Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या प्रेग्नेंसी में गर्भाशय खिसकने पर सामान्य डिलीवरी संभव है? जानें डॉक्टर से

गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का खिसकना (Uterine Prolapse) एक गंभीर स्थिति है। इसकी वजह से प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान कई समस्याएं हो सकती हैं। जानें, इनके बारे में।

जब गर्भाशय अपनी जगह से खिसक कर नीचे आ जाता है, तो उसे प्रोलैप्स कहते हैं। एडवांस्ड प्रोलैप्स में गर्भाशय का हिस्सा शरीर से बाहर भी महसूस हो सकता है। आमतौर पर प्रेग्नेंसी में गर्भाशय खिसकने के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसा बहुत दुर्लभ मामलों में होता है। इसके बावजूद, यह जरूरी है कि इस बारे में हमें बुनियादी जानकारी हो। बहरहाल, अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि प्रेग्नेंसी में गर्भाशय खिसकने पर सामान्य डिलीवरी हो सकती है या नहीं? इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता  से बात की। इस लेख को पूरा पढ़ना न भूलें।

गर्भाशय खिसकने पर सामान्य डिलीवरी संभव है?

is normal delivery possible with uterine prolapse 01 (18)

साल 2025 में Case Reports in Women's Health रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी में गर्भाशय खिसकने के बावजूद नाॅर्मल डिलीवरी संभव होती है, बशर्ते डिलीवरी के दौरान डॉक्टर गर्भाशय और उसके आसपास के अंगों (जैसे ब्लैडर) को वापस उनकी सही जगह पर रीस्टोर कर दें। इसके लिए डाॅक्टर कुछ विशेष तकनीकों को अपनाते हैं, ताकि बच्चे के निकलने के लिए रास्ता साफ हो सके। हालांकि, इसके साथ कई तरह की जटिलताएं जुड़ी हुई हैं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि गंभीर मामलों में डाॅक्टर कोई रिस्क नहीं लेते हैं और सिजेरियन डिलीवरी का रास्ता चुनते हैं।

इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में गर्भाशय खिसकने (Uterine Prolapse) से हो सकते हैं ये 4 गंभीर नुकसान, न बरतें लापरवाही

प्रेग्नेंसी में गर्भाशय खिसकने के नुकसान

गर्भाशय खिसकने पर डिलीवरी के दौरान कई तरह के जोखिम बढ़ जाते हैं, जैसे-

  1. प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताएंः गर्भाशय खिसकना अपने आप में एक गंभीर स्थिति है। इसमें समय पूर्व प्रसव, गर्भपात, ब्लैडर में खिंचाव के कारण पेशाब रुकना या संक्रमण और मेम्ब्रेन का समय से पहले फटना, इस तरह की कई समस्याएं हो सकती हैं।
  2. डिलीवरी से जुड़ी जटिलताएंः गर्भाशय खिसकने के कारण डिलीवरी में भी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे प्रसव के दौरान दिक्कतें होना, डिलीवरी में अधिक समय लगना, गर्भाशय ग्रीवा में गंभीर सूजन आना, गर्भाशय ग्रीवा का फटना आदि।
  3. डिलीवरी के बाद की परेशानियांः गर्भाशय खिसकने के कारण डिलीवरी के बाद महिलाओं को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है, यूटेराइन एटोनी (गर्भाशय का न सिकुड़ना), यूटेराइन इन्वर्जन (गर्भाशय का पलटना) और सेप्सिस यानी गंभीर संक्रमण हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: बच्चेदानी बाहर क्यों खिसकती है? डॉक्टर से जानें इसके 5 कारण

निष्कर्ष

अगर कोई महिला प्रेग्नेंसी प्लान कर रही है और अगर परिवार में प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय खिसकने का इतिहास है, तो जरूरी है कि आप काॅन्शस रहें। प्रेग्नेंसी से पहले ही अपने शरीर का संपूर्ण जांच करवाएं ताकि इस तरह की स्थिति को पहले से ही रोका जा सके।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या कीगल एक्सरसाइज से गर्भाशय के खिसकने को रोका जा सकता है?

    यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। हां, अगर गर्भावस्था से पहले और शुरुआती महीनों में कीगल एक्सरसाइज किया जाए, तो पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जो गर्भाशय को उसकी जगह पर बनाए रखने में मदद करती हैं।
  • प्रोलैप्स होने पर डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह कब देते हैं?

    यदि गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में बहुत अधिक सूजन हो, बच्चा नीचे आने में असमर्थ हो या मां की जान को जोखिम हो, तो डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दे सकते हैं।

Read Next

प्रेग्नेंसी में वजाइनल ब्लीडिंग: डॉक्टर से जानें तुरंत क्या करें और क्या नहीं

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    May 13, 2026 11:51 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 13, 2026 11:51 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 13, 2026 11:51 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content