40 की उम्र पार करते ही महिलाओं के शरीर में कई तरह के अंदरूनी और हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं। इस समय महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे जरूरी हार्मोन्स के लेवल में असंतुलन होना काफी आम हो जाता है। इन हार्मोन्स का असंतुलन सीधे तौर पर महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसके कारण महिलाओं को अक्सर वजन बढ़ने, मूड स्विंग्स, थकान और नींद न आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आइए Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से जानते हैं कि 40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कौन-कौन से हार्मोनल बदलाव होते हैं और इनका उनकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
साल 2017 में The Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते महिलाओं में नेचुरल प्रजनन दर काफी कम हो जाती है और ज्यादातर महिलाएं कंसीव नहीं कर पाती हैं। 40 के दशक के मध्य से अंत तक, इनफर्टिलिटी का कारण एनोव्यूलेशन (अंडा न निकलना) या लुटियल की कमी हो सकती है। इस उम्र की महिलाओं में फॉलिकुलर फेज (follicular phase) के हार्मोन मेंबदलाव और असामान्य हार्मोन पैटर्न आम हो जाते हैं।
40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कौन से हार्मोन बदलते हैं?
Dr.(Prof.) Anju Suryapani ने बताया कि 40 की उम्र के बाद महिलाओं की ओवरी धीरे-धीरे अंडे बनाना कम कर देती हैं। इस वजह से कुछ हार्मोन्स में बड़े उतार-चढ़ाव आते हैं, जैसे-
1. एस्ट्रोजन
एस्ट्रोजन महिला के शरीर का सबसे जरूरी हार्मोन होता है, जो न सिर्फ पीरियड्स और फर्टिलिटी को कंट्रोल करता है, बल्कि दिल, हड्डियों, स्किन और दिमाग की सुरक्षा भी करता है। 40 के बाद महिलाओं में इसका लेवल कभी अचानक बहुत बढ़ जाता है तो कभी बहुत कम हो जाता है।
2. प्रोजेस्टेरोन
यह हार्मोन पीरियड साइकलि को नियमित रखता है और दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। 40 की उम्र के बाद महिलाओं में इसका लेवल सबसे पहले और तेजी से कम होता है।
3. थायराइड हार्मोन
40 की उम्र के बाद महिलाओं में थायराइड की समस्या, खासकर हाइपोथायराइडिज्म होने का जोखिम भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
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हार्मोनल बदलावों का महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि जब शरीर में इन हार्मोन्स का संतुलित बिगड़ता है तो शरीर सिर से लेकर पैर तक कई तरह के संकेत देने लगता है।
1. पीरियड्स में अनियमिता
हार्मोन के उतार-चढ़ाव का सबसे पहला असर पीरियड्स पर दिखता है। किसी महीने पीरियड्स बहुत जल्दी आ जाते हैं तो कभी 2-3 महीने तक नहीं आते हैं। फ्लो कभी बहुत ज्यादा हो सकता है तो कभी बहुत कम। साल 2023 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का लेवल बदल जाता है, जिससे उनके पीरियड साइकिल अनियमित होते हैं।
2. हॉट फ्लैशेज और नाइट स्वेट्स
एस्ट्रोजन का लेवल गिरने से दिमाग का तापमान कंट्रोल करने वाला हिस्सा कंफ्यूज हो जाता है। इसके कारण अचानक से सीने, चेहरे औ गर्दन में तेजी गर्मी का अहसा होता है, पसीना आता है और फिर अचनाक ठंड लगने लगती है।
साल 2014 में The Journal of Steroid Biochemistry and Molecular Biology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, हॉट फ्लैशेज शरीर के तापमान को कंट्रोल करने वाले थर्मोन्यूट्रल जोन के सिकुड़ने और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन की कमी के कारण होता है।
3. वजन बढ़ना और बेली फैट
40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने के कारण मेटाबॉलिज्म धीमा होने और एस्ट्रोजन की कमी होने के कारण शरीर फैट को जांघों के स्थान पर पेट के आसपास जमा करने लगता है। इस स्थिति को पेरीमेनोपॉजल बेली फैट कहा जाता है।
4. मून स्विंग्स, एंग्जायटी और डिप्रेशन
प्रोजेस्टेरोन और सेरोटोनिन का लेवल कम होने से बिना किसी बात के गुस्सा आना, ज्यादा चिड़चिड़ापन, उदासी या एंग्जायटी महसूस होना आम बात है। साल 2023 में Women Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव उनकी मानसिक स्थिति और मूड पर गहरा असर डालते हैं। इसके कारण डिप्रेशन, PMDD, PTSD और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्याओं के लक्षणों को प्रभावित कर सकता है।

5. हड्डियों का कमजोर होना
40 की उम्र के बाद महिलाओं में जैसे ही एस्ट्रोजन कम होने लगता है, हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और खोखली होने लगती हैं। साल 2022 में International Journal of Molecular Sciences में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, हड्डियों में पाए जाने वाले एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स हड्डियों की सुरक्षा करते हैं। ऐसे में महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होने पर शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व बढ़ जाते हैं और हड्डियों के टूटने की गति तेज हो जाती है, जिसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
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40 के बाद हार्मोनल संतुलन के लिए टिप्स
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि महिलाएं अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में इन बदलावों को करने से हार्मोन्स को संतुलित कर सकती हैं।
- अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, रागी और तिल जैसे कैल्शियम और विटामिन डी3 से भरपूर फूड्स शामिल कर सकती हैं।
- विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए सुबह 15 से 20 मिनट की हल्की धूप लें, ताकि हड्डियां मजबूत रहें।
- सिर्फ वॉक करना काफी नहीं है, बल्कि हफ्ते में 3 से 4 दिन हल्का वजन उठाएं या बॉडीवेट एक्सरसाइज करें। इससे मेटाबॉलिज्म तेज होगा और बेली फैट कम होगा।
- अलसी के बीज, सोयाबीन और चने में नेचुरल प्लांट एस्ट्रोजन होते हैं, जो शरीर में इसे ज्यादा गिरने से रोकता है।
- योग, प्राणायाम और मेडिटेशन करने से कॉर्टिसोल हार्मोन को कम करने में मदद मिलती है, जिससे मूड स्विंग्स और हॉट फ्लैशेज से राहत मिल सकती है।
- 40 की उम्र के बाद साल में एक बार अपने पूरी शरीर की जांच करवाएं।
निष्कर्ष
Dr.(Prof.) Anju Suryapani के अनुसार 40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होना एक आम प्रक्रिया है। यह इस बात का संकेत है कि अब आपको अपने शरीर और सेहत का ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। सही पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधियां और पॉजिटिव रहकर आप इस समय होने वाली शारीरिक और मानसिक समस्याओं को आसानी से पार कर सकती हैं।
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FAQ
हार्मोनल असंतुलन के मुख्य कारण क्या हैं?
हार्मोनल असंतुलन के पीछे कई कारण हैं, जिसमें तनाव, खराब खानपान और नींद की कमी शामिल हैं।महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के क्या लक्षण हैं?
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन होने पर अनियमित पीरियड्स, लगातार थकान और अचानक वजन बढ़ना जैसे लक्षण शामिल हैं।
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Jul 29, 2026 14:17 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani