींद न मिलने पर व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है जैसे उसका दिमाग नॉर्मल स्पीड से काम नहीं कर रहा हो।

कम नींद के बाद दिमाग सुस्त क्यों लगता है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, अच्छी और पर्याप्त नींद के दौरान दिमाग दिनभर मिली जानकारियों को व्यवस्थित करता है, नई मैमोरी को मजबूत बनाता है और खुद को अगले दिन के लिए तैयार करता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो ये प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं, जिसका असर याददाश्त, फोकस और निर्णय लेने की क्षमता पर दिखाई देने लगता है।

  • डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी बताते हैं कि सोते समय दिमाग दिनभर सीखी गई जानकारियों को शॉर्ट-टर्म मेमोरी से लॉन्ग-टर्म मेमोरी में व्यवस्थित करने का काम करता है।
  • यदि नींद पर्याप्त नहीं मिलती, तो यह प्रक्रिया पूरी तरह नहीं हो पाती। इसका रिजल्ट यह होता है कि नई जानकारी याद रखने में कठिनाई होती है और पहले से सीखी गई बातें भी आसानी से भूलने लगते हैं।
  • यही कारण है कि परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों, लंबे समय तक मानसिक काम करने वाले लोगों या नई चीजें सीखने वाले लोगों के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी माना जाता है। लगातार नींद की कमी रहने पर सीखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

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नींद की कमी का फोकस और सोचने की क्षमता पर असर

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि पर्याप्त नींद न लेने से दिमाग का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो ध्यान, प्लानिंग करने, समस्या का समाधान करने और सही निर्णय लेने में मदद करता है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, कम नींद के बाद व्यक्ति का ध्यान जल्दी भटकता है, काम में गलतियां बढ़ जाती हैं और रिएक्शन देने की स्पीड भी धीमी हो सकती है। इसके अलावा वाहन चलाने, मशीनों पर काम करने या ऐसे कार्य जिनमें लगातार सतर्क रहने की जरूरत होती है, उनमें दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। लंबे समय तक नींद की कमी मेंटल फंक्शन और प्रोडक्टिविटी दोनों को प्रभावित कर सकती है।

why brain feel slow after poor sleep

साल 2023 में NeuroSciences Journal में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, नींद हमारे शरीर के लिए एक बेहद जरूरी है, जो हमें तरोताजा रखने का काम करती है। आज के समय में नींद की कमी (sleep deprivation) एक आम समस्या बन चुकी है, जिसका सीधा और बुरा असर हमारे दिमाग के फंक्शन पर पड़ता है। जब हम पूरी नींद नहीं लेते, तो हमारे सोचने-समझने की शक्ति, ध्यान लगाने की क्षमता, याददाश्त और सही फैसले लेने की योग्यता कम हो जाती है। संक्षेप में कहें, तो अधूरी नींद हमारे पूरे मानसिक स्वास्थ्य यानी मेंटल हेल्थ और डेली परफॉर्मेंस को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

दिमाग को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?

डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी सलाह देते हैं कि वयस्कों को नियमित रूप से 7 से 9 घंटे की अच्छी क्वालिटी वाली नींद लेने का प्रयास करना चाहिए। रोजाना एक ही समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। कैफीन और भारी भोजन को देर रात लेने से बचें तथा नियमित एक्सरसाइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें। यदि पर्याप्त समय सोने के बावजूद दिनभर ज्यादा नींद आना, खर्राटे, बार-बार नींद टूटना या लगातार याददाश्त और फोकस की समस्या बनी रहती है, तो न्यूरोलॉजिस्ट या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लेना चाहिए।

निष्कर्ष

कम नींद के बाद दिमाग का सुस्त महसूस करना केवल थकान का संकेत नहीं, बल्कि दिमाग की नॉर्मल फंक्शन पर पड़ने वाले प्रभाव का रिजल्ट हो सकता है। डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, पर्याप्त और अच्छी क्वालिटी वाली नींद याददाश्त, फोकस, सीखने की क्षमता और सही निर्णय लेने के लिए बेहद जरूरी है। यदि नींद की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या इसके कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय एक्सपर्ट से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।

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FAQ

  • वयस्कों को कितनी नींद लेनी चाहिए?

    हेल्दी वयस्कों को प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लेने की सलाह दी जाती है।
  • रात को सोते समय मोबाइल चलाने से क्या होता है?

    सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या अन्य स्क्रीन का उपयोग करने से नींद आने में देरी हो सकती है और नींद की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।
  • अच्छी नींद के लिए क्या करना चाहिए?

    रोज एक ही समय पर सोएं और उठें, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें, कैफीन का सीमित सेवन करें, नियमित एक्सरसाइज करें और शांत वातावरण में सोएं।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 29, 2026 21:35 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti

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