Wed Oct 7, 2026 | 05:40 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या उम्र के साथ पीरियड फ्लो में बदलाव आना सामान्य है? जानिए कब डॉक्टर से मिलें

उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं, जिसका प्रभाव पीरियड फ्लो पर पड़ता है। यही कारण है कि पीरियड फ्लो कम या ज्यादा हो सकता है। जानते हैं इसके अन्य कारणों के बारे में।
क्या उम्र के साथ पीरियड फ्लो में बदलाव आना सामान्य है? जानिए कब डॉक्टर से मिलेंक्या उम्र के साथ पीरियड फ्लो में बदलाव आना सामान्य है? जानिए कब डॉक्टर से मिलें

कई महिलाओं को लगता है कि बढ़ती उम्र के साथ उनके पीरियड फ्लो में बदलाव हो गया है। वहीं, कुछ महिलाएं इस तरह की बातों को बेबुनियादी मानती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में पीरियड फ्लो बदल जाता है या यह महज एक मिथक है? आइए, जानते हैं इस संबंध में वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता क्या बताती हैं?

क्या वाकई बढ़ती उम्र में पीरियड फ्लो बदल जाता है?

does period flow change with age 1 (13)does period flow change with age 1 (13)

पीरियड फ्लो कभी भी एक जैसा नहीं होता है। स्ट्रेस, हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी जैसी तमाम बातें पीरियड फ्लो को बदल सकती हैं। जहां तक सवाल इस बात का है कि क्या वाकई बढ़ती उम्र में पीरियड फ्लो बदल जाता है? इस बारे में डाॅ. शोभा कहती हैं, "हां, यह सच है कि अधिक उम्र में पीरियड फ्लो बदल जाता है। दरअसल, हार्मोन में बदलाव, जीवनशैली के कारकों और गर्भावस्था के कारण महिलाओं में पीरियड फ्लो स्वाभाविक रूप से बदल जाता है।" डाॅ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं कि सामान्य तौर पर किशोरावस्था में पीरियड साइकिल अनियमित होता है और फ्लो हैवी हो सकता है। 20-30 की उम्र में यह स्थिर हो जाता है।

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किस उम्र में होता है कैसा पीरियड फ्लो

किशोरावस्था में

20 साल की उम्र से पहले महिलाएं किशोरावस्था से गुजर रही होती हैं। यह वही उम्र है जब किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स शुरू होते हैं, तो शुरुआती कुछ सालों तक फ्लो काफी अनियमित हो सकता है। वास्तव में, इस उम्र में शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर स्थिर हो रहा होता है। इसलिए, कभी फ्लो बहुत हैवी हो जाता है, तो कभी लाइट हो जाता है।

20 से 30 साल की उम्र के बीच

20 से 30 साल की उम्र के बीच महिलाओं में पीरियड फ्लो काफी स्थिर और नियमित हो जाता है। हालांकि, कई महिलाएं इसी उम्र में सेक्शुअली एक्टिव होती हैं और गर्भावस्था से बचने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं। यह भी पीरियड फ्लो को प्रभावित करता है। यही नहीं, डिलीवरी के बाद भी कई महिलाओं को पहले से अधिक हैवी या लंबे समय तक ब्लीडिंग हो सकती है।

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पेरिमेनोपॉज 

40 की उम्र के बाद महिलाएं पेरिमेनोपॉज से गुजरती हैं। यह मेनोपॉज के ठीक पहले का चरण होता है। इस दौरान अंडाशय से हार्मोन का उत्पादन तेजी से घटता-बढ़ता रहता है। इसी वजह से पीरियड फ्लो स्थिर नहीं रहता है। कुछ महीने फ्लो बहुत ज्यादा हो सकता है, तो कुछ महीनों में सिर्फ स्पॉटिंग भी हो सकती है। 

निष्कर्ष

उम्र के साथ पीरियड फ्लो में बदलाव आना पूरी तरह नॉर्मल है। विशेषकर पेरिमेनोपाॅज की स्थिति में महिलाओं का पीरियड साइकिल भी बदल जाता है और पीरियड फ्लो पर भी असर दिखता है। इसकी मूल वजह शरीर की उम्र बढ़ने और हार्मोनल बदलावों को माना जा सकता है। हालांकि, अगर महिला की उम्र कम है, फिर भी पीरियड फ्लो लाइट है, तो इस तरह की स्थिति में डाॅक्टर से संपर्क किया जाना जरूरी है।

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FAQ

  • क्या उम्र बढ़ने पर पीरियड्स का फ्लो कम हो जाता है?

    हां, पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल कमी के कारण महिलाओं में पीरियड फ्लो कम और अनियमित हो जाता है।
  • डिलीवरी के बाद पीरियड्स में क्या बदलाव आता है?

    डिलीवरी के बाद गर्भाशय का आकार बदल जाता है और हार्मोन भी तेजी से शिफ्ट होने लगते हैं। ऐसे में महिलाओं को पहले की तुलना में अधिक हैवी ब्लीडिंग होती है और कुछ मामलों में ऐंठन भी महसूस हो सकती है।
  • पीरियड फ्लो कम होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

    अगर 40 की उम्र के बाद अचानक बहुत ज्यादा हैवी ब्लीडिंग होने लगे, पैड 1-2 घंटे में ही बदलना पड़े या दो पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग और स्पॉटिंग हो, तो डॉक्टर से मिलने में देरी न करें।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Modified By : Meera Tagore
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