Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या 40 की उम्र से पहले भी आ सकता है पेरिमेनोपॉज? जानें इसके लक्षण और डॉक्टर की राय

क्या 40 साल से कम उम्र की महिलान हैं और अक्सर पीरियड्स अनियमित रहते हैं? अगर ऐसा है, तो जानने की कोशिश करें कि कहीं यह पेरिमेनोपॉज के संकेत तो नहीं हैं और क्या वाकई 40 से पहले ऐसा हो सकता है?

पेरिमेनोपॉज, मेनोपॉज से पहले वाले चरण को कहा जाता है। इस दौरान महिलाओं के पीरियड्स पूरी तरह बंद नहीं होते हैं, लेकिन प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कहने का मतलब है कि पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं, जैसे कभी ब्लीडिंग हैवी होती है, कभी लंबे समय तक पीरियड्स बंद हो जाते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि 40 साल की उम्र के बाद महिलाओं को पेरिमेनोपॉज होता है। हालांकि, हाल के सालों में यह देखने में आया है कि महिलाओं को 40 साल की उम्र से पहले भी पेरिमेनोपॉज के लक्षण नजर आते हैं। आइए, जानते हैं कि क्या वाकई यह सच है? इस बारे में जानिए वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता की राय।

क्या 40 साल की उम्र से पहले पेरिमेनोपॉज आ सकता है?

can perimenopause symptoms and signs start before the age of 40 01 (19)

आमतौर पर पेरिमेनोपॉज के लिए यही माना जाता है कि इसकी शुरुआत 40 साल की उम्र के बाद होती है, लेकिन इस उम्र से पहले भी पेरिमेनोपॉज हो सकता है। इस संबंध में डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "40 वर्ष की उम्र से पहले पेरिमेनोपॉज (मेनोपॉज का शुरुआती चरण) होना असामान्य है, लेकिन यह इसे असंभव नहीं समझा जा सकता है, यह पूरी तरह संभव है। हालांकि आमतौर पर यह बदलाव महिलाओं में 40 से 50 वर्ष की उम्र के बीच (mid-to-late 40s) शुरू होता है, लेकिन हार्मोन में बदलाव 35 से 40 वर्ष की उम्र के बीच (mid-to-late 30s) भी शुरू हो सकते हैं। ध्यान रखें कि अगर 40 वर्ष की उम्र से पहले किसी के पीरियड्स पूरी तरह से बंद हो जाते हैं, तो इसे प्रीमैच्योर मेनोपॉज (समय से पहले मेनोपॉज) या प्राइमरी ओवेरियन इंसफिशिएंसी (POI - अंडाशय की समय से पहले निष्क्रियता) कहा जाता है।"

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40 साल की उम्र से पहले पेरिमेनोपॉज के लक्षण

पेरिमेनोपॉज होने पर सामान्य लक्षण नजर आते हैं, जैसे-

अनियमित पीरियड्सः पेरिमेनोपॉज होने पर महिलाओं के पीरियड्स पूरी तरह अनियमित हो जाते हैं। कई बार ब्लीडिंग फ्लो बहुत ज्यादा होता है, तो कई बार सिर्फ स्पॉटिंग होती है। यहां तक कि कई दफा दो पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग भी देखी जा सकती है।

मूड में बदलावः चूंकि, पेरिमेनोपॉज के दौरान ब्लीडिंग अनियमित हो जाते हैं,तो इसकी वजह से हार्मोनल परिवर्तन भी होते हैं। विशेषकर, एस्ट्रोजन का स्तर प्रभावित होता है। इस स्थिति में मूड में परिवर्तन भी देखने को मिल सकते हैं। इसका मतलब है कि पेरिमेनोपॉज के दौरान महिलाएं चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी आदि समस्याएं हो सकती हैं।

नींद में परेशानीः पेरिमेनोपॉज के कारण महिलाओं को अच्छी और गहरी नींद लेने में भी दिक्कतें आती हैं। यहां तक कि कुछ महिलाओं को पेरिमेनोपॉज होने पर रात को बहुत ज्यादा पसीने और हॉट फ्लैशेज हो सकते हैं, जो कि उनकी नींद बाधित करते हैं।

एनर्जी में कमीः पेरिमेनोपॉज में हार्मोनल बदलाव होना और रात को अच्छी नींद न ले पाने के कारण महिलाओं में एनर्जी का स्तर प्रभावित हो सकता है। ऐसे में वे थकान, कमजोरी महसूस करती हैं। कई बार आराम करने के बाद भी थकान कम नहीं होती है।

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निष्कर्ष

40 साल की उम्र से पहले पेरिमेनोपॉज के लक्षण नजर आ सकते हैं, हालांकि यह कोई निश्चित नहीं है कि सभी महिलाओं के साथ ऐसा हो। कुछ महिलाओं को 40 साल की उम्र के बाद पेरिमेनोपॉज आते हैं, जो कि पूरी तरह सामान्य है। अगर किसी को 40 साल की उम्र से पहले पेरिमेनोपॉज आ जाए, तो इसे भी आप नॉर्मल माना जा सकता है। हालांकि, पेरिमेनोपॉज क्यों हो रहा है, इसका कारण जानना अधिक जरूरी है।

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FAQ

  • अर्ली पेरिमेनोपॉज (Early Perimenopause) क्या होता है?

    जब किसी महिला को 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच ही मेनोपॉज के लक्षण दिखने लगें, तो उसे अर्ली पेरिमेनोपॉज कहते हैं।
  • हॉट फ्लैशेज (Hot Flashes) क्या हैं और यह क्यों होते हैं?

    पेरिमेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन घट जाते हैं, जिससे अचानक बहुत तेज गर्मी और पसीना महसूस होने लगता है। इस स्थिति को हॉट फ्लैशेज कहते हैं।

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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