रात का समय शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए होता है, लेकिन कई लोगों के लिए यह सुकून का नहीं बल्कि अनजाने तनाव का समय बन जाता है। आप बिस्तर पर लेटे होते हैं, आंखें बंद होती हैं, लेकिन दिमाग चलता रहता है। कभी ऑफिस की डेडलाइन, कभी रिश्तों की उलझनें, तो कभी भविष्य की चिंता, यही बेचैन सोच नींद में भी पीछा नहीं छोड़ती। इसी मानसिक उथल-पुथल का एक छुपा हुआ संकेत है नींद में दांत पीसना, जिसे मेडिकल भाषा में ब्रुक्सिज्म कहा जाता है। अक्सर लोग इसे मामूली आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इस लेख में माइंडवेल काउंसिल की संस्थापक, काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल (Archana Singhal, Counsellor & Family Therapist and Founder of Mindwell Counsel) से जानिए, नींद में दांत पीसना कहीं मानसिक समस्या तो नहीं?
नींद में दांत पीसना कहीं मानसिक समस्या तो नहीं? - What are the psychological causes of bruxism
काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल कहती हैं कि नींद में दांत पीसने का सबसे बड़ा कारण तनाव (Stress) और चिंता (Anxiety) है। जब व्यक्ति दिनभर मानसिक दबाव में रहता है और अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, तो वही दबाव नींद के दौरान शरीर के जरिए बाहर निकलने लगता है। दांत पीसना दरअसल मन की बेचैनी का शारीरिक रूप होता है। जिन लोगों का दिमाग बहुत ज्यादा एक्टिव रहता है और जो सोते समय भी समस्याओं के बारे में सोचते रहते हैं, उनमें ब्रुक्सिज्म की समस्या ज्यादा देखी जाती है।
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1. दिमाग का ओवरएक्टिव रहना
नींद के दौरान हमारा दिमाग शांत होने की कोशिश करता है, लेकिन जब मानसिक थकान बहुत ज्यादा हो या अधूरी चिंताएं दिमाग में घूम रही हों, तो दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता। आर्चना सिंघल के मुताबिक, ऐसे में दिमाग नींद में भी एक्टिव रहता है और उसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है, खासकर जबड़े की मांसपेशियों पर। यही वजह है कि व्यक्ति अनजाने में दांत पीसने लगता है। यह संकेत है कि मन को आराम नहीं मिल पा रहा है।
2. दबी हुई भावनाएं
जो लोग अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, गुस्सा, डर या दुख को भीतर ही दबाकर रखते हैं, उनमें भी ब्रुक्सिज्म की संभावना अधिक होती है। काउंसलर अर्चना सिंघल बताती हैं कि जब भावनाएं बाहर नहीं निकल पातीं, तो शरीर उन्हें किसी न किसी रूप में बाहर निकालने की कोशिश करता है। नींद में दांत पीसना इसी का एक संकेत हो सकता है। यह एक तरह का अनकॉन्शस रिलीज मैकेनिज्म है, जिसमें शरीर मन के दबाव को कम करने की कोशिश करता है।
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एक्सपर्ट की सलाह
काउंसलर और फैमिली थेरेपिस्ट अर्चना सिंघल कहती हैं कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से नींद में दांत पीस रहा है, तो इसे केवल डेंटल इश्यू मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक जरूरी संकेत हो सकता है। समय रहते काउंसलिंग, स्ट्रेस मैनेजमेंट, रिलैक्सेशन टेक्नीक्स और इमोशनल हीलिंग पर काम करना जरूरी है। जब मन को शांति मिलती है, तो शरीर भी अपने आप रिलैक्स होने लगता है और दांत पीसने की समस्या धीरे-धीरे कम हो सकती है।
निष्कर्ष
नींद में दांत पीसना आपके मन की अनकही भाषा हो सकता है। यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं मानसिक दबाव, चिंता या भावनात्मक बोझ है, जिसे समझना और सुलझाना जरूरी है। समय पर ध्यान देने से न सिर्फ दांतों को नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी बेहतर किया जा सकता है।
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FAQ
मानसिक तनाव के क्या लक्षण हैं?
लगातार बेचैनी, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, थकान, ध्यान न लगना, नकारात्मक सोच और शारीरिक लक्षण जैसे सिरदर्द या पेट की समस्याएं मानसिक तनाव के संकेत हो सकते हैं।मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए क्या करना चाहिए?
नियमित डेली रूटीन, पर्याप्त नींद, बैलेंस डाइट, एक्सरसाइज, खुलकर बात करना, स्क्रीन टाइम कम करना और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की मदद लेना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखता है।क्या नींद की कमी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है?
हां, पूरी नींद न मिलना मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है, इससे तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन का जोखिम बढ़ सकता है।
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Current Version
Jan 14, 2026 18:14 IST
Modified By : Anurag Gupta Jan 14, 2026 18:14 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Archana Singhal