हर महीने मासिक धर्म का रक्तस्राव बिल्कुल एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। कभी रक्तस्राव सामान्य से अधिक हो सकता है, तो अगले महीने काफी कम। एक-दो बार ऐसा होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन यदि यह बदलाव बार-बार होने लगे, तो इसके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी है। सामान्य रूप से मासिक चक्र 21 से 35 दिनों के बीच हो सकता है और मासिक धर्म लगभग 2 से 7 दिनों तक रह सकता है।
वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "मासिक धर्म के रक्तस्राव में महीने-दर-महीने थोड़ा अंतर सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर पहले नियमित रहने वाले मासिक धर्म में अचानक बहुत अधिक उतार-चढ़ाव आने लगे, तो केवल इसे सामान्य मानकर छोड़ना सही नहीं है। रक्तस्राव की मात्रा के साथ-साथ मासिक चक्र की अवधि, दर्द और दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए।"
पीरियड फ्लो में बदलाव क्यों आते हैं?
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1. हार्मोन में बदलाव हो सकता है कारण
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "मासिक धर्म का पूरा चक्र शरीर के कई हार्मोन से नियंत्रित होता है। ओव्यूलेशन यानी अंडाशय से अंडे के निकलने की प्रक्रिया में बदलाव होने पर एक महीने रक्तस्राव अधिक और अगले महीने कम हो सकता है। यदि किसी चक्र में ओव्यूलेशन ठीक से नहीं होता, तो गर्भाशय की अंदरूनी परत सामान्य से अधिक मोटी हो सकती है और इसके निकलने पर ज्यादा रक्तस्राव हो सकता है।"
StatPearls द्वारा प्रकाशित एक ऑनलाइन मेडिकल लर्निंग आर्टिकल के अनुसार मासिक धर्म चक्र मुख्य रूप से हाइपोथैलेमस, पिट्यूटरी ग्रंथि और अंडाशय (HPO Axis) के बीच जटिल हार्मोनल तालमेल (FSH, LH, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) द्वारा संचालित होता है। कई बार पीरियड फ्लो में हो रहे बदलाव या रक्तस्राव में कोई भी असामान्य अनियमितता शरीर में किसी अंतर्निहित हार्मोनल, एंडोक्राइन या प्रजनन संबंधी विकार का एक महत्वपूर्ण संकेत भी हो सकता है।
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2. तनाव और जीवनशैली का असर
लगातार मानसिक तनाव, नींद की कमी, अचानक वजन कम होना या बढ़ना, बहुत अधिक व्यायाम और भोजन में बड़ा बदलाव भी मासिक चक्र को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अंडोत्सर्जन प्रभावित हो सकता है और परिणामस्वरूप कभी ज्यादा तो कभी बहुत कम रक्तस्राव हो सकता है।
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "आजकल कई महिलाएं काम का तनाव, कम नींद, तेजी से वजन घटाने वाली आहार योजनाओं या अत्यधिक व्यायाम के कारण अपने मासिक चक्र में बदलाव देखती हैं। इसलिए केवल गर्भाशय या हार्मोन को दोष देने के बजाय पूरी जीवनशैली को देखना जरूरी है।"
3. PCOS भी हो सकता है जिम्मेदार
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS में ओव्यूलेशन नियमित रूप से नहीं हो पाता। इससे मासिक धर्म कभी देर से आ सकता है, कभी रक्तस्राव ज्यादा हो सकता है और कभी बहुत कम। यदि इसके साथ वजन बढ़ना, चेहरे पर अधिक बाल, मुंहासे या बालों का झड़ना जैसे लक्षण भी हों, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
साल 2020 में International Journal of Endocrinology and Metabolism में प्रकाशित नेरेटिव रिव्यू एंडोक्राइन से जुड़ी समस्याओं (जैसे थायराइड की समस्या, PCOS, कुशिंग सिंड्रोम, डायबिटीज) से पीड़ित महिलाओं में मासिक धर्म चक्र का लंबा होना (35 दिनों से अधिक का चक्र) सबसे आम लक्षण पाया गया है। इस दौरान उनका ब्लड फ्लो भी प्रभावित होता है।
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4. थायराइड की समस्या को न करें नजरअंदाज
थायराइड ग्लैंड शरीर के मेटाबोलिज्म और कई हार्मोनल प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। थायरॉइड में कमी या अधिकता होने पर मासिक धर्म की नियमितता और रक्तस्राव की मात्रा दोनों बदल सकती हैं।
5. गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं
यदि एक महीने बहुत अधिक रक्तस्राव हो रहा है और यह बार-बार दोहराया जा रहा है, तो गर्भाशय में गांठ, जिसे फाइब्रॉइड कहा जाता है, या छोटी वृद्धि यानी पॉलिप जैसी समस्याओं की भी जांच की जा सकती है। गर्भाशय की दीवार से जुड़ी कुछ स्थितियां भी अधिक रक्तस्राव का कारण बन सकती हैं।
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6. बढ़ती उम्र का प्रभाव
किशोरावस्था के शुरुआती वर्षों और रजोनिवृत्ति से पहले के समय में हार्मोनल बदलावों के कारण मासिक धर्म का स्वरूप बदलना आम है। रजोनिवृत्ति से पहले के वर्षों में कभी रक्तस्राव अधिक तो कभी कम हो सकता है और दो मासिक धर्मों के बीच का अंतर भी बदल सकता है।
7. दवा का प्रभाव
कई बार लंबे समय से चल रही दवा के प्रभाव के कारण भी महिलाओं में पीरियड फ्लो बदल सकता है। वहीं, अगर किसी महिला ने अनचाही प्रेग्नेंसी से बचने के लिए IUDs लगवा रखा है, तो भी पीरियड फ्लो पर असर पड़ सकता है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर यह बदलाव केवल एक महीने हुआ है और कोई अन्य परेशानी नहीं है, तो अगले कुछ चक्रों पर नजर रखी जा सकती है। लेकिन यदि रक्तस्राव लगातार अनियमित हो, मासिक धर्म 7 दिनों से अधिक चले, बहुत अधिक रक्तस्राव हो, चक्कर या कमजोरी महसूस हो, मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव हो या गर्भधारण में परेशानी हो रही हो, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "महिलाओं को अपने मासिक धर्म का लेखा रखना चाहिए—मासिक धर्म कब शुरू हुआ, कितने दिन चला, रक्तस्राव कितना था और दर्द या अन्य लक्षण थे या नहीं। इस जानकारी से चिकित्सक को बदलाव का कारण समझने में काफी मदद मिलती है।"
निष्कर्ष
एक महीने अधिक और अगले महीने कम रक्तस्राव होना हमेशा चिंता की बात नहीं है। लेकिन यदि यह बदलाव लगातार दिखाई दे रहा है, तो हार्मोन, ओव्यूलेशन, थायराइड, PCOS या गर्भाशय से जुड़ी समस्या जैसे कारणों की जांच जरूरी हो सकती है। अपने सामान्य मासिक चक्र में आए लगातार बदलाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
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FAQ
पीरियड्स के दौरान हैवी फ्लो को कंट्रोल करने के लिए क्या किया जा सकता है?
पीरियड फ्लो में किसी तरह के बदलाव करना संभव नहीं है। हालांकि, हैवी ब्लड फ्लो के दौरान शरीर में आयरन और पानी की कमी हो सकती है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए अपनी डेट में पालक, चुकंदर, अनार जैसी आयरन से भरपूर चीजों का सेवन करें। अगर, लक्षण गंभीर हो जाएं तो डॉक्टर से संपर्क करें।क्या अनियमित पीरियड फ्लो के दौरान बिना कंडोम के संबंध बनाने पर भी प्रेग्नेंसी हो सकती है?
हां, ओव्यूलेशन की तारीख अनिश्चित होने के कारण अनियमित फ्लो के बावजूद बिना सुरक्षा सेक्स करने से कंसीव करने का जोखिम बना रहता है।
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Current Version
Sep 08, 2026 13:39 IST
Modified By : Meera Tagore Sep 08, 2026 13:39 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta