Fri Oct 23, 2026 | 09:36 AM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

पहली तिमाही में गर्भपात होने पर नजर आते हैं ये 5 संकेत, न करें नजरअंदाज

पहली तिमाही में गर्भपात होने का जोखिम काफी ज्यादा होता है। यही कारण है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को सबसे ज्यादा शुरुआती महीनों में ही सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस लेख में हम पहली तिमाही में गर्भपात के कुछ लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें जानकर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
पहली तिमाही में गर्भपात होने पर नजर आते हैं ये 5 संकेत, न करें नजरअंदाजपहली तिमाही में गर्भपात होने पर नजर आते हैं ये 5 संकेत, न करें नजरअंदाज

गर्भावस्था की शुरुआत हर महिला के लिए उत्साह के साथ-साथ चिंता का दौर भी होती है। खासकर पहली तिमाही में हल्का पेट दर्द, ऐंठन या स्पॉटिंग होने पर अक्सर मन में सबसे पहला सवाल आता है—क्या यह गर्भपात का संकेत है? हालांकि, शुरुआती गर्भावस्था में हर ब्लीडिंग या क्रैम्पिंग का मतलब गर्भपात नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में। इस संबंध में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "पहली तिमाही में वजाइनल ब्लीडिंग को देखकर तुरंत गर्भपात मान लेना सही नहीं है। कई बार हल्की स्पॉटिंग के बावजूद प्रेग्नेंसी  सामान्य रूप से आगे बढ़ती है। लेकिन ब्लीडिंग के साथ तेज दर्द, लगातार क्रैम्प्स या टिश्यू जैसा कुछ बाहर निकल रहा हो, तो महिला को बिना देरी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।" American College of Obstetricians and Gynecologists ने भी इस बात की पुष्टि की है कि 80% से अधिक गर्भपात पहली तिमाही (13 सप्ताह से पहले) में ही होते हैं।

पहली तिमाही में गर्भपात के संकेत- Miscarriage Ke Lakshan

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1. ब्लीडिंग और बढ़ती ऐंठन हो सकती है खतरे का संकेत

NHS के अनुसार, गर्भपात का सबसे आम संकेत वजाइनल ब्लीडिंग है। यह केवल कुछ बूंदों की स्पॉटिंग से लेकर पीरियड जैसी या उससे अधिक ब्लीडिंग तक हो सकती है। कई महिलाओं में इसके साथ निचले पेट या कमर में पीरियड जैसे क्रैम्प्स  भी महसूस हो सकते हैं। इस बारे में डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "अगर ब्लीडिंग धीरे-धीरे बढ़ रही है और उसके साथ दर्द भी बढ़ता जा रहा है, तो इसे केवल सामान्य प्रेग्नेंसी लक्षण समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। जांच से ही पता चलेगा कि प्रेग्नेंसी सेफ है या किसी जांच की जरूरत है।"

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2. टिश्यू या क्लॉट्स का निकलना

यदि ब्लीडिंग के दौरान खून के बड़े क्लॉट्स,  गुलाबी-भूरे या सफेद/ग्रे रंग का टिश्यू जैसा पदार्थ निकलता है, तो यह भी गर्भपात का संभावित संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वास्तव में प्रेग्नेंसी टिश्यू  है या नहीं। इसके लिए जांच और अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ सकती है।

3. अचानक तेज पेट दर्द को हल्के में न लें

पहली तिमाही में हल्की स्ट्रेचिंग या कभी कभी उठने वाले दर्द हो सकते हैं, लेकिन बहुत तेज, लगातार या बढ़ता हुआ पेट दर्द खतरे का संकेत हो सकता है। खासकर यदि दर्द एक तरफ ज्यादा हो और उसके साथ ब्लीडिंग हो, तो एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी गंभीर स्थिति को भी ध्यान में रखना  जरूरी है। डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "एक तरफ तेज दर्द, ब्लीडिंग, चक्कर या कमजोरी को गर्भपात मानकर घर पर इलाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की संभावना को भी ध्यान में रखना जरूरी है।"

4. चक्कर, बेहोशी या कंधे और सिरे में दर्द

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अगर ब्लीडिंग के साथ महिला को तेज चक्कर आएं, बेहोशी जैसा महसूस हो, बहुत कमजोरी लगे या कंधे के सिरे पर असामान्य दर्द हो, तो यह इमरजेंसी हो सकती है। खासकर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में इंटरनल ब्लीडिंग होने पर ऐसे लक्षण सामने आ सकते हैं।

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5. कमर के निचले हिस्से में दर्द 

अचानक मिसकैरेज होने पर कमर के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है। आमतौर पर महिलाएं इसे गर्भपात से जोड़कर नहीं देखती हैं, जो कि सही नहीं है। अगर आपको हैवी ब्लीडिंग के साथ-साथ, पेट दर्द, ऐंठन और कमर के निचले में दर्द होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। यह भी एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसे इग्नोर नहीं करना चाहिए।

क्या प्रेग्नेंसी के लक्षण कम होना गर्भपात का संकेत है?

कई महिलाएं यह मान लेती हैं कि मतली, ब्रेस्ट में दर्द या थकान अचानक कम हो जाए तो गर्भपात हो गया है। केवल प्रेग्नेंसी के लक्षणों के कम होने से गर्भपात की पुष्टि नहीं की जा सकती। कुछ महिलाओं में शुरुआत से ही लक्षण हल्के होते हैं और कभी-कभी गर्भपात बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी अल्ट्रासाउंड में पता चलता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

डॉ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं, "प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह की ब्लीडिंग हो, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है। वहीं, भारी ब्लीडिंग, तेज पेट दर्द, चक्कर/बेहोशी, कंधे में दर्द या बहुत ज्यादा कमजोरी हो, तो इसे इमरजेंसी समझें और तुरंत मेडिकल केयर लें।" डॉ. शोभा गुप्ता आगे कहती हैं, "सबसे जरूरी बात यह है कि गर्भपात का दोष महिला के स्ट्रेस, चलने-फिरने या सामान्य रोजमर्रा की गतिविधियों पर नहीं डालना चाहिए। शुरुआती गर्भपात के कई मामलों में कारण प्रेग्नेंसी के क्रोमोसोमल डेवलपमेंट से जुड़ा होता है और इसे महिला की किसी सामान्य गतिविधि का परिणाम मानना सही नहीं है।"

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निष्कर्ष

पहली तिमाही में ब्लीडिंग या क्रैम्प्स  हमेशा गर्भपात नहीं होते, लेकिन शरीर के खतरे के संकेत को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। समय पर अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर की सलाह प्रेग्नेंसी की स्थिति स्पष्ट करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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FAQ

  • पहली तिमाही में गर्भपात होने का खतरा सबसे ज्यादा क्यों होता है?

    यह सच है कि सबसे ज्यादा गर्भपात पहली तिमाही में होते हैं, लेकिन इसका कोई सटीक कारण नहीं है। आमतौर पर अधिकांश गर्भपात (लगभग 50% से अधिक) क्रोमोसोमल असामान्यताओं (Chromosomal Abnormalities) के कारण होते हैं। इसका मतलब है कि भ्रूण का विकास प्राकृतिक रूप से सही तरह से नहीं हो पाता।
  • पहली तिमाही में गर्भपात का खतरा कम करने के लिए क्या करें?

    कंसीव करने के बाद तुरंत डॉक्टर से मिल लें और प्रीनेटल विटामिन्स (विशेषकर फॉलिक एसिड) शुरू करें। इसके अलावा सही बुरी आदतें जैसे धूम्रपान, शराब और अत्यधिक कैफीन से पूरी तरह दूरी बना लें। अगर कोई किसी बीमारी की मेडिकल हिस्ट्री है, तो इस संबंध में डॉक्टर को जरूर बताएं।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 04, 2026 17:17 IST

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  • Sep 04, 2026 17:17 IST

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