Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

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चीनी का ज्‍यादा सेवन ब‍िगाड़ सकता है मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य, एक्‍सपर्ट ने बताए कारण

ज्यादा चीनी का सेवन मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। यह मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, तनाव और खराब नींद का कारण है। जानें कैसे चीनी दिमाग पर असर डालती है और किन आसान तरीकों से आप मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं?

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चीनी हमारी द‍िनचर्या का सामान्य हिस्सा बन चुकी है। चाय, कॉफी, मिठाई, पैक्ड स्नैक्स, बेकरी आइटम और ड्रिंक्स में चीनी की मात्रा छिपी हुई होती है। स्वाद अच्छा लगने के कारण लोग इसकी आदत डाल लेते हैं, लेकिन इसी मीठे का ज्यादा सेवन धीरे-धीरे शरीर ही नहीं, दिमाग पर भी बुरा असर डालने लगता है। मानसिक स्वास्थ्य पर चीनी के प्रभाव को लेकर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि हाई शुगर- डाइट मूड, सोच, नींद और तनाव स्तर को असंतुलित कर सकती है। इस लेख में हम समझेंगे कि आखिर ज्यादा चीनी मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती है और इससे बचने के लिए आप कौन से आसान बदलाव कर सकते हैं? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

चीनी मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बिगाड़ती है?- How Sugar Affects Mental Health

  • ज्यादा चीनी खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक गिर जाता है। इससे मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
  • हाई शुगर डाइट शरीर में सूजन को बढ़ाती है, जो द‍िमाग तक पहुंचकर डिप्रेशन, एंग्जाइटी और मानसिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।
  • चीनी तुरंत डोपामिन रिलीज करती है यानी फील गुड केमिकल, लेकिन इसका नियमित सेवन दिमाग को मीठे की लत लगा देता है। जब चीनी नहीं मिलती, तो मूड अच्‍छा नहीं लगता, कुछ लोगों को बेचैनी या तनाव के लक्षण भी महसूस हो सकते हैं।
  • शुगर कोर्टिसोल यानी स्‍ट्रेस हार्मोन को बढ़ाती है, जिससे अन‍िद्रा की समस्‍या होती है और सुबह सुस्ती रहती है।

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चीनी का सेवन घटाने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के उपाय- Tips To Reduce Sugar & Protect Mental Health

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1. छिपी हुई चीनी पहचानें- Identify Hidden Sugar

पैक्ड फूड, सॉस, सीरियल, ब्रेड, जूस और एनर्जी ड्रिंक्स में हाई शुगर होती है। लेबल पढ़कर फ्रुक्टोज, सीरप और माल्टोज जैसे शब्दों से सावधान रहें।

2. चीनी के हेल्‍दी व‍िकल्‍प चुनें- Choose Healthy Sweet Alternatives

मीठा खाने का मन करे तो-

  • ताजे फल
  • 2 से 3 खजूर
  • थोड़ा-सा गुड़
  • नट्स
  • हर्बल टी जैसे विकल्प लें।

3. प्रोटीन और फाइबर बढ़ाएं- Increase Protein & Fiber Rich Foods

  • प्रोटीन और फाइबर र‍िच फूड्स का सेवन करें। ये ब्लड शुगर को स्टेबल रखते हैं।
  • दालें, अंडे, ओट्स, सलाद, दही वगैरह को डाइट में शामिल करें।

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4. नींद पूरी करें- Prioritize Quality Sleep

रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद मूड को स्थिर रखती है और मीठे की क्रेव‍िंग भी कम होती है।

5. नियमित एक्‍सरसाइज करें- Exercise Regularly

एक्‍सरसाइज करने से सेरोटोनिन और डोपामिन को संतुलित करता है, जिससे तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है इसल‍िए रोज एक्‍सरसाइज करें।

6. रोज 10 मिनट मेडिटेशन करें- Practice Meditation Daily

ध्यान करने से तनाव कम होता है और भावनात्मक उतार चढ़ाव भी घटता है, जिससे शुगर की आदत धीरे-धीरे कम हो जाती है।

निष्कर्ष:

बहुत ज्यादा चीनी शरीर ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित करती है। यह दिमाग में सूजन, मूड स्विंग, खराब नींद और तनाव बढ़ाती है। इसलिए शुगर का सेवन कम करें, हेल्दी विकल्प अपनाएं और अपना मानसिक स्वास्थ्य मजबूत बनाएं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 01, 2026 19:28 IST

    Modified By : Anurag Gupta
  • Jan 01, 2026 19:28 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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