Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

PCOS को एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स कैसे प्रभावित करते हैं? जानें डॉक्टर से

PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का का असंतुलन होने पर वजन बढ़ने और चेहरे पर अनचाहे बाल जैसी कई समस्याएं होने लगती हैं। जानें PCOS में इन हार्मोन्स की क्या भूमिका है और स्वास्थ्य पर इनका क्या  प्रभाव पड़ता है?

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जब PCOS की बात आती है, तो अक्सर हम बढ़ते वजन और चेहरे पर बढ़ रहे कील-मुंहासों के बारे सोचने लगते हैं, लेकिन यह हार्मोन्स से जुड़ी गंभीर समस्या है। PCOS में हार्मोन्स का असंतुलन बढ़ जाता है। महिलाओं के मासिक चक्र के लिए एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों महत्वपूर्ण हार्मोन हैं। PCOS की स्थिति में, इन दोनों हार्मोन्स का आपसी तालमेल बिगड़ जाता है, जिससे न केवल पीरियड्स अनियमित होते हैं, बल्कि प्रजनन क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है।  जानें कैसे इन हार्मोन्स की घटती-बढ़ती मात्रा आपके शरीर को प्रभावित करती है और इस 'हार्मोनल रोलरकोस्टर' को संतुलित करना क्यों जरूरी है? इस लेख में दिए गए सभी वैज्ञानिक तथ्यों को डॉ. शोभा गुप्ता ने रिव्यू किया है।

PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का क्या रोल है?

Estrogen and Progesterone Hormones in PCOS 02 (4)

PCOS शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है। इसकी वजह से एनोव्यूलेशन (अंडे का रिलीज न होना) के कारण प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है और एस्ट्रोजन अनियंत्रित हो जाता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं को नियमित रूप से पीरियड्स नहीं होते हैं, गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है और उनके शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन भी बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप उन्हें कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे चेहरे पर अनचाहे बाल उग आना, मुंहासे होना। 2024 में Frontiers in Cell and Developmental Biology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, PCOS एक एंडोक्राइन और प्रजनन संबंधी समस्या है। साथ ही यह एक मेटाबॉलिक डिसफंक्शन भी है। इसमें हाइपरएंड्रोजेनिज्म (पुरुष हार्मोन्स का अधिक होना) की अधिकता हो जाती है। एस्ट्रोजन और ईआर (ERs - एस्ट्रोजन रिसेप्टर्स) स्टेरॉयडोजेनेसिस (हार्मोन बनने की प्रक्रिया) के संतुलन को नियंत्रित करते हैं और PCOS के विकसित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 PCOS में एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन की भूमिका

विशेषता एस्ट्रोजन (Estrogen) प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)
मुख्य भूमिका गर्भाशय की परत (Lining) को बनाता और मोटा करता है। गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करता है और परत को स्थिर रखता है।
चक्र में समय

मासिक धर्म चक्र के पहले आधे हिस्से (दिन 1-14) में हावी रहता है।

चक्र के दूसरे आधे हिस्से (ओव्यूलेशन के बाद) में हावी रहता है।
PCOS में स्तर यह अनियंत्रित हो जाता है, जिससे स्तर सामान्य से अधिक प्रभावी दिखता है। ओव्यूलेशन न होने के कारण इसका स्तर बहुत कम हो जाता है।
शरीर पर प्रभाव (PCOS में) गर्भाशय की परत बहुत मोटी हो जाती है, जिससे हैवी ब्लीडिंग या कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसकी कमी से पीरियड्स रुक जाते हैं या अनियमित हो जाते हैं।
मेटाबॉलिक प्रभाव इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है। शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और तनाव कम करने में मदद करता है।
असंतुलन का परिणाम वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और सूजन। नींद न आना, चिंता और PMS के गंभीर लक्षण।

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की नॉर्मल रेंज क्या है?

Estrogen and Progesterone Hormones in PCOS 04

एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर महिलाओं में उनके मासिक धर्म चक्र, उम्र और गर्भावस्था की स्थिति के आधार पर लगातार बदलता रहता है। सामान्यतः एस्ट्रोजन (Estradiol) की रेंज मेंस्ट्रुअल साइकिल के शुरुआती दिनों (पीरियड्स के पहले 3-5 दिन) में 30 से 400 pg/mL के बीच होती है, जो ओव्यूलेशन करीब पहुंचते ही बढ़ जाती है। वहीं, प्रोजेस्टेरोन का स्तर चक्र के पहले भाग (पीरियड्स शुरू होने से लेकर ओव्यूलेशन होने तक के लगभग 14 दिनों)  में 1 ng/mL से कम होता है। हालांकि, ओव्यूलेशन के बाद यह बढ़कर 5 से 20 ng/mL तक पहुंच सकता है। मेनोपॉज यानी पीरियड्स पूरी तरह बंद होने के बाद इन दोनों हार्मोन का स्तर महिला में काफी कम हो जाता है।

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PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन कैसे प्रभावित होते हैं?

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एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का साइकल

आमतौर पर महिलाओं के शरीर में महीने के शुरुआती 15 दिनों तक एस्ट्रोजन बढ़ता है (अंडा विकसित करने के लिए) और आखिरी 15 दिनों में प्रोजेस्टेरोन बढ़ता है। ऐसा सामान्यतः अंडा रिलीज होने के बाद होता है। वहीं, PCOS की बात करें, तो इस स्थिति में अंडा समय पर रिलीज नहीं हो पाता, जिससे शरीर में प्रोजेस्टेरोन की भारी कमी हो जाती है।

एस्ट्रोजन डोमिनेंस का बढ़ना

चूंकि, PCOS एक हार्मोनल डिसऑर्डर है। इसकी वजह से महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर काफी बदल जाता है। अंडा रिलीज नहीं होता, इसलिए कॉर्पस ल्यूटियम (अस्थायी ग्रंथि जो हर महीने ओव्यूलेशन के बाद अंडाशय के अंदर बनती है) नहीं बनता और प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन नहीं हो पाता और एस्ट्रोजन का स्तर अधिक होकर यह अनियंत्रित हो जाता है। इसी स्थिति को हम एस्ट्रोजन डोमिनेंस के नाम से जानते हैं। डॉ. शोभा गुप्ता समझाते हुए कहती हैं, "इस स्थिति में गर्भाशय की परत अत्यधिक मोटी हो जाती है, जिससे पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग होने लगती है। कई बार PCOS से ग्रस्त महिलाओं के पीरियड्स लंबे समय तक भी चलते हैं और कुछ मामलों में पीरियड्स मिस भी हो सकते हैं।"

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एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का बढ़ना

PCOS की वजह से पुरुष हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण अंडाशय अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरोन बनाने लगते हैं। नतीजतन, चेहरे पर अनचाहे बाल और कील-मुंहासों की समस्या हो जाती है और हेयर फॉल भी बढ़ने लगता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस से कनेक्शन

साल 2023 में Reproductive Biology And Endocrinology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, PCOS होने की वजह से शरीर इंसुलिन का उपयोग सही तरह से नहीं कर पाता है। इसका बुरा प्रभाव ब्लड शुगर के स्तर पर भी पड़ता है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि बढ़ा हुआ इंसुलिन एंड्रोजन के प्रोडक्शन को बढ़ा देता है। जाहिर है, इस स्थिति में शरीर में एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन का संतुलन और ज्यादा बिगड़ जाता है।

PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को कैसे बैलेंस करें?

How Walking After Eating Aids Weight Loss 01 (10)

  • वजन संतुलित रखेंः जिन महिलाओं को PCOS होता है, उन्हें अपने  कुल वजन का 5-10 फीसदी घटाने पर जोर देना चाहिए। इसका बहुत अच्छा असर इंसुलिन रेजिस्टेंस पर पड़ता है और मेंस्ट्रुअल साइकिल पर भी अच्छा असर पड़ता है। Mayo Clinic के अनुसार, PCOS में वजन संतुलित रखने से ओव्यूलेशन भी होने लगता है।

  • लो-ग्लाइसेमिक डाइट लेंः 2025 में Current Nutrition Reports के अनुसार, PCOS को मैनेज करने के लिए लो-ग्लाइसेमिक डाइट बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस संबंध में डॉ. शोभा गुप्ता भी बताती हैं कि लो-ग्लाइसेमिक डाइट सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस को मैनेज करती है, जो कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के बीच हार्मोनल असंतुलन का मुख्य कारण है। लो-ग्लाइसेमिक डाइट लेने से ब्लड शुगर का स्तर तेजी से स्पाइक नहीं होता है और इंसुलिन के स्तर को भी कम करता है। जानकारी के लिए बता दें कि इंसुलिन का स्तर कम होने से एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) प्रोडक्शन में कमी आती है, जिससे ओव्यूलेशन (अंडे का बनना) रेगुलर हो पाता है और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन के बीच संतुलन भी बना रहता है।

  • एक्सरसाइज करेंः Journal Of Functional Morphology And Kinesiology के अनुसार, PCOS से पीड़ित महिलाओं को नियमित रूप से एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसमें वेट लिफ्टिंग, एरोबिक जैसी एक्सरसाइज काफी मायने रखती हैं। असल में, प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करने से PCOS के लक्षणों में कमी आती है और एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में संतुलन देखने को मिलता है।

  • तनाव कम करेंः ध्यान रखें PCOS में तनाव लेना बिल्कुल सही नहीं होता है। इसकी वजह स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। यह PCOS से ग्रस्त महिलाओं की कंडीशन को और भी बिगाड़ सकता है। तनाव को कम करने के लिए योगा, मेडिटेशन करें और रोजाना 7-9 घंटे की नींद जरूर लें।

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PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को बैलेंस कैसे करें?

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वैसे तो PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर संतुलित बनाए रखने के लिए जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ-साथ डॉक्टर इलाज के लिए कुछ विशेष तरीके अपनाते हैं, जैसे ओरल कंट्रासेप्टिव और साइक्लिक प्रोजेस्टिन थेरेपी की जाती है। इसके अलावा, कुछ मेडिसिन और सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं, जिसकी मदद से PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को बैलेंस करने में मदद मिलती है। Mayo Clinic के अनुसार, डॉक्टर PCOS को कंफर्म करने के लिए ब्लड टेस्ट करवाते हैं। इसके जरिए डॉक्टर एंड्रोजन (टेस्टोस्टेरोन), प्रोजेस्टेरोन, FHS (फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन) और LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) के स्तर की जांच की जाती है। इसके अलावा, पेल्विक अल्ट्रासाउंड किया जाता है, ताकि ओवरी में सिस्ट और यूटेराइन लाइनिंग की जानकारी मिल सके।

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असंतुलित एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन होने पर कब जाएं डॉक्टर के पास?

PCOS में एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन असंतुलित हो जाते हैं। हालांकि, इसका पता लगाने के लिए आपको कुछ संकेतों पर नजर रखनी चाहिए और यह पता होना चाहिए कि डॉक्टर के पास कब जाना है। Cleveland Clinic की मानें, तो निम्न स्थितियों में डॉक्टर के पास जाना जरूरी होता है, जैसे-

  • अनियमित मासिक चक्र हो, तो इसकी अनदेखी न करें।
  • चेहरे पर कील-मुंहासे बढ़ जाएं और अनचाहे बाल उग आएं।
  • अचानक वजन बढ़ने लगे और वजन कम करना मुश्किल लगे।
  • PCOS में एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन असंतुलित होने पर कंसीव करने में दिक्कतें आने लगती हैं।
  • पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग हो और तीव्र दर्द होने लगे।

निष्कर्ष

PCOS में हार्मोन इंबैलेंस होने लगता है। विशेषकर, एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बदलाव देखने को मिलता है। आपको बता दें कि ये दोनों हार्मोन का संतुलन महिला स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। अगर ऐसा न हो, तो इसकी वजह से महिलाओं की फर्टिलिटी पर सबसे बुरा असर पड़ता है। अगर किसी महिला को लगे या कुछ संकेत नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और अपनी जांच करवाएं।

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FAQ

  • क्या प्रोजेस्टेरोन PCOS में मदद कर सकता है?

    हां, प्रोजेस्टेरोन PCOS को मैनेज करने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग नियमित पीरियड्स के लिए किया जाता है और एंड्रोजन के स्तर को कम करने के लिए किया जाता है। इससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता में भी सुधार होता है।
  • PCOS कौन सी बीमारी है?

    PCOS महिलाओं में होने वाली हार्मोन से जुड़ी एक समस्या है। इस समस्या के कारण महिलाओं में एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन का स्तर प्रभावित होता है, जिसकी वजह से उनके पीरियड्स अनियमित होते हैं, चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल उग आते हैं, मुंहासे होने लगते हैं और वजन भी बढ़ने लगता है, जिसे कंट्रोल करना मुश्किल होता है।
  • एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन में क्या अंतर है?

    एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन, दोनों फीमेल सेक्स हार्मोन हैं। इनकी मदद से पीरियड्स रेगुलर होते हैं। बहरहाल, एस्ट्रोजन की बात करें, तो यह एंडोमेट्रियल लाइनिंग, ब्रेस्ट डेवलपमेंट और हड्डियों की मजबूती में अहम भूमिका अदा करता है। यह लिबिडो को भी बढ़ाता है। इसके स्तर में कमी को अक्सर मेनोपॉज से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, प्रोजेस्टेरोन प्रेग्नेंसी को सपोर्ट करता है, बेहतर नींद के लिए जिम्मेदार है और इसके स्तर में कमी होने की वजह से पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं।
  • क्या एस्ट्रोजन PCOS में मदद कर सकता है?

    एस्ट्रोजन PCOS में मददगार साबित होता है। आमतौर पर कंट्रासेप्टिव पिल के रूप में एस्ट्रोजन लिया जाता है।
  • प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ने से क्या होता है?

    सबसे पहले यह जानें कि क्या प्रेग्नेंसी की वजह से प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ रहा है? अगर ऐसा है, तो महिला में थकान, कमजोरी, ब्रेस्ट टेंडरनेस, ब्लोटिंग और मूड स्विंग जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं।

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Disclaimer

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 13, 2026 16:40 IST

    Modified By : Meera Tagore
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