आमतौर पर महिलाओं को पीरियड्स से पहले कई तरह की परेशानियां होती हैं। इसमें पेट दर्द, कमर दर्द आदि शामिल हैं। कई महिलाओं को पीरियड्स से ठीक पहले लूज मोशन की दिक्कत हो जाती है। महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर पीरियड्स पहले लूज मोशन जैसी परेशानी क्यों होती है?
वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, ‘पीरियड्स से पहले महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन्स नाम का केमिकल रिलीज होता है, जिससे लूज मोशन या पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं ट्रिगर हो जाती हैं।’ आइए, इस लेख में हम जानते हैं इन कारणों को विस्तार से।
क्या कहती है स्टडी?
BMC Women's Health के अनुसार, पीरियड्स के दौरान या उससे पहले लगभग 73% स्वस्थ महिलाओं को कम से कम एक पाचन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ता है। इनमें पेट दर्द (55-58%) और लूज मोशन (24-28%) सबसे आम लक्षण पाए गए। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि पीरियड्स के दौरान जिन महिलाओं ने तनाव, डिप्रेशन या एंग्जायटी (चिंता) का अनुभव किया, उनमें दस्त, मतली और पेट फूलने जैसे कई पाचन लक्षण एक साथ होने की संभावना काफी अधिक थी। इसके अलावा, पीरियड्स में कई महिलाएं अधिक थकान महसूस करती हैं। थकान का सीधा संबंध पाचन से जुड़ी समस्याओं के बीच पाया गया है।
पीरियड्स से पहले लूज मोशन के कारण
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डॉ. शोभा गुप्ता स्पष्ट करती हैं, वैसे तो पीरियड्स से पहले या इस दौरान सभी महिला को लूज मोशन हो, यह बिल्कुल जरूरी नहीं है। इसके अलावा, एक्सपर्ट भी स्पष्ट करते हैं इसके सटीक कारणों का अब तक पता नहीं चला है। हां, हार्मोनल बदलाव और कुछ खास किस्म के केमिकल रिलीज होने पर पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। इसे विस्तार से समझते हैं-
1. प्रोस्टाग्लैंडिन्स का रिलीज होना
प्रोस्टाग्लैंडिन्स एक किस्म का हार्मोन जैसा केमिकल है, जो कि पीरियड्स के ठीक पहले रिलीज होता है। यह केमिकल गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है। इससे पीरियड्स भी सही तरह से हो जाते हैं। हालांकि, कई बार यह केमिकल आस-पास की आंतों तक पहुंच जाता है, जिसकी वजह से आंतों की मांसपेशियों में भी सिकुड़न पैदा हो जाती हे। नतीजतन, पाचन क्रिया तेज हो जाती है और दस्त (लूज मोशन) की समस्या होने लगती है।
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प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में कमी
पीरियड्स के ठीक पहले या इसकी शुरुआती में प्रोजेस्टेरोन का स्तर तेजी से गिर जाता है। ऐसे में प्रोजेस्टेरोन और प्रोस्टाग्लैंडिन्स जैसे हार्मोन के रिलीज होने से आंतों की गतिविधियां भी तेज हो जाती हैं। यही कारण है कि कई महिलाओं को पीरियड्स के ठीक पहले या इस दौरान लूज मोशन होने लगते हैं।
खान-पान में बदलाव
आपने देखा होगा कि पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को मीठे या तला-भुना खाने की क्रेविंग हो जाती है। कई महिलाएं अधिक मात्रा में मीठा या तला-भुना खाती भी हैं। वहीं, इस समयावधि में आंतें अधिक सेंसिटिव हो जाती हैं। ऐसे में तला-भुना खाने से पेट खराब होने का जोखिम रहता है और लूज भी हो सकते हैं। ध्यान रखें कि ऐसा सब महिलाओं के साथ नहीं होता है।
तनाव या नींद में कमी
कई बार पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, क्रैंपिंग, पैरों में तकलीफ आदि के कारण तनाव बढ़ जाता है। कुछ मामलों में महिलाओं को अच्छी नींद भी नहीं आती है। जब कोई रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद नहीं लेता है, तो ऐसे में में पाचन संबंधी समस्या ट्रिगर हो सकती हैं। नतीजतन, लूज भी हो जाते हैं।
अंदरूनी बीमारियां
अगर पीरियड्स के दौरान किसी महिला को गंभीर रूप से लूज मोशन हो जाते हैं, तो ऐसा इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम या एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों का संकेत हो सकता है। इसलिए, अगर समस्या कम होने के बजाय दिनों दिन बढ़ रही है, तो बेहतर है कि एक्सपर्ट से मिलें और अपना इलाज करवाएं।
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समस्या को कैसे मैनेज करें?
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- हाइड्रेटेड रहेंः पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले से ही पानी पीने की फ्रिक्वेंसी बढ़ा दें। वैसे भी पीरियड्स के दौरान काफी खून बह जाता है, जिससे शरीर में कमजोरी हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से बॉडी हाइड्रेटेड रहती है।
- बैलेंस्ड डाइट लेंः पीरियड्स के कुछ दिनों पहले या उस समयावधि के दौरान मौसमी फल, जैसे केले आदि खाना शुरू कर दें। इसके अलावा, ऐसी चीजें न खाएं, जिससे आंतों की संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
- शुगरी ड्रिंक न लेंः पीरियड्स में लूज मोशन की समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि शुगर युक्त ड्रिंक से दूरी बनाए रखें। ध्यान रखें कि शुगर युक्त ड्रिंक समस्या को ट्रिगर कर सकती हैं।
- तनाव से बचेंः अधिक तनाव के कारण पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याएं बढ़ जाती हैं, जैसे पेट दर्द, क्रैंपिंग और लूज मोशन। इसलिए, पीरियड्स से पहले तनाव को कम करने की कोशिश करें। इसके लिए रोजाना 10 मिनट मेडिटेशन कर सकती हैं।
कब जाएं डाॅक्टर के पास?
पीरियड्स में लूज मोशन हो, तो यह समस्या जल्दी ठीक भी हो जाती है। अगर आपको लगे कि लूज मोशन दो दिन में ठीक नहीं हो रहे हैं, तो तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं। इसके अलावा, अगर दवा लेने के बाद भी समस्या से राहत नहीं मिलती है, तो इसकी अनदेखी न करें। संभवतः यह समस्या पीरियड्स के कारण न हुई हो। कोई मेडिल कंडीशन इसकी ठोस वजह हो सकती है।
निष्कर्ष
पीरियड्स को लेकर हर महिला के निजी अनुभव होते हैं। कुछ महिलाओं को क्रैंपिंग बहुत तीव्र होती है, तो कुछ महिलाओं के लिए पीरियड्स पूरी तरह नाॅर्मल है। वहीं, कुछ महिलाओं को लूज मोशन जैसी परेशानी भी हो जाती है। ऐसा नहीं है कि इसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। हां, अगर आपको लगता है कि लूज मोशन किसी अन्य बीमारी के कारण हो रही है, तो बेहतर है कि जल्द से जल्द एक्सपर्ट से मिलकर अपना ट्रीटमेंट करवाएं।
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FAQ
क्या पीरियड्स के दौरान कैफीन पीने से दस्त की समस्या बढ़ सकती है?
हां, इसकी संभावना बढ़ जाती है। दरअसल, कैफीन आंतों की मांसपेशियों को उत्तेजित करता है और लैक्सेटिव (मल त्याग बढ़ाने वाले) के रूप में काम करता है। पीरियड्स में कैफीन का सेवन करने से आंतों की गतिशीलता बढ़ जाती है, जिससे लूज मोशन होने का जोखिम भी बढ़ता है।क्या पीरियड्स में दस्त होने पर नारियल पानी पीना सेफ है?
हां, दस्त के कारण शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स इम्बैलेंस हो जाता है। ऐसे में नारियल पानी या नींबू पानी का सेवन करने से डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है।
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Sep 18, 2026 13:41 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta