Fri Oct 9, 2026 | 07:17 PM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

पीरियड्स से पहले मूड स्विंग क्यों होते हैं? डॉक्टर से जानें PMS को मैनेज करने के आसान तरीके

पीरियड्स से पहले महिलाओं में चिड़चिड़ापन और उदासी जैसे मूड स्विंग्स की समस्याएं बढ़ जाती हैं, जो हार्मोनल बदलावों के कारण होते हैं। इसके कारणों को जानकर और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे मैनेज किया जा सकता है। 
पीरियड्स से पहले मूड स्विंग क्यों होते हैं? डॉक्टर से जानें PMS को मैनेज करने के आसान तरीकेपीरियड्स से पहले मूड स्विंग क्यों होते हैं? डॉक्टर से जानें PMS को मैनेज करने के आसान तरीके

पीरियड शुरू होने से कुछ दिन पहले महिलाओं को अचानक चिड़चिड़ापन, उदासी या गुस्सा महसूस होने लगता है, जिसे आमतौर पर मूड स्विंग्स के रूप में जाना जाता है। यह स्थिति प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी PMS का एक हिस्सा होती है, जो शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण होती है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल तेजी से ऊपर-नीचे होता है, जिसका सीधा असर महिला के दिमाग के केमिकल पर पड़ता है। हालांकि, यह एक नेचुरल प्रक्रिया होती है, लेकिन इसके कारण महिलाओं की रोजमर्रा की लाइफ प्रभावित हो सकती है। आइए इस लेख में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से विस्तार में जानते हैं कि पीरियड्स से पहले मूड स्विंग क्यों होते हैं और इसे कैसे मैनेज कर सकते हैं?

पीरियड्स से पहले मूड स्विंग्स क्यों होते हैं?

Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है, "पीरियड्स शुरू होने से ठीक एक या दो हफ्ते पहले अचानक बिना वजह चिड़चिड़ापन होना, बात-बात पर गुस्सा आना, उदासी छा जाना या ज्यादा थकान महसूस होना एक बहुत ही आम समस्या है। ज्यादातर महिलाओं को यह बदलाव केवल उनका स्वभाव लगता है, लेकिन मेडिकल साइंस में इसे पीएमएस यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual Syndrome) कहा जाता है।"

साल 2021 में Current Psychiatry Reports में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, प्रजनन आयु की ज्यादातर महिलाओं को पीरियड से पहले के इसके लक्षण महसूस होते हैं। PMS (Premenstrual Syndrome) से पीड़ित महिलाओं में पीरियड साइकिल शुरू होने से 7 दिन पहले और साइकिल के अन्य दिनों में भी चिड़चिड़ेपन और उदासी जैसी मूड की अस्थिरता ज्यादा देखी जाती है।

आगे Dr.(Prof.) Anju Suryapani ने बताया कि पीरियड साइकिल के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव सीधे तौर पर दिमाग के केमिकल्स को प्रभावित करते हैं। इन हार्मोनल बदलावों में शामिल हैं-

1. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव

ओव्यूलेशन के बाद, यानी पीरियड्स शुरू होने से लगभग 10 से 14 दिन पहले, शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल तेजी से गिरता है और प्रोजेस्टेरोन का लेवल बढ़ने लगता है। हार्मोन के इस अचानक बदलाव से महिलाओं के मूड में तेजी से बदलाव आते हैं।

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Journal of Pharmacology and Clinical Toxicology के अनुसार, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन दिमाग के अलग-अलग रासायनिक प्रणालियों की गतिविधियों को कंट्रोल करते हैं। जब पीरियड्स से पहले इन हार्मोनों में तेजी से बदलाव या कमी आती है, तो ये न्यूरोट्रांसमीटर प्रणालियां प्रभावित होती हैं, जिससे मूड स्विंग्स और अन्य मानसिक लक्षण नजर आ सकते हैं।

2. सेरोटोनिन का लेवल कम होना

एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने से दिमाग में सेरोटोनिन यानी खुशी और मानसिक संतुलन बेहतर रखने वाला न्यूरोट्रांसमीटर का लेवल भी कम हो जाता है। सेरोटोनिन की कमी के कारण ही महिलाओं में उदासी, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और मीठा या ज्यादा कार्ब वाला भोजन खाने की इच्छा बढ़ जाती है।

3. नींद की कमी और तनाव

प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के कारण महिलाओं के शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है, जिससे रात में गहरी नींद आने में परेशानी होती है। नींद पूरी न होने और रोजमर्रा के तनाव से महिलाओं में PMS के लक्षण दोगुने हो जाते हैं। इस कारण महिलाओं का बात-बात पर रोना, फोकस में कमी, घबराहट, ब्लोटिंग, सिरदर्द और एक्ने की समस्या बढ़ जाती है।

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पीरियड्स से पहले मूड स्विंग मैनेज करने के तरीके

Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि महिलाएं अपने लाइफस्टाइल और खान-पान में थोड़े से बदलाव करके PMS के लक्षणों को काफी हद तक कम कर सकती हैं। इसके लिए-

  • पीरियड से 10 दिन पहले चाय, कॉफी और सोडा ड्रिंक्स का सेवन करना बंद कर दें। कैफीन पीरियड के दौरान एंग्जायटी और चिड़चिड़ेपन की समस्या को बढ़ा सकती है।
  • अपनी डाइट में कैल्शियम और विटामिन बी6 से भरपूर दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां और केला जरूर शामिल करें। इस तरह की डाइट मूड स्विंग्स और एंग्जायटी को कम करने में मददगार होते हैं।
  • रोजाना 30 मिनट टहलना, योग या एरोबिक्स करने से शरीर में एंडोर्फिन यानी फील-गुड हार्मोन रिलीज होता है, जो तनाव तो तुरंत कम करने में मदद कर सकता है।
  • अपनी डाइट से ज्यादा नमक और चीनी को कम करें। नमक का ज्यादा सेवन शरीर में वॉटर रिटेंशन औऱ ब्लोटिंग की समस्या को बढ़ाता है, जबकि ज्यादा चीनी से मूड में तेजी से बदलाव होता है।
  • रोजाना 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद लें और दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं ताकि शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिल सके।

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डॉक्टर से मिलना कब जरूरी है?

अगर पीरियड से पहले महिलाओं में तनाव इतना गंभीर हो जाए कि आपके काम, रिश्तों या रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़ने लगे, ज्यादा डिप्रेशन महसूस हो या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार मन में आएं तो यह PMDD (Premenstrual Dysphoric Disorder) हो सकता है। यह पीएमएस का ही एक गंभीर रूप है, जिसके लिए जरूरी है कि महिलाएं डॉक्टर से सलाह और थेरेपी दोनों लें।

निष्कर्ष
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि PMS कोई दिमागी वहम नहीं है, बल्कि एक वास्तविक शारीरिक और हार्मोनल स्थिति है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। महिलाओं को इस दौरान अपने शारीरिक और मानसिक बदलावों को पहचानना चाहिए और जरूरत पड़ने पर परिवार की भी मदद लेनी चाहिए। अगर यह लक्षण बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
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FAQ

  • पीएमएस के लक्षण आमतौर पर कब शुरू होते हैं?

    पीएसएस के लक्षण पीरियड शुरू होने से लगभग एक से दो हफ्ते पहले शुरू हो सकते हैं और जैसे ही पीरियड शुरू होता है, ये धीरे-धीरे अपने आप कम होने लगते हैं।
  • क्या खान-पान का सीधा असर पीएमएस के दौरान मूड स्विंग्स पर पड़ता है?

    हां, खान-पान की आदतें सीधे महिलाओं के मूड को प्रभावित करती हैं। इस दौरान ज्यादा मीठी चीजें, जंक फूड या नमकीन फूड्स खाने से शरीर में ब्लोटिंग और एनर्जी कम होने की समस्या हो सकती है, जिससे चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 20, 2026 19:48 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Aug 20, 2026 19:48 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani