प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे में मां और होने वाले बच्चे दोनों की बेहतर सेहत और विकास के लिए पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स को सही मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है। इस समय गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों के बनने और सही विकास के लिए ज्यादा एनर्जी यानी कैलोरी की जरूरत होती है। हालांकि, यह जरूरत प्रेग्नेंसी की हर तिमाही के दौरान बदलती रहती है। इसलिए, आइए इस लेख में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को तिमाही के दौरान कितनी कैलोरी की जरूरत होती है?
तिमाही के अनुसार प्रेग्नेंसी में कितनी कैलोरी की जरूरत होती है?
Dr.(Prof.) Anju Suryapani के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। गर्भ में शिशु के सेल्स के बनने, प्लेसेंटा के विकास और आपके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण महिलाओं को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है। इसलिए, हर स्थिति में कैलोरी इनटेक की जरूरत भी अलग-अलग होती है।
1. पहली तिमाही
Dr.(Prof.) Anju Suryapani बताती हैं कि प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में भ्रूण का साइज बहुत छोटा होता है। इस समय उसे विकास के लिए अलग से बहुत ज्यादा एनर्जी की जरूरत नहीं होती है। इसलिए, शुरुआती 3 महीनों में उन्हें कैलोरी की नॉर्मल खुराक से ज्यादा लेने की जरूरत नहीं होती है। साल 2024 में International Journal of Research and Scientific Innovation में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार पहली तिमाही में महिलाओं को 1801 कैलोरी लेना काफी होता है।
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी की इस स्टेज में ज्यादातर महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी, खाने की खुशबू बेकार लगना और जी मिचलाने जैसी समस्याएं होती हैं। इसलिए, इस समय महिलाओं को ज्यादा खाने का प्रेशर नहीं लेना चाहिए। दिन में 3 बार पेट भरकर खाने के स्थान पर आप छोटे-छोटे हिस्सों में 5 से 6 बार हल्का भोजन करें। पहली तिमाही में कैलोरी से ज्यादा फॉलिक एसिड की जरूरत होती है, जो बच्चे के दिमाग और रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए जरूरी है।
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2. दूसरी तिमाही
दूसरी तिमाही को प्रेग्नेंसी का सबसे आरामदायक समय माना जाता है। इस स्टेज में जी मिचलाना कम हो जाता है, भूख खुलकर लगती है और बच्चे का तेजी से शारीरिक विकास शुरू होता है। उसकी हड्डियां मजबूत होने लगते हैं और अंगों का आकार बढ़ता है। Dr.(Prof.) Anju Suryapani कहती हैं कि इस समय महिलाओं के शरीर को रोजाना के कैलोरी इनटेक से लगभग 300 से 340 ज्यादा कैलोरी की जरूरत होती है। ऊपर बताई गई रिसर्च के अनुसार महिलाओं को इस तिमाही में 2201 कैलोरी तक लेना काफी होता है।
300 कैलोरी इनटेक पूरा करने के लिए अलग से या ज्यादा खाने की जरूरत नहीं होती है। बल्कि यह 1 गिलास दूध के साथ मुट्ठी भर भुने हुए चने या 1 कटोरी ताजा दही और एक सेब खाकर आसानी से पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपनी डाइट में प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा भी बढ़ा सकते हैं।
3. तीसरी तिमाही
Dr.(Prof.) Anju Suryapani बताती हैं कि प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में शिशु का वजन बहुत तेजी से बढ़ता है, उसके फेफड़े मैच्योर होते हैं और स्किन के नीचे फैट की परत बनती है। साथ ही, मां के शरीर को डिलीवरी और ब्रेस्टफीडिंग के लिए एनर्जी जमा करने में भी मदद मिलती है। इस समय आपको अपने खाने में लगभग 450 ज्यादा कैलोरी रोजाना की जरूरत होती है। International Journal of Research and Scientific Innovation की रिसर्च में भी यही बताया गया है कि तीसरी तिमाही में 2402 कैलोरी लेना काफी माना जाता है। प्रेग्नेंसी के इस स्टेज में महिलाओं को बहुत ज्यादा खाना खाने की जरूरत नहीं होती है, बल्कि सिर्फ 1 बाउल दाल और थोड़े पनीर से इस कमी को पूरा किया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी में कैलोरी की मात्रा क्यों बढ़नी चाहिए?
प्रेग्नेंसी के दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कैलोरी का सेवन बढ़ाना मां के स्वास्थ्य और बच्चे के विकास के लिए जरूरी है। साल 2023 में Journal of Human Nutrition and Food Science में प्रकाशित स्टडी में बताया गया है कि प्रेग्नेंसी में ज्यादा कैलोरी का सेवन इसलिए जरूरी होता है क्योंकि यह शरीर को पेट और जांघों के आसपास ज्यादा फैट जमा करने में मदद करता है। यह फैट प्रेग्नेंसी को सफल बनाने और भ्रूण के विकास के लिए जरूरी एनर्जी भी देता है। अगर कैलोरी के सेवन को कम किया जाता है तो इससे शरीर में एनर्जी की कमी हो सकती है, जो भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है।

डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह क्यों जरूरी है?
हर प्रेग्नेंट महिला का शरीर, वजन, मेटाबॉलिज्म, मेडिकल हिस्ट्री और पोषण से जुड़ी जरूरतें बिल्कुल अलग होती हैं। ऐसे में बिना एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह के अपनी मर्जी से डाइट या कैलोरी इंटेक तय करना खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट या डॉक्टर आपकी सेहत, ब्लड रिपोर्ट और प्रेग्नेंसी की तिमाही के आधार पर सही और सुरक्षित डाइट प्लान तैयार करते हैं। ऐसा करने से आपको और होने वाले बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पोषण मिल सकता है। इतना ही नहीं, जेस्टेशनल डायबिटीज या ज्यादा वजन बढ़ने जैसी समस्याओं से बचाव करने और जंक फूड की जगह सही पोषक तत्व लेने में भी मदद मिल पाती है।
निष्कर्ष
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान कैलोरी की मात्रा हर तिमाही में अलग-अलग होती है। इसलिए, आप अपनी सेहत और बच्चे के बेहतर विकास के लिए कैलोरी की सही मात्रा के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना जरूरी है।
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FAQ
गर्भवती महिला को दिन में कितनी बार खाना खाना चाहिए?
प्रेग्नेंसी में एक बार से ज्यादा खाने के स्थान पर दिनभर में 5 से 6 बार थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए। इसमें 3 बार मुख्य भोजन और 2 से 3 बार हल्का पौष्टिक नाश्ता शामिल करना चाहिए।गर्भवती महिला को सुबह-सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए?
प्रेग्नेंसी में सुबह खाली पेट लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए। उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पिएं और मितली से बचने के लिए तुरंत कुछ हल्का और पौष्टिक लें। आप अपने ब्रेकफास्ट में 4-5 भीगे बादाम, एक अखरोट और कुछ हेल्दी नाश्ता जैसे चीला या पोहा खा सकते हैं।
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Jul 25, 2026 21:37 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani