प्रेग्नेंसी के बाद डिलीवरी होने पर महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इनमें सबसे ज्यादा कॉमन समस्या होती है पेट फूलने की। दरअसल, प्रेग्नेंसी के तुरंत बाद महिलाओं को हाथ, पैर या चेहरे पर सूजन दिखाई देने लगती हैं। कई बार महिलाएं इसे पोस्टपार्टम ब्लोटिंग मान लेती है, लेकिन यह शरीर में पानी जमा होने की दिक्कत हो सकती है। इस बारे में हमने Dr. Chetna Jain, Director Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon से बात की। उन्होंने बताया कि दोनों स्थितियां अलग-अलग होती है और अगर सही तरीके से पहचान हो जाए, तो इसे बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
पोस्टपार्टम ब्लोटिंग क्या है?
Dr. Chetna Jain कहती हैं, “पोस्टपार्टम ब्लोटिंग आमतौर पर डाइजेशन से जुड़ी होती है और इसमें पेट में गैस बनने, भारीपन महसूस होने, खिंचाव या पेट के फूले हुए लगने जैसी शिकायतें हो सकती हैं। डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव, फिजिकल एक्टिविटी न करने, कब्ज और डाइजेशन सिस्टम धीमा होना इसके कारण हो सकते हैं। कई महिलाओं को लगता है कि डिलीवरी के बाद भी उनका पेट नॉर्मल नहीं हुआ है, लेकिन इसका कारण ब्लोटिंग भी हो सकता है। इस कंडीशन में महिलाओं को खाना खाने के बाद यह समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।”
वॉटर रिटेंशन में क्या होता है?
Dr. Chetna Jain के मुताबिक, “वॉटर रिटेंशन का मतलब है शरीर के टिश्यू में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो जाता है ताकि मां और शिशु दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें, लेकिन डिलीवरी के बाद यह अतिरिक्त पानी धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकल जाता है। अगर महिलाओं को पैरों, टखनों, हाथों और चेहरे पर सूजन दिखाई दे या फिर कुछ महिलाओं को अंगूठियां, जूते या चप्पलें पहनने में दिक्कत आने लगे, तो यह वॉटर रिटेंशन की समस्या हो सकती है।”

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पोस्टपार्टम ब्लोटिंग या वॉटर रिटेंशन में कैसे फर्क करें?
Dr. Chetna Jain का कहना है, “पोस्टपार्टम ब्लोटिंग और वॉटर रिटेंशन के लक्षण अलग-अलग होते हैं। ब्लोटिंग में पेट में गैस, भारीपन और फूलने जैसी समस्याएं हो सकती है, वहीं वॉटर रिटेंशन में हाथ, पैर, टखनों और चेहरे पर सूजन दिखाई देती है। अगर कपड़े पेट के आसपास तंग होने लगे, तो कारण ब्लोटिंग हो सकता है और अगर जूते, चप्पल या अंगूठियां तंग होने लगें, तो यह वॉटर रिटेंशन का संकेत हो सकता है।”
पोस्टपार्टम ब्लोटिंग या वॉटर रिटेंशन से कैसे राहत पाएं?
Dr. Chetna Jain ने सलाह दी कि पोस्टपार्टम ब्लोटिंग को कम करने के लिए फाइबर से भरपूर खाना फायदेमंद हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, रेगुलर वॉक करना और कब्ज से बचाव करना भी मददगार माना जाता है। वहीं वॉटर रिटेंशन को कम करने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। नमक को बैलेंस रखना, पैरों को ऊंचा रखकर आराम करना और हल्की फिजिकल एक्टिविटी करने से सूजन कम होने में मदद मिल सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि डिलीवरी के बाद शुरुआती हफ्तों में बार-बार पेशाब आने और सामान्य से ज्यादा पसीना आने से शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ निकल जाता है।
निष्कर्ष
Dr. Chetna Jain कहती हैं कि अगर हल्की सूजन और ब्लोटिंग होना बहुत ही आम बात है, लेकिन अगर सूजन बढ़ने लगे और सांस लेने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। वैसे तो डिलीवरी के बाद पोस्टपार्टम ब्लोटिंग और वॉटर रिटेंशन दोनों ही नॉर्मल कंडीशन्स हैं, लेकिन इसके लक्षणों की पहचान करके सही इलाज कराना जरूरी है।
FAQ
क्या स्तनपान कराने से भी ब्लोटिंग और वॉटर वेट कम होता है?
ब्रेस्टफीडिंग कराने से शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज होता है, जो गर्भाशय को तेजी से सिकोड़कर अपने पुराने आकार में लाता है। साथ ही, ब्रेस्टफीडिंग से अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुधरता है, जिससे सूजन और ब्लोटिंग दोनों तेजी से कम होते हैं।डॉक्टर के अनुसार पैरों की सूजन कम करने के लिए सोते समय क्या करना चाहिए?
जब भी आप बैठें या सोएं, अपने पैरों के नीचे एक से दो तकिए रखकर उन्हें दिल के स्तर से थोड़ा ऊपर रखें। इससे पैरों में जमा पानी वापस ऊपर की ओर सर्कुलेट होता है और सूजन में तुरंत आराम मिलता है। साथ ही, डॉक्टर की सलाह पर हल्की वॉक जरूर करें।
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Jun 05, 2026 17:28 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jun 05, 2026 17:28 IST
Modified By : Aneesh RawatJun 05, 2026 17:28 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetna Jain