Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

प्रेग्नेंसी में पहला अल्ट्रासाउंड कब होता है? डॉक्टर से जानें इसमें क्या-क्या पता चलता है

First Ultrasound In Pregnancy: प्रेग्नेंसी कंफर्म होने के बाद पहला अल्ट्रासाउंड 6 से 8 सप्ताह के बीच कराने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि अल्ट्रासाउंड की मदद से भ्रूण और मां के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी मिलती है।

प्रेग्नेंसी कंफर्म होने के बाद महिला के मन में सबसे पहला सवाल अक्सर यही होता है कि अब पहला अल्ट्रासाउंड कब कराना चाहिए? आमतौर पर यही माना जाता है कि शुरुआती अल्ट्रासाउंड सिर्फ बच्चे की तस्वीर देखने या हार्टबीट सुनने के लिए होती है, जबकि यह कई अन्य जरूरी चीजों का भी खुलासा करती है। असल में, अल्ट्रासाउंड डॉक्टर को प्रेग्नेंसी की सही स्थिति समझने, उसकी अवधि तय करने और किसी संभावित परेशानी को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद करती है। आइए, वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं इससे और क्या-क्या पता चलता है।

डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "पहले अल्ट्रासाउंड का सही समय हर महिला के लिए एक जैसा नहीं होता। अगर प्रेग्नेंसी सामान्य है और कोई परेशानी नहीं है, तो डॉक्टर आमतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तोंमें स्कैन की सलाह देते हैं। वहीं दर्द या ब्लीडिंग जैसी शिकायत होने पर जांच पहले भी करनी पड़ सकती है।"

पहला अल्ट्रासाउंड कब करवाना चाहिए?

when and why is the first ultrasound done during pregnancy 01 (2)

UT Southwestern Medical Center के अनुसार, पहला अल्ट्रासाउंड छठें सप्ताह पर किया जाना चाहिए आमतौर पर डॉक्टर शुरुआती प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड 6 से 8 सप्ताह के बीच करने की सलाह देते हैं। इस समय स्कैन से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि प्रेग्नेंसी गर्भाशय के अंदर सही जगह पर है या नहीं, जेस्टेशनल सैक यानी गर्भ थैली और डेवलपिंग एम्ब्रियो की स्थिति कैसी है और प्रेग्नेंसी कितने सप्ताह की हुई है।

हालांकि बहुत जल्दी अल्ट्रासाउंड कराने पर फीटल हार्टबीट का पता नहीं चलता है। इससे महिलाओं को घबराना नहीं चाहिए। कभी-कभी प्रेग्नेंसी वास्तव में अनुमान से कुछ दिन छोटी होती है। इस तरह की स्थिति में डॉक्टर कुछ समय बाद फिर से स्कैन करने की सलाह दे सकते हैं।

साल 2013 में Seminars in Perinatology में प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार, शुरुआती गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड किया जाना बहुत जरूरी होता है। यह सुविधाजनक, दर्द रहित और सटीक डायग्नोस्टिक टूल कहलाता है।

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पहला अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी है?

प्रेग्नेंसी की लोकेशन का पता चलनाः डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "प्रेग्नेंसी का पता चलते ही पहला अल्ट्रासाउंड किया जाना बहुत जरूरी होता है। इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। दरअसल, अल्ट्रासाउंड के जरिए प्रेग्नेंसी की लोकेशन और विजबिलिटी को देखना होता है। खासकर, जिन महिलाओं को पेट में दर्द या वजाइनल ब्लीडिंग हो रही हो, उनमें एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी स्थिति को समय रहते पता चल जाता है।"

जानकारी के लिए बता दें कि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भ्रूण गर्भाशय के बजाय किसी दूसरी जगह, अक्सर फेलोपियन ट्यूब, में इम्प्लांट हो जाता है। यह एक जटिल और जानलेवा स्थिति होती है। इसके लिए इमरजेंसी मेडिकल इवैल्यूएशन की जरूरत पड़ सकती है।

जेस्टेशनल उम्र का पता चलनाः शुरुआती स्कैन से जेस्टेशनल एज यानी गर्भावस्था की अवधि का अनुमान लगाने में भी मदद मिलती है। इससे डिलीवरी की तारीख का अनुमान लगाने में मदद मिलती है। खासकर,  खासकर उन महिलाओं में यह अधिक उपयोगी है, जिनका मासिक धर्म चक्र अनियमित है या जिन्हें आखिरी माहवारी की तारीख ठीक से याद नहीं है।

हार्टबीट का पता चलनाः Ultrasonography के अनुसार, आमतौर पर पहला अल्ट्रासाउंड कराने से फीटल हार्टबीट का पता चलता है। यह बहुत जरूरी है। वैसे भी शुरुआती सप्ताहों में अल्ट्रासाउंड कराने से भ्रूण की कार्डियक एक्टिविटी नजर आने लगती है। हालांकि, प्रेग्नेंसी की वास्तविक उम्र और स्कैन के तरीके पर निर्भर करता है।

डॉ. शोभा कहती हैं, "अगर प्रेग्नेंसी के बिल्कुल शुरुआती दौर में बच्चे की हार्टबीट स्पष्ट नहीं दिखती, तो इसे तुरंत गर्भपात या शिशु में जन्मदोष से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। ध्यान रखें कि एक अकेली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। आमतौर पर डॉक्टर पूरी क्लीनिकल हिस्ट्री और जरूरत पड़ने पर दोबारा स्कैन करने की सलाह देते हैं।"

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क्या प्रेग्नेंसी के हर 6 सप्ताह पर अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी है?

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "हर महिला का शरीर अलग होता है। इसलिए, हर प्रेग्नेंसी में बिल्कुल एक ही समय पर स्कैन कराना जरूरी नहीं होता। अगर महिला को तेज पेट दर्द, वजाइनल ब्लीडिंग, चक्कर या कमजोरी जैसी शिकायत हो, तो डॉक्टर तत्काल अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं। पहले एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या अन्य जटिलताओं से संबंधित मेडिकल हिस्ट्री होने पर भी शुरुआती मॉनिटरिंग बहुत जरूरी हो जाती है।"

कुछ स्थितियों में ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसमें अल्ट्रासाउंड प्रोब के माध्यम से गर्भाशय तथा शुरुआती प्रेग्नेंसी की ज्यादा स्पष्ट तस्वीर मिल सकती है। सामान्यतः डॉक्टर महिला की स्थिति के अनुसार एब्डोमिनल या ट्रांसवजाइनल स्कैन का विकल्प चुनते हैं।

पहले अल्ट्रासाउंड के बाद महिलाएं क्या करें?

अल्ट्रासाउंड के जरिए शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिल जाती है। हालांकि, सिर्फ अल्ट्रासाउंड पर निर्भर रहना सही नहीं है। पहले अल्ट्रासाउंड के बाद प्रेग्नेंसी की मॉनिटरिंग आगे भी जारी रहती है। लगभग 11 से 13 सप्ताह के बीच एनटी स्कैन जैसी स्क्रीनिंग की जा सकती है, जबकि दूसरी तिमाही में डिटेल्ड अनोमली स्कैन किया जाता है।

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निष्कर्ष

प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका सही समय पर किया जाना आवश्यक होता है। ध्यान रखें कि प्रेग्नेंसी के दौरान किया जाने वाला हर स्कैन जरूरी होता है और उनका उद्देश्य भी अलग-अलग होता है। डॉ. शोभा गुप्ता प्रेग्नेंट महिलाओं को खास सलाह देती हैं वे इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्कैन न कराएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना बेहतर है। विशेषकर, शुरुआती अल्ट्रासाउंड को डॉक्टर के कहने पर ही कराएं। इससे न सिर्फ प्रेग्नेंसी की पहली तस्वीर मिलती है, बल्कि शिशु और मां के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी भी मिलती है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या गर्भावस्था में बार-बार ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVUS) कराने से भ्रूण को नुकसान होता है?

    नहीं, अल्ट्रासाउंड में साउंड वेव्स का उपयोग होता है, हानिकारक रेडिएशन का नहीं। यह मां और शिशु दोनों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।
  • क्या अल्ट्रासाउंड स्कैन से पहले बहुत अधिक पानी पीना पीना जरूरी होता है?

    यदि एब्डोमिनल (पेट के ऊपर से) अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है, तो मूत्राशय भरा होना जरूरी होता है ताकि गर्भाशय की स्पष्ट तस्वीर दिखे। हालांकि, ट्रांसवजाइनल (TVUS) स्कैन के लिए मूत्राशय खाली होना चाहिए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Aug 27, 2026 14:47 IST

    Published By : Meera Tagore
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