डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिनमें पेट और कमर के आसपास ढीलापन, पेल्विक हिस्से में भारीपन महसूस होना, बच्चेदानी का ढीला होना कई महिलाओं के लिए चिंता का कारण बन सकता है। ऐसे में इंटरनेट पर सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों में एक है कि बच्चेदानी को टाइट कैसे करें? इस बारे में नई दिल्ली, विकासपुरी के क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सीमा शर्मा बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय यानी यूट्रस का आकार काफी बढ़ता है और बच्चे के जन्म के बाद वह धीरे-धीरे अपने पहले के आकार की ओर लौटता है। प्रसव के बाद शरीर को ठीक होने में समय देना जरूरी है। हर महिला में रिकवरी की स्पीड एक जैसी नहीं होती है। बच्चेदानी को जल्दी टाइट करने के नाम पर बाजार में मिलने वाले तेल, क्रीम, पाउडर या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।
डिलीवरी के बाद बच्चेदानी को टाइट करने के लिए क्या करें?
डॉ. सीमा शर्मा के अनुसार, प्रसव के बाद बच्चेदानी यानी यूट्रस अचानक पहले जैसा नहीं होता लेकिन यह धीरे-धीरे सिकुड़ता जरूर है। स्तनपान कराने के दौरान शरीर में निकलने वाला ऑक्सीटोसिन गर्भाशय के संकुचन में मदद करता है, इसलिए स्तनपान के समय कुछ महिलाओं को पेट में ऐंठन महसूस हो सकती है। इसलिए प्रसव के तुरंत बाद पेट का बाहर निकला हुआ दिखना या शरीर में कमजोरी महसूस होना हमेशा किसी समस्या का संकेत नहीं होता। शरीर को ठीक होने के लिए पर्याप्त समय और आराम देना जरूरी है। डिलीवरी के बाद बच्चेदानी को टाइट करने के लिए कुछ हल्की एक्सरसाइज और अच्छी डाइट मदद कर सकती है।
1. बैलेंस डाइट
डिलीवरी के बाद शरीर को टिश्यू की मरम्मत और एनर्जी के लिए पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है। बच्चेदानी को मजबूत करने के लिए भोजन में दाल, दूध या अन्य प्रोटीन सोर्स, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करें। कब्ज से बचना भी जरूरी है, क्योंकि मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से पेल्विक फ्लोर पर दबाव बढ़ सकता है। अगर महिला स्तनपान करा रही है, तो पर्याप्त पानी और पौष्टिक भोजन लेना ज्यादा जरूरी हो जाता है।
2. पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज
प्रसव यानी डिलीवरी के बाद केवल बच्चेदानी यानी यूट्रस ही नहीं, बल्कि मूत्राशय और आंतों को सहारा देने वाली पेल्विक फ्लोर मसल्स भी कमजोर हो सकती हैं। इन्हें मजबूत करने के लिए कीगल एक्सरसाइज उपयोगी हो सकती हैं। शुरुआत में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को कुछ सेकंड के लिए सिकोड़कर फिर ढीला छोड़ने का अभ्यास किया जा सकता है। हालांकि, यदि प्रसव के दौरान समस्या, गंभीर चोट या सर्जरी हुई हो, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
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3. धीरे-धीरे फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं
डिलीवरी के बाद शरीर को आराम देने के साथ धीरे-धीरे एक्टिविटी बढ़ाना फायदेमंद होता है। नॉर्मल डिलीवरी और बिना किसी समस्या के मामलों में हल्की एक्टिविटी, जैसे धीरे-धीरे वॉक करने जैसी एक्टिविटी की जा सकती हैं। सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक्सरसाइज शुरू करने का समय अलग हो सकता है, इसे डॉक्टर की सलाह अनुसार शुरू करें। बहुत जल्दी भारी वजन उठाने या कठिन एक्सरसाइज शुरू करने से बचें। दर्द या असामान्य ब्लीडिंग होने पर एक्सरसाइज रोककर डॉक्टर से संपर्क करें।
4. पर्याप्त आराम और हेल्थ चेकअप
बच्चे के जन्म के बाद नवजात की देखभाल के कारण नींद पूरी न होना आम है, लेकिन जितना संभव हो आराम और नींद लेने की कोशिश करें। डिलीवरी के बाद नियमित हेल्थ चेकअप भी जरूरी है, ताकि यूट्रस के सिकुड़ने, ब्लीडिंग, घाव और पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याओं का समय पर पता लगाया जा सके।
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साल 2025 में Medicina जर्नल में प्रकाशित जानकारी के अनुसार-
- पेल्विक फ्लोर की मसल्स को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज प्रसव के दौरान गंभीर चोट (OASIS) का सामना करने वाली महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
- इन एक्सरसाइज से महिलाओं की मांसपेशियों की ताकत और उन्हें देर तक सिकोड़ कर रखने की क्षमता में सुधार हुआ है।
- इस स्टडी में यह भी सामने आया कि सही जानकारी और अभ्यास से महिलाओं को अपनी मांसपेशियों को ठीक से समझने और इस्तेमाल करने में मदद मिली।
- हालांकि, प्रसव के दो साल बाद भी गैस की समस्या पीड़ित महिलाओं में ज्यादा देखी गई लेकिन नियमित एक्सरसाइज से उनकी हेल्थ में सुधार हुआ। समय पर सही सलाह और एक्सरसाइज से प्रसव बाद की कई परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. सीमा शर्मा सलाह देती हैं कि बच्चे को जन्म देने के बाद महिला के शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगता है। प्रेग्नेंसी के दौरान यूट्रस का आकार काफी बढ़ जाता है और डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे यह वापस अपने सामान्य आकार में आने लगता है। इस दौरान पेट में हल्की ऐंठन जैसा दर्द और ब्लीडिंग होना सामान्य हो सकता है लेकिन अगर दर्द और ब्लीडिंग ज्यादा हो तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
निष्कर्ष
डिलीवरी के बाद बच्चेदानी को टाइट करने के लिए किसी एक घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय शरीर को नेचुरल रूप से ठीक होने का समय देना जरूरी है। पौष्टिक डाइट, पर्याप्त पानी, आराम, स्तनपान, उचित समय पर पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज और धीरे-धीरे बढ़ाई गई फिजिकल एक्टिविटी प्रसव के बाद हेल्दी रिकवरी में मदद कर सकती है। यदि प्रसव के बाद ब्लीडिंग, दर्द, भारीपन या पेशाब से जुड़ी समस्या बनी रहती है, तो गायनोकॉलोजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।
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FAQ
क्या नॉर्मल डिलीवरी के बाद योनि हमेशा ढीली हो जाती है?
डिलीवरी के बाद कुछ समय के लिए पेल्विक एरिया की मसल्स में कमजोरी या बदलाव महसूस हो सकता है, लेकिन शरीर में समय के साथ काफी रिकवरी भी होती है।पेल्विक फ्लोर कमजोर होने के क्या लक्षण हैं?
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर होने पर खांसने, छींकने, हंसने या वजन उठाने के दौरान पेशाब की कुछ बूंदें लीक होने की समस्या हो सकती है।सी सेक्शन के बाद क्या समस्याएं हो सकती हैं?
सी सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को पेट के टांके वाली जगह पर दर्द, इंफेक्शन, ज्यादा ब्लीडिंग, गैस व कब्ज, चलने-फिरने में कठिनाई और पीठ दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पूरी रिकवरी में 4 से 8 सप्ताह का समय लग सकता है।
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Aug 27, 2026 16:49 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Seema Sharma