Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी यूटरिन प्रोलैप्स हो सकता है? बता रहे हैं डॉक्टर

यूटेराइन प्रोलैप्स का रिस्क सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी होता है। हालांकि, इस स्थिति में यूटेराइन प्रोलैप्स का रिस्क कम होता है। इसके बावजूद, महिला को लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

यूटेराइन प्रोलैप्स एक गंभीर कंडीशन है। इसमें गर्भाशय अपनी जगह से खिसक कर नीचे की ओर आ जाता है। कई बार डिलीवरी के दौरान ऐसी कंडीशन हो जाती है। आमतौर पर यही माना जाता है कि वजाइनल डिलीवरी के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स का जोखिम अधिक होता है, जबकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद इसका जोखिम बिल्कुल नहीं होता है। सवाल यह है कि क्या वाकई सिजेरियन डिलीवरी के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स नहीं हो सकता है? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से इसकी सच्चाई।

क्या सिजेरियन डिलीवरी के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स हो सकता है?

हालांकि, सिजेरियन डिलीवरी में शिशु योनि के रास्ते नहीं, बल्कि पेट के रास्ते से निकलता है। यही कारण है कि लोगों को लगता है कि सी-सेक्शन में इसका जोखिम बिल्कुल नहीं होता है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि यह बिल्कुल सच नहीं है। सी-सेक्शन में भी यूटेराइन प्रोलैप्स का जोखिम होता है, इसलिए महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि भविष्य में इसके जोखिम को टाला जा सके।

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सिजेरियन डिलीवरी के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स के कारण

पेल्विक फ्लोर पर दबाव

प्रेग्नेंसी के दौरान जैसे-जैसे शिशु का वजन बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे शिशु का भार गर्भाशय पर पड़ता है। इसे होल्ड करने के लिए पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर काफी ज्यादा खिंचाव होने लगता है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं। यही कमजोरी सी-सेक्शन के बाद भी बनी रह सकती है, जो डिलीवरी के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स का कारण बनती है।

लंबे समय तक लेबर पेन

वैसे तो आजकल ज्यादातर मामलों में डॉक्टर महिला की कंडीशन देखकर पहले ही तय कर लेते हैं कि महिला की वजाइनल डिलीवरी होनी है या सी-सेक्शन। हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि जब महिला वजाइनल डिलीवरी की कोशिश करती है, लेकिन अचानक परिस्थितियां बिगड़ने पर उन्हें सी-सेक्शन के लिए जाना पड़ता है। इस तरह की स्थिति में महिला पहले ही लेबर पेन से जूझ रही होती हैं और डिलीवरी के लिए बार-बार जोर लगा रही होती है। इस प्रक्रिया से पेल्विक लिगामेंट्स पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे बाद में प्रोलैप्स का खतरा बढ़ जाता है।

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प्रसव के बाद

सी-सेक्शन के बाद रिकवरी के दौरान यदि महिला को पुरानी खांसी रहती है, गंभीर कब्ज की समस्या होती है, तो इस स्थिति में भी यूटेराइन प्रोलैप्स होने का जोखिम रहता है। यहां तक कि शौच के समय ज्यादा जोर लगाना या प्रसव के बाद से ही भारी वजन उठाने से पेट के अंदर का दबाव बढ़ जाता है। यह कमजोर पेल्विक पर दबाव डालता है, जिससे गर्भाशय के नीचे की ओर खिसकने का जोखिम बढ़ जाता है।

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निष्कर्ष

ऐसा नहीं है कि सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स का जोखिम नहीं होता है। हालांकि, वजाइनल डिलीवरी की तुलना में यह कम होता है। इसके बावजूद महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विशेषकर, पेल्विक एरिया को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाएं। साथ ही, गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद लापरवाही बिल्कुल न करें। अगर यूटेराइन प्रोलैप्स से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • सी-सेक्शन के बाद यूटेराइन प्रोलैप्स के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

    पेट के निचले हिस्से में भारीपन या खिंचाव महसूस होना, योनि से कुछ बाहर आने का एहसास होना और पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द होना।
  • क्या सी-सेक्शन के बाद कीगल एक्सरसाइज करना सुरक्षित है?

    सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद जब तक स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक न हो जाए, टांके सूख न जाएं, तब तक कोई भी वर्कआउट नहीं किया जााना चाहिए। कीगल एक्सरसाइज की शुरुआत से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 20, 2026 10:46 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 20, 2026 10:46 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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