Wed Sep 16, 2026 | 05:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Manjeet Arora , Consultant – Obstetrics & Gynaecology

नॉर्मल डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग बढ़ना कब सामान्य और कब खतरे का संकेत? जानें डॉक्टर से

नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिलाओं को शुरुआत में हैवी ब्लीडिंग होती है और कुछ हफ्ते बाद धीरे-धीरे कम होने लगती है। अगर नॉर्मल डिलीवरी के बाद हफ्ते बाद भी ब्लड फ्लो ज्यादा हो, तो क्या यह सामान्य है या चिंता की बात है? इस बारे में डॉक्टर ने विस्तार से इस लेख में बताया है।

बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिनों तक ब्लीडिंग होना बहुत आम बात है। इस कंडीशन को लोशिया कहते हैं। हालांकि, लोग इसे ब्लीडिंग समझते हैं, लेकिन डिलीवरी के बाद होने वाली यह ब्लीडिंग शरीर की रिकवरी के प्रोसेस का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। शुरुआत में ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है, लेकिन बाद में इसकी मात्रा कम होने लगती है, लेकिन कई महिलाओं को ब्लड फ्लो बहुत ज्यादा होने लगता है। ऐसे में क्या यह सिर्फ पोस्टपार्टम ब्लीडिंग समझना सही है? इस बारे में Dr. Manjeet Arora, Senior Clinical Director, Department of Obstetrics and Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Delhi कहती हैं कि अगर अचानक ब्लीडिंग बढ़ जाए और साथ में चक्कर, कमजोरी और तेज धड़कन जैसी समस्याएं होने लगे, तो यह पोस्टपार्टम हैमरेज (postpartum haemorrhage -PPH) हो सकता है।

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कब तक होती है?

Cleveland Clinic के अनुसार, लोचिया यानी डिलीवरी के बाद आमतौर पर ब्लीडिंग 6 हफ्ते तक रह सकती है और कुछ मामलों में यह आठ हफ्ते तक भी हो सकती है। आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद 2 हफ्ते तक ब्लड जैसा डिस्चार्ज हो सकता है, जो धीरे-धीरे कम होने लगता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि लोचिया के अंतिम स्टेज में नाममात्र भी ब्लीडिंग नहीं होती है।

Dr. Manjeet Arora का कहना है, “डिलीवरी के कुछ हफ्ते तक ब्लीडिंग ज्यादा लाल रंग की हो सकती है। कुछ हफ्तों के बाद इसका रंग लाल से भूरा या हल्का होता जाता है। इस दौरान छोटे-छोटे ब्लड क्लॉट्स भी दिखाई दे सकते हैं। अगर ब्लीडिंग लगातार बढ़ती जाए, या पहले कम और बाद में अचानक से काफी ज्यादा हो जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”

ज्यादा ब्लीडिंग होना कब खतरे का संकेत हो सकता है?

Dr. Manjeet Arora ने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ खून का रंग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि ब्लीडिंग सामान्य है या नहीं। उस दौरान महिलाओं में होने वाले लक्षणों और ब्लीडिंग की मात्रा देखकर पता किया जाता है कि महिला को मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत है या नहीं। आमतौर पर डिलीवरी के बाद ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

  • ब्लीडिंग अचानक बहुत ज्यादा हो जाए।
  • कुछ ही घंटों बाद पैड बहुत तेजी से भरने लगे और बदलना पड़े।
  • बड़े-बड़े खून के थक्के निकल रहे हों।
  • पहले कम ब्लीडिंग हो और फिर अचानक बढ़ जाए।
  • चक्कर आने लगे या बेहोशी जैसा महसूस हो।
  • हार्ट बीट बहुत तेज हो जाए।
  • असामान्य कमजोरी महसूस हो।
  • सांस लेने में तकलीफ होने लगे।

bleeding after normal delievery in hindi

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बहुत ज्यादा ब्लीडिंग (पोस्टपार्टम हैमेरेज) आने का कारण

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पोस्टपार्टम हैमरेज होने के कई कारण हो सकते हैं।

  • गर्भाशय का जुड़वा बच्चे होने के कारण बहुत ज्यादा फैलना
  • बहुत ज्यादा लंबा लेबर दर्द होना
  • यूटरस की बनावट में दिक्कत
  • फाइब्रॉयड्स होना
  • प्लेसेंटा प्रेविया
  • यूरिन ब्लैडर का बहुत ज्यादा भर जाना
  • डिलीवरी के बाद गर्भनाल के टुकड़े या रक्त के थक्के यूटरस में रहना
  • गर्भाशय का उल्टा बाहर निकल आना
  • प्रेग्नेंसी के दौरान प्री-एक्लेम्पसिया या थक्के रोकने की दवा लेना

Dr. Manjeet Arora कहती हैं, “कई महिलाएं मान लेती हैं कि अगर एक बार ब्लीडिंग कम हो जाए, तो खतरा कम हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं होता। कई बार पोस्टपार्टम हैमरेज 24 घंटे के बाद से लेकर 12 हफ्तों तक हो सकता है। हालांकि, कई मामलों में देखा गया है कि ब्लीडिंग के साथ 100 बुखार, बढ़ता हुआ पेट दर्द या डिस्चार्ज में बदबू हो, तो तुरंत मेडिकल चेकअप कराना चाहिए। खुद से एंटीबायोटिक दवा न लें।”

पोस्ट हैमरेज से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Dr. Manjeet Arora ने कहा, “डिलीवरी के बाद महिलाओं को ब्लीडिंग कितनी हो रही है, यह जानने के लिए पैड चेक करना चाहिए कि कितनी देर में इसे बदलने की जरूरत पड़ रही है। इसके अलावा, टैम्पोन का इस्तेमाल पोस्टपार्टम डिलीवरी के बाद न करें, क्योंकि इससे इंफेक्शन होने का रिस्क बढ़ सकता है। शरीर को पर्याप्त आराम दे और शरीर को रिकवरी का समय दें।”

WHO के अनुसार, पोस्टपार्टम हैमरेज से बचाव के लिए महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान एनीमिया की समय पर जांच करानी चाहिए।
  • प्रेग्नेंसी के तीसरी तिमाही में गर्भाशय को सिकुड़ने वाली दवाएं, गर्भानल की जल्द क्लैम्पिंग और कंट्रोल्ड कॉर्ड ट्रैक्शन होने पर खास ध्यान देना चाहिए।
  • हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करना जरूरी है।

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निष्कर्ष
अगर डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग अचानक तेज हो जाए, महिला को चक्कर, कमजोरी, तेज धड़कन या सांस लेने में तकलीफ होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर महिला इसे पोस्टपार्टम समझकर इग्नोर करती है, तो इससे महिला को फिजिकल और मेंटल कई समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए समय रहते हैवी ब्लीडिंग का इलाज कराना जरूरी है।

FAQ

  • क्या स्तनपान कराने से डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग अचानक बढ़ जाती है?

    स्तनपान कराते समय शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है। यह हार्मोन गर्भाशय में सिकुड़न पैदा करता है, जिससे रुका हुआ खून बाहर निकलता है। यह सामान्य है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।
  • क्या डिलीवरी के बाद पेट पर बेल्ट बांधने या मालिश कराने से ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है?

    अगर डिलीवरी के तुरंत बाद पेट पर बहुत तेज दबाव डालकर मालिश कराई जाए, तो गर्भाशय की आंतरिक नसों को नुकसान पहुंच सकता है और ब्लीडिंग अचानक बढ़ सकती है। मालिश हमेशा हल्की और डॉक्टर की सलाह के बाद ही करानी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 16, 2026 16:00 IST

    Published By : Aneesh Rawat
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