Fri Sep 11, 2026 | 06:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

बार-बार मिसकैरेज होना इनफर्टिलिटी से कैसे अलग है? डॉक्टर से जानें क्या है इनका इलाज

इनफर्टिलिटी के कारण कंसीव करने में दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन यह बार-बार होने मिसकैरेज की समस्या से अलग हैं। आइए, जानते हैं इनके बीच क्या फर्क है?

जब किसी महिला का बार-बार मिसकैरेज होता है, तो लोग उसे बांझपन या इनफर्टिलिटी से जोड़कर देखने लगते हैं। मिसकैरेज होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, इसे बांझपन कहना सही नहीं है। अगर किसी को बार-बार मिसकैरेज हो रहा है, तो इलाज के जरिए इसको ठीक किया जा सकता है और कपल भविष्य में पेरेंट्स बनने के अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। आइए, वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं कि मिसकैरेज और बांझपन में क्या फर्क है और इनका इलाज कैसे संभव है?

बांझपन और बार-बार हो रहे मिसकैरेज में फर्क

बांझपन यानी इनफर्टिलिटी उस स्थिति को कहते हैं, जब महिला एक साल या इससे अधिक समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही है, लेकिन नहीं कर पा रही है। वहीं, बार-बार मिसकैरेज होने का मतलब है कि महिला कंसीव कर रही है, लेकिन खराब स्वास्थ्य या गर्भाशय से जुड़ी परेशानी के कारण गर्भावस्था पूरे समय बनी नहीं रहती है। कुछ ही महीनों में अपने आप गर्भपात हो जाता है।

बांझपन और बार-बार हो रहे मिसकैरेज के कारण

understanding the difference between recurrent miscarriage and infertility 1 (13)

बांझपन के कारण

ओव्यूलेशन डिसऑर्डरः जब अंडे ठीक से नहीं बनते या समय पर रिलीज नहीं होते हैं, तो उसे ओव्यूलेशन डिसऑर्डर कहा जाता है। ऐसा थायराइड की समस्या के कारण हो सकता है।

फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेजः इस स्थिति में गर्भाशय और अंडाशय को जोड़ने वाली नली में रुकावट पैदा हो जाती है। ऐसा यह पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज या किसी इंफेक्शन की वजह से हो सकता है। इसमें स्पर्म और अंडे का मिलन नहीं हो पाता।

एंडोमेट्रियोसिसः यह एक तरह की मेडिकल कंडीशन है, जिसमें गर्भाशय के अंदरूनी हिस्से में बनने वाले ऊतक गर्भाशय से बाहर (जैसे ओवरी या ट्यूब्स पर) बढ़ने लगते हैं, जिससे प्रजनन अंगों को नुकसान होने लगता है

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बार-बार मिसकैरेज के कारण

महिलाओं में बार-बार होने वाले मिसकैरेज का मुख्य कारण क्रोमोसोमल या जेनेटिक असामान्यताएं होती हैं। इसकी वजह से भ्रूण का विकास ठीक से नहीं हो पाता। डाॅ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "गर्भाशय की बनावट में जन्मजात खराबी या रसौली, एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम जैसी ब्लड क्लॉटिंग की बीमारियां जो प्लेसेंटा में खून के बहाव को रोकती हैं और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी जैसी कई परेशानियां बार-बार मिसकैरेज का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, अधिक उम्र भी मिसकैरेज का एक कारण होती है।"

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बांझपन और बार-बार हो रहे मिसकैरेज का इलाज

दोनों ही स्थितियां एक-दूसरे से अलग हैं और इनका इलाज भी एक-दूसरे से भिन्न होता है। आमतौर पर महिला की कंडीशन के अनुसार डाॅक्टर ट्रीटमेंट करते हैं, जैसे बांझपन की स्थिति में डॉक्टर ओव्यूलेशन ट्रैकिंग आदि तकनीकों से महिला को गर्भवती होने में मदद करते हैं। वहीं, जब किसी का बार-बार गर्भपात हो रहा है, तो डॉक्टर उसके कारण को जानने पर अधिक जोर देते हैं। कारण जानने के बाद ट्रीटमेंट और भ्रूण की रक्षा के लिए हार्मोन थेरेपी, जेनेटिक टेस्टिंग या सर्जरी आदि की मदद लेते हैं।

निष्कर्ष

इनफर्टिलिटी को गर्भधारण न कर पाने की समस्या कहा जाता है, लेकिन दोनों को एक नहीं कहा जा सकता है। दोनों परेशानियां एक-दूसरे से अलग हैं और दोनों के ट्रीटमेंट भी अलग हो सकते हैं। अगर महिला समय पर अपना इलाज करवा ले, तो महिला कंसीव करने में सफल हो सकती हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि कई बार तनाव की वजह से भी कंसीव करने में समस्या हो सकती है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • कितनी बार गर्भपात होने पर बार-बार होने वाला गर्भपात माना जाता है?

    अगर किसी महिला का लगातार 2 या 3 बार अपने आप गर्भपात हो जाए, तो उसे रिकरेंट मिसकैरेज कहा जाता है।
  • क्या बांझपन का इलाज कराने के बाद गर्भपात का खतरा रहता है?

    फर्टिलिटी इलाज से गर्भधारण होने के बाद भी गर्भपात का सामान्य खतरा बना रहता है, क्योंकि दोनों के शारीरिक कारण अलग हो सकते हैं।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 20, 2026 10:08 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 20, 2026 10:08 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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