डिलीवरी के बाद महिलाओं का शरीर काफी कमजोर हो जाता है, जिस वजह से उन्हें रिकवरी में काफी समय लगता है। ऐसे में उन्हें अलग-अलग तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इनमें से एक है, पेल्विक एरिया में दर्द होना। यहां सवाल उठता है कि आखिर डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में दर्द कब तक होता है और कब तक इस दर्द को सामान्य समझा जा सकता है? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
डिलीवरी के बाद कब तक पेल्विक एरिया में दर्द होना नॉर्मल है?

साल 2025 में Journal of Pain Research में प्रकाशित पेपर के अनुसार, डिलीवरी के बाद महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से गुजरना पड़ता है। इनमें ब्रेस्ट पेन, लो बैक पेन और पेल्विक एरिया में दर्द आदि शामिल हैं। बहरहाल, जहां तक सवाल इस बात का है कि डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में दर्द होना कब तक नॉर्मल होता है? इस बारे में डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "डिलीवरी के बाद शुरुआती 7 से 14 दिनों तक पेल्विक एरिया में तीव्र दर्द हो सकता है। हालांकि, इसके बाद दर्द पूरी तरह ठीक नहीं होता है, इसे समय लगता है। तकरीबन 2 से 6 हफ्तों तक पेल्विक एरिया में हल्का-फुल्का दर्द बना रहता है।"
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डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में दर्द होने पर कब जाएं डॉक्टर के पास?
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "जैसा कि शुरू में हम इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि डिलीवरी के बाद 2 से 6 हफ्तों तक पेल्विक एरिया में हल्का दर्द रह सकता है। इसका मतलब है कि 6 हफ्ते बाद दर्द पूरी तरह ठीक हो जाना चाहिए। अगर आपका दर्द 7-8 हफ्ते के अंदर पूरी तरह ठीक नहीं होता है, तो इसे हल्के में न लें। यह किसी न किसी तरह की अन्य समस्या का संकेत हो सकता है।"
डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में दर्द के कारण
1. पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों का तनावः वजाइनल डिलीवरी के बाद कई बार पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां और नर्व्स अत्यधिक खिंच जाती हैं या उनमें चोट लग जाती है। ऐसी स्थिति में अगर महिला को पेरिनियल टीयर्स (पेरिनियम का फटना) का अनुभव हुआ हो, तो उन्हें लंबे समय तक पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों में अक्सर अक्सर दर्द का एहसास हो सकता है।
2. टिश्यूज का ठीक होनाः पेरिनियल टीयर्स ही नहीं, बल्कि एपिसियोटॉमी (प्रसव के दौरान चीरा) या सी-सेक्शन के कारण भी पेल्विक एरिया में दर्द होने लगता है। जब नए टिश्यूज की रिकवरी होती है, तो वे अक्सर सामान्य टिश्यूज की तुलना में कम लचीले होते हैं, जो आसपास के हिस्सों को खींचता है और पेल्विक फ्लोर में दर्द पैदा करती है।
3. हार्मोनल बदलावः गर्भावस्था के दौरान रिलैक्सिन हार्मोन पेल्विक एरिया के लिगामेंट्स और टिश्यूज को ढीला कर देता है ताकि डिलीवरी आसान हो सके, लेकिन डिलीवरी के बाद ये टिश्यूज कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को सही सपोर्ट देने में कठिनाई होती है। यही नहीं, डिलीवरी के तुरंत बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे योनि और पेल्विक एरिया के टिश्यूज पतले व सूखे हो जाते हैं। उनकी प्राकृतिक नमी और लचीलापन कम हो जाता है। यह भी तकलीफ बढ़ाने के लिए जिम्मेदार कारक है।
4. पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्सः प्रसव के बाद जब पेल्विक एरिया के अंग (जैसे गर्भाशय या मूत्राशय) अपनी जगह से नीचे खिसक जाते हैं, तो इससे पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों में दर्द होने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये खिसके हुए अंग नीचे की तरफ भारी दबाव बनाने लगते हैं, जिससे पहले से ही कमजोर, खिंची हुई या चोटिल मांसपेशियों और नसों पर और ज्यादा खिंचाव या तनाव बढ़ने लगता है।
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डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में दर्द से राहत के लिए क्या करें?
1. सिकाई करेंः डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में अधिक दर्द हो और सूजन भी बनी हुई हो, तो आप शुरुआती 48 घंटों के दौरान पेरिनियल क्षेत्र पर 10 से 15 मिनट के लिए कोल्ड पैक से सिकाई कर सकते हैं। वहीं, मांसपेशियों के खिंचाव को शांत करने और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए गुनगुने पानी से सिकाई करें।
2. बैठने के तरीके में बदलाव करेंः डिलीवरी के बाद उठने-बैठने को लेकर महिलाओं को काफी सतर्कता बरतनी चाहिए। विशेषकर, बैठने के तरीकों पर जोर देना चाहिए। बैठने के दौरान टेलबोन और पेरिनियम पर अधिक दबाव न दें। बैठने के लिए तकिए या रिंग कुशन का उपयोग करें।
3. समय पर दवा लेंः डिलीवरी के बाद पेल्विक एरिया में दर्द हो, तो उसे इग्नोर न करें। डॉक्टर से संपर्क कर दवा लें। दर्द निवारक और सूजन रोधी सुरक्षित दवाओं से प्रभावित हिस्से में दर्द कम हो सकता है।
4. शौच के तनाव को कम करेंः डिलीवरी के बाद कोशिश करें कि कब्ज की समस्या न हो। इसके लिए नियमित रूप से फाइबर युक्त चीजों का सेवन करें ताकि शौच करते समय अधिक तनाव न लगाना पड़े।
5. कीगल एक्सरसाइज करेंः डॉक्टर से अनुमति मिलने पर डिलीवरी के 2 से 4 सप्ताह बाद पेल्विक फ्लोर से जुड़ी एक्सरसाइज करें। इससे भी दर्द में कमी आने लगती है।
6. रेस्ट करेंः पेल्विक एरिया में हो रहे दर्द को नजरअंदाज करने से बचें। इसके इतर, डिलीवरी के बाद कुछ समय तक लगातार रेस्ट करें। इससे आपकी समस्या काफी कम हो जाएगी।
निष्कर्ष
अगर डिलीवरी के बाद कई 7-8 हफ्तों से भी अधिक समय तक पेल्विक एरिया में दर्द बना रहे, तो इस स्थिति को इग्नोर किया जाना सही नहीं है। कई बार यह अन्य समस्या की ओर इशारा करता है, जैसे पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स। ध्यान रखें कि डिलीवरी के 7-8 सप्ताह बाद भी दर्द बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना ट्रीटमेंट करवाएं।
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FAQ
क्या डिलीवरी के बाद पेल्विक पेन से राहत पाने के लिए तुरंत कीगल एक्सरसाइज कर सकते हैं?
बिना डॉक्टर की सलाह पर कीगल एक्सरसाइज शुरू नहीं करनी चाहिए।डिलीवरी के कितने समय बाद पेल्विक पेन होने पर पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी (Pelvic Floor Physical Therapy) ली जा सकती है?
आमतौर पर प्रसव के 6 हफ्ते बाद पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी की शुरुआत की जा सकती है। हालांकि, डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।
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Sep 01, 2026 17:16 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta