महिलाओं के जीवन में हार्मोन उतार-चढ़ाव कई कारणों से होते हैं। ऐसा मुख्य रूप से पीरियड्स की वजह से होता है। जैसे अगर पीरियड्स अनियमित हैं, तो हार्मोन में बदलाव होने लगता है। बहरहाल, क्या आप जानते हैं कि हार्मोनल बदलाव का महिलाओं की पाचन क्षमता पर भी असर पड़ता सकता है? दरअसल, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महिला हार्मोन न केवल प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करते हैं, बल्कि आंत के काम करने के तरीके को भी गहराई से प्रभावित करते हैं। सवाल है, कैसे? जानना है, तो पूरा लेख पढ़िए। इस बारे में हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।
हार्मोनल उतार-चढ़ाव का सीधा असर उनके पाचन तंत्र पर कैसे पड़ता है?
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जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि हार्मोनल बदलाव का महिला की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है, साथ ही यह आंत को भी प्रभावित करता है-
धीमी पाचन क्षमता
डॉ. शोभा गुप्ता के मुताबिक मासिक धर्म चक्र के दूसरे भाग में और गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे आंतों की गति धीमी हो जाती है। इसी वजह से आंतों में भोजन अधिक समय तक रुका रहता है, जो कि महिलाओं में कब्ज का कारण बनता है।
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ब्लोटिंग और गैस की समस्या
विशेषज्ञ के अनुसार एस्ट्रोजन हार्मोन शरीर में फ्लूइड रिटेंशन (पानी का जमा होना) को प्रभावित करता है। मेनोपॉज की अवस्था में महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में तेजी से बदलाव आने लगता है। इस स्थिति में आंत में गैस और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है। नतीजतन, महिलाओं को ब्लोटिंग और गैस की समस्या होने लगती है। कुछ महिलाओं को इस अवस्था में पेट में दर्द या जकड़न जैसा महसूस हो सकता है।
गट माइक्रोबायोम पर असर
हार्मोन सीधा-सीधा हमारे आंतों के अच्छे और बुरे बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ देता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आने से आंतों की सुरक्षात्मक परत कमजोर हो सकती है, जिससे लीकी गट या हल्की सूजन जैसी समस्याएं हो जाती हैं। यही कारण है कि पीरियड्स के दिनों में कई महिलाओं को दस्त या पेट में मरोड़ का सामना करना पड़ता है।
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निष्कर्ष
कुल मिलाकर, कहने की बात यह है कि महिलाओं की आंत और हार्मोन का एक-दूसरे से गहरा संबंध है। विशेषकर, पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज में हार्मोनल बदलाव के कारण उन्हें आंतों से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि इस स्थिति को मैनेज नहीं किया जा सकता है। सही खानपान, स्ट्रेस मैनेजमेंट और प्रोबायोटिक्स के सेवन से इन हार्मोनल प्रभावों को मैनेज किया जा सकता है।
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FAQ
पीरियड्स के दौरान दस्त या कब्ज क्यों होती है?
पीरियड्स से ठीक पहले प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है, जिससे आंतों में मरोड़ होने लगती है, जो कि दस्त आदि का कारण बनता है।क्या हार्मोनल असंतुलन से आईबीएस के लक्षण बिगड़ सकते हैं?
हां, जिन महिलाओं को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम है, उनमें हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण पेट दर्द और गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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Jun 30, 2026 17:46 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 30, 2026 17:46 IST
Modified By : Meera TagoreJun 30, 2026 17:46 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta