Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Rhitika Sharma , Nutrition and Dietetics

40 की उम्र के बाद महिलाओं को किन पोषक तत्वों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है? एक्सपर्ट्स से जानें

40 की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी डाइट के प्रति सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इस दौरान महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो सीधे हार्ट हेल्थ, हड्डियों और मेंटल हेल्थ पर असर डाल सकते हैं। इस लेख में आयुर्वेदिक और डाइटिशिन दोनों ने डाइट के बारे में विस्तार से बताया है।  

महिलाओं में 40 साल की उम्र के बाद फिजिकल और मेंटल बदलाव होते हैं, जिसका असर पूरी सेहत पर दिखता है। ऐसे में महिलाओं को अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। डाइट में वे सभी जरूरी पोषक तत्व होने चाहिए, जो बढ़ती उम्र के साथ होने वाले बदलावों को भी संतुलित रख सके। ऐसे में सवाल उठता है कि महिलाओं को डाइट में कौन से पोषक तत्वों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? यह जानने के लिए हमने Ms. Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant) और Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। Dr. Chetan Sharma बताया कि आयुर्वेद के अनुसार, 40 साल के बाद शरीर में वात दोष बढ़ने लगता है, जिससे जोड़ों में दर्द, स्किन में रूखापन, अनिद्रा, कब्ज और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए इस उम्र में भोजन ऐसा होना चाहिए जो शरीर के डाइजेशन और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखें।

महिलाओं को किन पोषक तत्वों की जरूरत होती है?

Ms. Rhitika Sharma कहती हैं, “40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को अपनी डाइट में जरूरी न्यूट्रिएंट्स जरूर रखने चाहिए, ताकि शरीर बेहतर तरीके से काम कर सके।"

कैल्शियम

Senior Dietitian Rhitika Sharma के मुताबिक, “40 की उम्र के बाद महिलाओं में बोन मिनरल डेंसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है। मेनोपॉज के बाद तो यह प्रक्रिया बहुत तेज हो सकती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए रोजाना पर्याप्त मात्रआ में कैल्शियम लेना बहुत जरूरी है। कैल्शियम के लिए दूध, दही, पनीर, रागी, तिल, सोया और हरी पत्तेदार सब्जियां ली जा सकती है। कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।”

The American Journal of Clinical Nutrition के मुताबिक, जो महिलाएं अपने भोजन में सबसे ज्यादा मात्रा में कैल्शियम लेती थीं, उनमें सबसे कम कैल्शियम लेने वाली महिलाओं के मुकाबले में अर्ली मेनोपॉज का खतरा 13 फीसदी कम देखा गया है।

विटामिन D

Rhitika Sharma कहती हैं, “अगर शरीर में विटामिन D की कमी है, तो कैल्शियम का पूरा फायदा नहीं मिल पाता। इसलिए महिलाओं को 40 साल की उम्र के बाद सुबह की हल्की धूप, अंडे की जर्दी, मशरूम, फैट वाली मछली और फोर्टिफाइड दूध लेना चाहिए। अगर विटामिन D की ज्यादा ही कमी हो, तो जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की सलाह पर सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं।”

diet of 40's women

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प्रोटीन

Mayo Clinic के अनुसार, जैसे-जैसे 40 से 50 के बीच पहुंचती है, शररीर में सार्कोपेनिया का प्रोसेस शुरू हो जाता है । इसका मतलब है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर का मसल मास धीरे-धीरे कम होने लगता है। अगर मांसपेशियों के इस नुकसान को बचाना है, तो रोजाना अपने शरीर के वजन के अनुसार करीब एक से 1.2 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। शाकाहारी महिलाएं प्रोटीन को पूरा करने के लिए दालें, छोले, पनीर, टोफू, सोयाबीन, दूध, दही, और नट्स (जैसे बादाम व अखरोट ले सकती हैं। मांसाहारी स्त्रोत में अंडे, चिकन और मछली ले सकती हैं।

आयरन

Rhitika Sharma ने कहा कि हालांकि, मेनोपॉज के बाद आयरन की जरूरत पहले के मुकाबले कम हो सकती है, लेकिन अगर महिलाओं में पहले से आयरन की कमी है, तो उन्हें लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आना और एनीमिया की शिकायत हो सकती है। ऐसे में महिलाओं को पालक, चुकंदर, गुड़, किशमिश, दालें और हरी सब्जियां अपनी डाइट में शामिल करनी चाहिए। अगर इसके साथ विटामिन C युक्त चीजें भी ली जाए, तो अवशोषण बेहतर होता है।

विटामिन C और कोलेजन

NIH में प्रकाशित जर्नल में बताया गया है कि विमेंस एंटीऑक्सीडेंट कार्डियोवैस्कुलर स्टडी में 40 साल या उससे ज्यादा उम्र की 8,171 महिलाओं को करीब 9.4 साल तक रोजाना 500 मिलीग्राम विटामिन C दिया गया। इन महिलाओं को पहले से ही हार्ट डिजीज की हिस्ट्री थी। लगातार 9.4 साल तक विटामिन C देने से इन महिलाओं में हार्ट से जुड़ी बीमारियों से जुड़ी घटनाओं पर इसका कोई असर नहीं देखा गया।

इस बारे में Senior Dietitian Rhitika Sharma ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में नेचुरली कोलेजन बनना कम होने लगता है। इसका असर स्किन, जोड़ों और हड्डियों पर दिखने लगता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेकर महिलाएं कोलेजन से जुड़े सप्लीमेंट्स ले सकती है और विटामिन C के लिए आंवला, अमरूद, संतरा, नींबू, टमाटर और शिमला मिर्च डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

विटामिन B12 और फोलेट

Rhitika Sharma कहती हैं, “बढ़ती उम्र के साथ शरीर में विटामिन B12 का अवशोषण कम हो सकता है। इसकी कमी से हाथ-पैरों में झुनझुनी, याददाश्त कमजोर होना, थकान और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में महिलाओं को अपनी डाइट में दूध, दही, अंडे, मछली, चिकन और फोर्टिफाइड अनाज शामिल करना चाहिए। वहीं फोलेट के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और फल फायदेमंद होते हैं।”

ओमेगा-3 फैटी एसिड

Rhitika Sharma ने कहा कि कई महिलाओं में 40 की उम्र के बाद मेनोपॉज होने की संभावना बढ़ सकती है और मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज होने का खतरा भी बढ़ने लगता है। हार्ट डिजीज से बचाव के लिए महिलाओं को ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करने चाहिए। यह शरीर में सूजन कम करने, हार्ट को बेहतर बनाने और दिमाग के बेहतर कामकाज में मदद कर सकता है। अखरोट, अलसी के बीज, चिया सीड्स और वसायुक्त मछलियां इसके अच्छे स्रोत हैं।

फाइबर

Rhitika Sharma ने मुताबिक, “40 साल के बाद महिलाओं में कब्ज, पेट फूलना और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसी कंडीशन में फाइबर से भरपूर भोजन डाइजेशन को बेहतर बनाता है और इससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। महिलाएं अपनी डाइट में रोजाना साबुत अनाज, ओट्स, दालें, फल, सब्जियां और सलाद शामिल कर सकती है।”

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आयुर्वेद में डाइट का महत्व

Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “ आयुर्वेद में 40 की उम्र के बाद रसायन चिकित्सा का खास महत्व होता है। इसमें सिर्फ बीमारी का इलाज करना नहीं होता, बल्कि शरीर की धातुओं का पोषण करना, ऊर्जा बनाए रखना और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को संतुलित करना है। शतावरी, अश्वगंधा, आंवला, गिलोय और घृत आधारित रसायनों का उल्लेख आयुर्वेद में मिलता है। लेकिन इनका सेवन स्वयं करने के बजाय आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह पर ही करना चाहिए। अच्छी डाइट के अलावा, महिलाओं को रोजाना पर्याप्त नींद, समय पर भोजन करना, रेगुलर योग और एक्सरसाइज करना, स्ट्रेस कम लेना और मौसम के अनुसार दिनचर्या अपनानी चाहिए।”

निष्कर्ष
Dr. Chetan Sharma कहते हैं कि 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर की जरूरतों को समझना चाहिए और इसी के हिसाब से अपने खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए। सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और समय पर चेकअप कराने से महिलाएं बेहतर जीवन बिता सकती है।

FAQ

  • जोड़ों के ग्रीस को बनाए रखने के लिए कौन सा विटामिन जरूरी है?

    ज्यादातर महिलाएं सिर्फ कैल्शियम और विटामिन डी लेती हैं, लेकिन विटामिन के2 के बिना कैल्शियम हड्डियों के बजाय धमनियों में जमा हो सकता है, जिससे हार्ट ब्लॉकेज का खतरा रहता है। विटामिन के2 यह सुनिश्चित करता है कि कैल्शियम खून से निकलकर सीधे हड्डियों और जोड़ों के कार्टिलेज तक पहुंचे। यह फर्मेंटेड फूड्स (जैसे पनीर) और हरी पत्तेदार सब्जियों में मिलता है।
  • बार-बार यूरिन इंफेक्शन से बचने के लिए 40 के बाद क्या लें?

    40 की उम्र के बाद पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर होने और वैजाइनल ड्राईनेस के कारण महिलाओं में यूटीआई का खतरा बहुत बढ़ जाता है। क्रेनबेरी, ब्लूबेरी और खट्टे फलों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स यूरिनरी ट्रैक की दीवारों पर बैक्टीरिया को चिपकने से रोकते हैं और बार-बार होने वाले इंफेक्शन से बचाते हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 13, 2026 17:29 IST

    Published By : Aneesh Rawat
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