Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

ब्रेस्ट को हेल्दी रखने के लिए हर मह‍िला को अपनानी चाहिए ये 5 आदतें, आज से ही करें शुरुआत

ब्रेस्‍ट को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए हर उम्र में मह‍िलाओं को कुछ खास आदतों को अपनाना चाह‍िए ताक‍ि स्‍तनों में होने वाले बदलावों का पता चले और ब्रेस्‍ट हेल्‍थ अच्‍छी रहे। जानें मह‍िलाओं के ल‍िए कौन सी आदतें हैं जरूरी?

मह‍िलाओं की सेहत से जुड़ा एक खास पहलू है ब्रेस्‍ट हेल्‍थ यानी स्‍तनों का स्‍वास्‍थ्‍य। अक्‍सर मह‍िलाएं शरीर के अन्‍य ह‍िस्‍सों के मुकाबले, ब्रेस्‍ट की सेहत पर गौर नहीं करतीं। जबक‍ि यह मह‍िलाओं के शरीर का एक संवेदनशील ह‍िस्‍सा है ज‍िससे एक्‍सट्रा केयर की जरूरत होती है। ब्रेस्ट हेल्थ के लिए महंगे प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती, बल्‍क‍ि रोजाना की कुछ आसान आदतें ब्रेस्‍ट हेल्‍थ को बेहतर बना सकती हैं। आइए जानते हैं ब्रेस्‍ट को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए मह‍िलाओं को कौन-कौन सी आदतें अपनानी चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव की शुरुआत स्‍वस्‍थ आदतों से होती है। कई आदतें हैं ज‍िनकी मदद से ब्रेस्‍ट कैंसर के जोख‍िम को कम कर सकते हैं और ब्रेस्‍ट को स्‍वस्‍थ बनाए रख सकते हैं। जैसे-

  • अल्‍काेहल और धूम्रपान से परहेज।
  • हेल्‍दी वजन बनाए रखना और फ‍िजि‍कली एक्‍ट‍िव होना।
  • श‍िशु को स्‍तनपान कराना और हेल्‍दी डाइट लेना।

उम्र, पीर‍ियड्स, गर्भावस्था, हार्मोनल बदलाव और स्‍तनपान के दौरान ब्रेस्‍ट में बदलाव होना सामान्‍य है, लेक‍िन ब्रेस्‍ट में असामान्‍य बदलाव को जानना जरूरी है। जब हमें इन बदलावों की जानकारी होगी, तो इलाज आसान हो जाएगा। यह जानकारी अच्‍छी आदतों की मदद से पता चलती है। आइए जानते हैं ब्रेस्‍ट हेल्‍थ से जुड़ी कुछ अच्‍छी आदतों के बारे में-

1. ब्रेस्ट और निप्पल की नियमित सफाई करें

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नहाते समय ब्रेस्‍ट की त्‍वचा को साफ करने पर गौर करें। रोज नहाने के दौरान, ब्रेस्‍ट और न‍िप्‍पल की त्‍वचा के आस-पास की त्‍वचा को पानी और साबुन की मदद से धीरे-धीरे साफ करें। ब्रेस्‍ट एर‍िया को साफ करने के बाद मुलायम तौल‍िए से त्‍वचा को रगड़ने के बजाय हल्‍के हाथों से सुखाएं। ब्रेस्‍ट पर ज्‍यादा साबुन, स्‍क्रब या तेज खुशबू वाले प्रोडक्‍ट का इस्‍तेमाल न करें क्‍योंक‍ि इससे सेंस‍िट‍िव त्‍वचा में ड्राईनेस और जलन हो सकती है।

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2. ब्रा रोज बदलें और सही साइज चुनें

ब्रेस्‍ट को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए रोजाना ब्रा को बदलें। जरूरत होने पर एक से अध‍िक बार भी बदल सकते हैं। द‍िनभर ब्रा पहनने के बाद ब्रा में पसीना, त्‍वचा का ऑयल, गंदगी जमा हो सकती है इसल‍िए न‍ियम‍ित रूप से ब्रा को बदलें और साफ ब्रा पहनें। ज्‍यादा टाइट या ढीली ब्रा पहनने के बजाय सही साइज वाली ब्रा को चुनें। ब्रा का स्‍ट्रैप ज्‍यादा टाइट नहीं होना चाह‍िए। अगर ब्रा पहनने के बाद लाल न‍िशान या असहजता महसूस हो, तो फ‍िट‍िंग दोबारा चेक करें। क‍िसी भी मौसम में कॉटन फैब्र‍िक की ब्रा पहनना ही त्‍वचा के ल‍िए ज्‍यादा सुरक्ष‍ित माना जाता है।

3. सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िनेशन की आदत बनाएं

ब्रेस्‍ट को स्‍वस्‍थ रखने के ल‍िए उसमें होने वाले बदलावों पर गौर करना जरूरी है। समय-समय पर सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िनेशन करें। शीशे के सामने ब्रेस्‍ट के आकार और त्‍वचा को देखें। अगर हाथ लगाने से गांठ जैसा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। इसके अलावा त्‍वचा में बदलाव, न‍िप्‍पल से असामान्‍य ड‍िस्‍चार्ज हो, तो भी डॉक्‍टर से सलाह लें।

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4. ब्रेस्ट के नीचे नमी जमा न होने दें

ब्रेस्‍ट के नीचे वाले ह‍िस्‍से को पसीने और नमी से बचाना चाह‍िए, वरना इससे इंफेक्‍शन हो सकता है। अगर ब्रेस्‍ट के नीचे का ह‍िस्‍सा अक्‍सर गीला रहता है, तो इस पर गौर करने की जरूरत है। खासकर उमस वाले मौसम में। नमी से त्‍वचा में रेडनेस, खुजली, जलन और फंगल इंफेक्‍शन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। नहाने के बाद ब्रेस्‍ट को अच्‍छी तरह से ड्राई करें। पसीना आने के बाद ब्रा को बदल लें और बहुत टाइट ब्रा पहनने से बचें, इससे पसीना ज्‍यादा नहीं आएगा।

5. ब्रेस्ट की त्वचा में बदलाव पर गौर करें

ब्रेस्‍ट की त्‍वचा की न‍ियम‍ित जांच करें। समय-समय पर ब्रेस्‍ट की त्‍वचा में बदलाव पर गौर करें। ब्रेस्‍ट की त्‍वचा में असामान्‍य गांठ, रेडनेस, सूजन पर गौर करें। हालांक‍ि, त्‍वचा में बदलाव के पीछे हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होती, ले‍क‍िन बदलावों को नजरअंदाज न करें।

न‍िष्‍कर्ष:

ब्रेस्‍ट और न‍िप्‍पल की न‍ियम‍ित सफाई करें, रोजाना ब्रा बदलें और सही साइज चुनें, खुशबू वाले क‍िसी प्रोडक्‍ट को ब्रेस्‍ट पर अप्‍लाई न करें, समय-समय पर सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िनेशन करें, ब्रेस्‍ट के नीचे नमी को जमा होने न दें और ब्रेस्‍ट की त्‍वचा में बदलाव पर गौर करें। गांठ, रेडनेस, खुजली या जलन होने पर डॉक्‍टर से सलाह लें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या ब्रेस्ट में दर्द होना सामान्य है?

    पीर‍ियड्स के आसपास हार्मोनल बदलाव होते हैं ज‍िसके कारण ब्रेस्‍ट में दर्द हो सकता है, लेक‍िन दर्द बार-बार हो या ब‍िना क‍िसी कारण के हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • निप्पल से डिस्चार्ज हो तो क्या करें?

    गर्भावस्था और स्तनपान में दूध जैसा डिस्चार्ज सामान्य हो सकता है, लेकिन इसके अलावा निप्पल से निकलने वाले डिस्चार्ज को डॉक्टर को दिखाना चाहिए। हालांक‍ि, इसके पीछे हमेशा गंभीर बीमारी नहीं होता, लेकिन जांच जरूरी है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 31, 2026 16:52 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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