Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

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कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान क्यों लगती है ज्यादा गर्मी? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

क्या आपको भी पीरियड्स के दौरान हॉट फ्लैशेज का एहसास होता है? अगर हां, तो इसे हल्के में न लें। इस तरह की स्थिति हार्मोन में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण होती है। जानें, इसके बारे में विस्तार से।

आपने यह जरूर सुना होगा कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को हॉट फ्लैशेज होते हैं। जिंदगी के इस चरण में महिलाओं को अधिक गर्मी लगती है, जिसे कभी-कभार मैनेज किया जाना काफी मुश्किल हो जाता है। बहरहाल, क्या आप जानते हैं कि कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी अधिक गर्मी लगती है? जी, हां! यह पूरी तरह सच है। सवाल यह है कि कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान क्यों लगती है ज्यादा गर्मी? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता  से।

पीरियड्स के दौरान गर्मी लगने के कारण

women feel more sensitive to heat during their menstrual cycle 01 (20)

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का बढ़ना

पीरियड्स शुरू होने से लगभग दो सप्ताह पहले महिलाओं में ओव्यूलेशन पीरियड चलता है। इस दौरान शरीर में शरीर में प्रोजेस्टेरोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। यह हार्मोन मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस को प्रभावित करता है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। ऐसे में महिला के शरीर का तापमान लगभग 0.5 से 1 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाता है, जिससे उन्हें अन्य लोगों की तुलना में अधिक गर्मी लगती है।

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एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी

पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में अचानक गिरावट आ जाती है। एस्ट्रोजन हार्मोन के इस उतार-चढ़ाव के कारण थर्मोरेगुलेटरी जोन अधिक सेंसिटिव हो जाता है। इसी वजह से शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इस स्थिति में महिलाओं को अधिक गर्मी लगती है और रात को अधिक पसीना भी आता है।

मेटाबॉलिज्म का धीमा होना

चूंकि पीरियड्स के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं और वॉटर रिटेंशन भी बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में शरीर के लिए खुद को ठंडा रखना मुश्किल होता है। यही कारण है कि कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अधिक गर्मी और बेचैनी महसूस होती है।

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पीरियड्स में अधिक गर्मी लगने पर क्या करें?

पीरियड्स के दौरान सभी महिलाओं को गर्मी या हॉट फ्लैशेज की समस्या नहीं होती है। वहीं, कुछ महिलाओं को यह स्थिति लगती है। ऐसे में आप यहां बताए गए टिप्स को अपनाएं-

  • दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे।
  • पीरियड्स में ऐसी एक्टिविटी न करें, जिससे हॉट फ्लैशेज का रिस्क बढ़े।
  • गर्मी लगने पर ढीले-ढाले कपड़े पहनें।
  • कैफीन या शराब से दूर रहें ताकि गर्मी ट्रिगर न हो।
  • ठंडे वातावरण या ठंडी जगह में समय बिताएं ताकि गर्मी से बचा जा सके।

निष्कर्ष

पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं को हॉट फ्लैशेज की समस्या होती है। हालांकि, यह स्थायी समस्या नहीं है। इसे मैनेज किया जा सकता है। कुछ टिप्स ऊपर बताए गए हैं। आप उन्हें फॉलो करें। अगर इसके बावजूद आपकी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है, तो बेहतर है कि आप डॉक्टर से संपर्क करें।

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FAQ

  • क्या पीरियड्स के दौरान गर्मी लगना सामान्य है?

    हां, ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ने और पीरियड्स से ठीक पहले एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आने की वजह से ऐसी समस्या हो सकती है।
  • क्या पीरियड्स में हो रहे हॉट फ्लैशेज को कम करने के लिए डाइट में बदलाव किया जा सकता है?

    एक्सपर्ट की मानें, तो इस दौरान कैफीन, शराब और मसालेदार भोजन से दूरी बनाकर अपनी समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
  • पीरियड्स में हो रहे हॉट फ्लैशेज चिंता का विषय कब बनते हैं?

    यदि गर्मी लगने के साथ-साथ तेज बुखार हो, असहनीय दर्द हो या यह समस्या पीरियड्स खत्म होने के बाद भी बनी रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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