अल्ट्रासाउंड, जिसे हम सोनोग्राफी भी कहते हैं। यह एक तरह की मेडिकल इमेजिंग तकनीक है, जो शरीर के अंदरूनी अंगों की तस्वीरें बनाने के लिए हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स का उपयोग करती है। इसकी मदद से कई तरह की बीमारियों की सटीक जानकारी मिलती है। क्या आप जानते हैं कि पीसीओएस में भी यह जरूरी है? जी, हां! आइए Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं कि पीसीओएस में अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी है और इसके जरिए किस तरह की जानकारी मिलती है।
पीसीओएस में अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी है?
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पीसीओएस की सटीक जानकारी के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे महत्वपूर्ण टूल माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह अंडाशय बनावट को स्पष्ट दिखाता है। इसके जरिए डॉक्टर अंडाशय के आकार और उसमें मौजूद कई छोटे-छोटे फॉलिकल्स की पहचान कर पाते हैं। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड के जरिए यह भी सुनिश्चित होता है कि कहीं मरीज को सिस्ट या फाइब्रॉएड जैसी समस्या तो नहीं है। यह गर्भाशय की परत की मोटाई को मापकर ओव्यूलेशन और फर्टिलिटी की स्थिति को समझने में भी मदद करता है। इस तरह मरीज को सही ट्रीटमेंट मिलता है।
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पीसीओएस में अल्ट्रासाउंड से क्या-क्या पता चलता है?
- पॉलीसिस्टिक ओवेरियन मॉर्फोलॉजी (PCOS के लक्षणों) की जल्द पहचान की जाती है।
- अल्ट्रासाउंड की मदद से अंडाशय को देखने और छोटे फॉलिकल्स की पहचान करने में मदद मिलती है।
- अल्ट्रासाउंड की मदद से डाॅक्टर अनावश्यक या गलत उपचार से बच जाते हैं।
- इस प्रक्रिया की मदद से अंडाशय के आकार और कार्य का आकलन करने में मदद मिलती है।
- यह तकनीक ओवेरियन वॉल्यूम और फॉलिकुलर गतिविधि की सटीक जानकारी देती है।
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पीसीओएस में अल्ट्रासाउंड करवाने से ट्रीटमेंट में क्या फायदा होता है?
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अल्ट्रासाउंड इतना प्रभावी तरीका है कि हर पीसीओएस में हर स्थिति की सटीक जानकारी मिल जाती है। ऐसे में मरीज को सही ट्रीटमेंट मिलता है और समय पर इलाज शुरू हो जाता है। यहां तक कि लक्षण नजर न आने के बावजूद अल्ट्रासाउंड के जरिए पीसीओएस कंफर्मेशन किया जा सकता है। इसके अलावा, अल्ट्रासाउंड के बाद जो भी ट्रीटमेंट चल रहा है, वह कितना प्रभावी है, इसके लिए भी फाॅलो अप अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। इसके अनुसार मरीज की जीवनशैली में बदलाव, दवाओं और हार्मोनल थेरेपी में मदद मिलती है। साथ ही इसका पता लगाया जाता है कि फॉलिकुलर पैटर्न में सुधार है या नहीं? अगर सुधार न हो, तो ट्रीटमेंट के तरीकों में बदलाव किया जाता है। वहीं, जब मरीज अल्ट्रासाउंड पर स्पष्ट सुधार नजर आता है, तो उन्हें जीवनशैली में जो बदलाव किए हैं, उन्हें बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
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निष्कर्ष
महिलाओं को पीसीओएस जैसी समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए। यह एक ऐसी बीमारी है, जो महिला की रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असर डालती है। अगर किसी महिला के परिवार में पीसीओएस का इतिहास है, तो उन्हें डाॅक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड करवा लेना चाहिए। इस तरह, होने वाली गंभीर समस्या को फैलने से समय पर रोका जा सकता है।
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FAQ
क्या PCOS के लिए अल्ट्रासाउंड खाली पेट करवाना जरूरी है?
नहीं, पेल्विक अल्ट्रासाउंड के लिए खाली पेट रहने की आवश्यकता नहीं होती है।क्या अविवाहित लड़कियों के लिए भी अल्ट्रासाउंड सुरक्षित है?
हां, अविवाहित लड़कियों के लिए आमतौर पर एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड (पेट के ऊपर से) किया जाता है, जो पूरी तरह से सेफ है।
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Apr 29, 2026 15:07 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 29, 2026 15:07 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta